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नियम तोड़कर बिना टेंडर निकाले पंचायतों में एक ही सप्लायर से खरीदी गयीं लाखों की टेबल-कुर्सियां

  • 1.50 लाख रुपये से अधिक की सामग्री खरीदने के लिए अखबार में टेंडर प्रकाशित कराने का है प्रावधान
  • बिना टेंडर निकाले एक ही सप्लायर को पांच लाख रुपये तक का किया गया भुगतान
  • बीडीओ ने आरटीआई के जवाब में कहा- नहीं हुई है कोई वित्तीय अनियमितता

Amit Jha

Ranchi : धनबाद की पंचायतों में नियमों के उल्लंघन का मामला सामने आ रहा है. प्रावधानों के अनुसार पंचायतों में 1.50 लाख रुपये से ज्यादा की सामग्री की खरीद के लिए टेंडर जारी करना जरूरी है, लेकिन कई पंचायतों में इस नियम की अनदेखी की गयी है. ऐसा करनेवालों में तोपचांची प्रखंड की कई पंचायतें शामिल हैं.

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दरअसल, गुनघसा, ढांगी, प्रधानखंता, गुंग पंचायतों में पंचायत सचिवालय के लिए टेबल-कुर्सी की खरीद की गयी है. यह खरीद इसी साल की गयी है. इसके लिए किसी अखबार में टेंडर जारी नहीं हुआ, जबकि इसकी खरीदारी में तीन से पांच लाख रुपये तक की लागत आयी है. दिलचस्प बात तो यह है कि बीडीओ मानते हैं कि इस मामले में किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता नहीं हुई है. हालांकि, पंचायती राज विभाग के अनुसार यदि ग्राम पंचायत बिना टेंडर के 1.50 लाख रुपये से अधिक की सामग्री खरीदती है, तो इसे वित्तीय अनियमितता माना जायेगा.

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RTI के जवाब में कहा गया- नहीं है वित्तीय अनियमितता

गेंदनावाडीह, तोपचांची में रहनेवाले बैजनाथ प्रसाद महतो ने तोपचांची बीडीओ के यहां सूचना का अधिकार अधिनियम-2005 के तहत आवेदन किया था. पूछा था कि चैता और गुनघसा पंचायत में 14वें वित्त आयोग के पैसे से सामग्री की खरीदारी में वित्तीय अनियमितता हुई है या नहीं. साथ ही इस संबंध में की गयी कार्रवाई की भी जानकारी मांगी थी. तोपचांची के बीडीओ सह जनसूचना पदाधिकारी ने बताया कि वित्तीय नियम का उल्लंघन नहीं हुआ है. इस आरटीआई से यह भी पता चला कि तोपचांची की कई पंचायतों ने पैराडाइज ट्रेडर्स, देवघर से ही सामग्रियों की खरीदारी में दिलचस्पी दिखायी. एयरपोर्ट बलिया चौक श्रवण रोड, देवघर से एक ही तरह की सामग्री (टेबल-कुर्सी) की खरीद बगैर टेंडर के की गयी. उसके लिए उसके खाते में तीन लाख से लेकर लगभग पांच लाख रुपये तक का भुगतान किया गया है.

यह है विभागीय आदेश

पंचायती राज निदेशक आदित्य रंजन ने पंचायतों को जारी एक लेटर (पत्रांक 1911, 25-11-20) में पिछले दिनों कहा था कि 15वें वित्त आयोग की पहली किस्त की राशि पंचायतों को उपलब्ध करायी जा चुकी है. इस पैसे का खर्च उम्मीदों के अनुरूप नहीं है. ग्राम पंचायतों को 1.50 लाख रुपये से अधिक की सामग्री की खरीद निविदा के जरिये ही करनी है. ऐसा नहीं करने पर इसे गड़बड़ी माना जायेगा. एक ही प्रकार की योजनाओं के लिए और टेंडर से बचने के लिए उपाय करना भी वित्तीय नियमों का उल्लंघन है. ऐसे में संबंधित कर्मियों, निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के विरुद्ध कार्रवाई की जा सकती है.

अखबार में टेंडर प्रकाशित कराये बगैर अधिकतम 1.50 लाख रुपये तक की सामग्री की खरीदारी की अनुमति से संबंधित प्रावधान का उल्लेख वर्ष 2011 में झारखंड सरकार के वित्त विभाग के सचिव द्वारा जारी लेटर (ज्ञापांक- 221, दिनांक- 03/02/2011) में भी है. इसी प्रावधान को पंचायती राज निदेशक द्वारा पंचायतों को जारी लेटर (पत्रांक 1911, 25-11-20) में भी यथावत रखा गया है.

नियम तोड़कर बिना टेंडर निकाले पंचायतों में एक ही सप्लायर से खरीदी गयीं लाखों की टेबल-कुर्सियां

नियम तोड़कर बिना टेंडर निकाले पंचायतों में एक ही सप्लायर से खरीदी गयीं लाखों की टेबल-कुर्सियां

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