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टी-शर्ट्स घोटाला (3): बिल्टी में जिक्र ही नहीं कि किन ट्रकों से झारखंड भेजी गयीं करोड़ों की टी-शर्ट्स

Akshay Kumar Jha

Ranchi: रघुवर दास के नेतृत्व वाली सरकार में 2016 में झारखंड स्थापना दिवस के मौके पर टी-शर्ट बांटने के नाम पर जो घोटाला हुआ, उसकी चुगली सरकारी फाइलें ही करती हैं. जिन चालान और बिल्टी पर 6 करोड़ की राशि का भुगतान हुआ, उनके फर्जी होने के तमाम सबूत हैं. सरकार का दावा है कि सड़क और रेल दोनों मार्गों से टी-शर्ट लुधियाना से धनबाद और रांची लायी गयीं. कागजात कहते हैं कि पांच अलग-अलग कन्साइनमेंट के जरिए सड़क मार्ग से जो टी-शर्ट्स भेजी गयीं, वह धनबाद पहुंचीं और ट्रेन से टी-शर्ट्स की जो खेप लायी गयीं, उन्हें रांची में रिसीव किया गया.

रांची में आयी टी-शर्ट्स की रिसीविंग झारखंड शिक्षा परियोजना परिषद के अधिकारी ने की है. लेकिन धनबाद में टी-शर्ट्स की खेप किसने रिसीव की, इसका पता नहीं चल पाया है.

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किन ट्रकों से टी-शर्ट्स धनबाद आयीं, पता ही नहीं

सरकारी कागजात की बात करें तो पांच ट्रक टी-शर्ट्स लेकर लुधियाना से धनबाद पहुंचे. जबकि जिन ट्रांसपोर्टरों के जरिए धनबाद कन्साइनमेंट भेजे जाने का जिक्र है, वे बिल और बिल्टी को फर्जी बता रहे हैं.

जिन बिल्टी का हवाला देकर टी-शर्ट्स धनबाद पहुंचने का विवरण दर्ज किया गया है, इन सभी बिल्टियों में कहीं भी ट्रक के नंबर का जिक्र नहीं है. जबकि शायद ही ऐसा होता होगा कि बिल्टी में ट्रक के नंबर का जिक्र ना हो.

बिना ट्रक के नंबर के बिल्टी ऐसे ही फर्जी मानी जाती है. बिल्टी में जहां भी लॉरी नंबर का जिक्र है, वो खाली है. वहां कुछ भी नहीं लिखा हुआ है.

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बिना रजिस्ट्रेशन के वाहन से टी-शर्ट्स पहुंचाये गये रेलवे स्टेशन

सराकरी कागजात बताते हैं कि नौ नवंबर से 15 नवंबर तक टी-शर्ट कंपनी ने रेलवे से टी-शर्ट रांची भेजे. कुल छह बार कंपनी ने किसी वाहन से टी-शर्ट लुधियाना रेलवे स्टेशन भेजा. टी-शर्ट दो वाहनों से भेजा गया, जिनमें से एक वाहन का रजिस्ट्रेशन है ही नहीं.

मतलब इस नंबर की कोई गाड़ी पंजाब में रजिस्टर्ड ही नहीं हुई है. यह एक फर्जी नंबर है. वहीं चार बार जिस वाहन से टी-शर्ट रेलवे स्टेशन भेजा गया वो टाटा ऐस (TATA ACE) का नंबर है.

सरकारी कागजात का दावा है कि इस छोटे से वाहन में करीब 15.5 लाख की टी-शर्ट्स एक बार में रेलवे स्टेशन भेजी गयी, जबकि बाकी तीन बार 14.5 लाख, 10 लाख और 9.6 लाख रुपये की टी-शर्ट रेलवे स्टेशन भेजी गयी. टाटा ऐस जैसे छोटे वाहन से क्या टी-शर्ट्स की इतनी बड़ी खेप भेजना संभव है?

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