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तबलीगी जमात, मुसलमान व बॉम्बे हाइकोर्ट की टिप्पणी- जहर उगलनेवाली मीडिया को शर्म नहीं आयेगी!

Surjit Singh

बॉम्बे हाइकोर्ट ने कहा है कि तबलीगी जमात के लोगों को “बलि का बकरा” बनाया गया. कोर्ट ने 29 विदेशियों के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की. कोर्ट ने कहाः जब महामारी या विपत्ति आती है, तो सरकार बलि का बकरा ढ़ूंढ़ने की कोशिश करती है. इस बात के आसार हैं कि इन विदेशियों को बलि का बकरा बनाया गया.

अब याद करिये, पांच माह पहले का वक्त. जब केंद्रीय गृह मंत्रालय के निर्देश पर विदेश से आये तबलीगी जमात के लोगों के खिलाफ देश भर में प्राथमिकी दर्ज की गयी. उन्हें जेल भेजा गया. उन्हें देश में कोरोना फैलाने के लिए जिम्मेदार ठहराया गया. स्वास्थ्य मंत्रालय तक ने ऑन रिकॉर्ड प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि तबलीगी जमात के कारण देश में कोरोना फैल रहा है.

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यह भी याद करिये. किस तरह पारंपरिक मीडिया अखबार व टीवी और वेब मीडिया ने तबलीगी जमात के बहाने देश के मुस्लिमों को निशाना बनाया. टीवी के बड़े-बड़े पत्रकारों ने करीब एक माह तक इसी मुद्दे पर बहस की. देश के मुसलमानों को “कोरोना जेहादी” तक बताया. जहर उगला.

यह भी याद करिये, तब सूत्रों के हवाले से कैसी-कैसी खबरें आने लगी थीं. मौलानाओं ने बिरियानी मांगी, अर्द्धनग्न होकर नर्सों को छेड़ा, मौलानाओं ने थूका, सबके सामने पेशाब कर दिया. इन खबरों को दिन भर टीवी पर परोसने व बहस कराने का मकसद क्या था. मकसद था- मूल समस्या से ध्यान भटकाना. और मूल समस्या क्या थी उस वक्त. कोरोना को लेकर मोदी सरकार का देर से सक्रिय होना और समय रहते इससे लड़ने की तैयारी करने में विफल रहना. सबसे बड़ी समस्या थी एक सनक की तरह चार घंटे का नोटिस देकर देश भर में लॉकडाउन लागू कर देना. जिसके कारण 100 से अधिक लोगों की जान गयी.

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याद करिये और तब के नेताओं के बयान उनके ट्विटर और फेसबुक पर खोजिये. देश के, राज्य के और अपने शहर के बयान को दुबारा पढ़िये. तब पता चलेगा किस तरह खास धर्म के लोगों के प्रति घृणावाले बयान आ रहे थे. और उसे मीडिया बिना पुष्टि किये दिखा रहा था या प्रकाशित कर रहा था. यही कारण था कि रांची के हिन्दपीढ़ी में मुसलमानों ने सभी दैनिक अखबारों का बहिष्कार कर दिया था.

पत्रकार होने के नाते हमें शर्म आनी चाहिए. जिस वक्त हमें कोरोना की रोकथाम करने, लोगों को जागरूक बनाने, सरकार से उसकी तैयारियों पर सवाल करने के काम करने थे, उस वक्त हम एक मजहब के खिलाफ जहर उगल रहे थे.

याद करिये उन सभी लोगों को. रांची के हिन्द पीढ़ी मुहल्ले में जब तबलीगी जमात की मलेशियाई महिला कोरोना पॉजिटिव पायी गयी थी, किन लोगों ने सोशल मीडिया पर जहर उगला था. किस तरह एक पूरे मुहल्ले और कौम को देशद्रोही से लेकर क्या-क्या नहीं कहा गया था. अब उन्हें बताना चाहिए कि जब तबलीगी जमाती जेल में डाल दिये गये, तो फिर देश भर में कोरोना फैला कैसे.

याद करिये, उस वक्त कैसे रांची पुलिस और झारखंड सरकार को कैसे-कैसे शब्दों से नवाजा गया था. क्या अब ऐसे लोग भी माफी मांग कर प्रायश्चित करेंगे.

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