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… तो आरएसएस की शाखाओं में सरकारी कर्मचारी नहीं जा पायेंगे, सरकारी कैंपस में शाखाओं पर लगेगा बैन  

मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर प्रतिबंध और सरकारी कैंपस में संघ की शाखाओं के लगाने पर बैन लगायेगी. इसकी तैयारी की जा रही है

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 Bhopal :  मध्यप्रदेश की कांग्रेस सरकार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर प्रतिबंध और सरकारी कैंपस में संघ की शाखाओं के लगाने पर बैन लगायेगी. इसकी तैयारी की जा रही है. ऐसा होने पर सूबे की सियासत में कांग्रेस और भाजपा-संघ के बीच बड़ा सियासी टकराव की संभावना बनेगी. बता दें कि चुनाव के समय कांग्रेस ने अपने वचनपत्र में कहा था कि पार्टी सत्ता में आते ही राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर प्रतिबंध और सरकारी कैंपस में संघ की शाखाओं के लगाने पर बैन लगायेगी. अब जबकि मध्यप्रदेश में कैबिनेट गठन के बाद मुख्यमंत्री कमलनाथ के नेतृत्व में सरकार पूरी तरह फॉर्म में आ गयी है, तब सरकार ने संघ को लेकर अपने वचन को पूरा करने की तैयारी कर ली है. कमलनाथ सरकार ने इसके लिए केंद्र सरकार के आदेश को आधार बनाकर बैन लगाने की तैयारी कर ली है.

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सामान्य प्रशासन विभाग ने सरकारी कर्मचारियों के संघ की शाखाओं में जाने और सरकारी परिसरों में संघ की शाखा लगाने पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, जिसे जल्द ही सरकार की मंजूरी के बाद लागू किये जाने की बात कही जा रही  है.

दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए सरकार ने  बैन लगाया था

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अधीर रंजन चौधरी के साथ-साथ केरल के नेता के सुरेश, पार्टी प्रवक्ता मनीष तिवारी और तिरुवनंतपुरम के सांसद शशि थरूर इस पद के लिए दौड़ में शामिल थे.

ऐसा नहीं है कि मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार संघ को लेकर पहली बार इस तरह को कोई आदेश जारी करने की तैयारी में है.  इससे पहले दिग्विजय सिंह सरकार के समय भी संघ की शाखाओं में सरकारी कर्मचारियों के जाने पर रोक लगाई गयी थी. दिग्विजय सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए सरकार ने एक आदेश जारी किया था जिसमें कहा गया था कि आरएसएस एवं अन्य ऐसी संस्थाओं के कार्यकलापों में भाग लेना या उससे किसी रूप में सहयोग करना मध्यप्रदेश सिविल सेवा (आचरण) नियम का उल्लंघन माना जायेगा.

दिग्विजय सिंह सरकार के इस फैसले को बाद में भाजपा के सत्ता में आने के बाद साल 2006 में शिवराजसिंह चौहान के मुख्यमंत्री बनने के बाद समाप्त कर दिया गया था, वहीं कांग्रेस ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया था. चुनाव के वक्त कांग्रेस ने संघ की शाखाओं में जाने वाले कर्मचारियों को चुनावी ड्यूटी से दूर रखने के लिए चुनाव आयोग से भी शिकायत की थी.

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