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विश्व एथलेटिक्स संघ ने सिंथेटिक ट्रैक को किया था सर्टिफाइड, अब परखने में जुटी इंजीनियरों की फौज

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# जांच के नाम पर अब हो रहा दिलचस्प खेल.
# ट्रैक हैंडओवर लेने में सालभर से चल रहा सर्कस.

Ranchi: मोरहाबादी में बिछे इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक की जमीनी हकीकत परखने में रांची जिला प्रशासन के इंजीनियरों की टीम 17 फरवरी से लग चुकी है. खेल विभाग से मिले निर्देश के अनुसार उपायुक्त राय महिमापत रे ने तीन दिनों पहले एनआइसी निदेशक की अध्यक्षता में एक जांच समिति का गठन कर दिया था.

टीम में पथ निर्माण विभाग, ग्रामीण कार्य विशेष प्रमंडल के इंजीनियर और जिला खेल पदाधिकारी, रांची ट्रैक बिछाने के काम में आवश्यक क्वालिटी होने या ना होने के बारे में रिपोर्ट तैयार करेंगे.

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मुख्य सचिव की पहल पर खेल विभाग हुआ रेस

सिंथेटिक ट्रैक मामले पर Newswing में आती खबरों पर खेल विभाग में हलचल तेज हुई है. मुख्य सचिव डीके तिवारी ने इस पर पिछले सप्ताह संज्ञान लिया था. खेल सचिव राहुल शर्मा ने भी विभागीय पदाधिकारियों के साथ समीक्षा की है.

इसमें निर्णय लिया गया कि अब रांची जिला प्रशासन से भी इसकी जांच कर स्टेडियम हैंडओवर लेने की प्रक्रिया पूरी की जाए. रांची उपायुक्त ने 17 फरवरी को एक जांच समिति गठित कर दी गयी है. रिपोर्ट प्राप्त होते ही खेल विभाग को भेजा जाएगा.

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एनआइपी निदेशक के साथ लगी है इंजीनियरों की टीम

एनइपी निदेशक, रांची श्रीपति गिरी की अध्यक्षता में 17 फरवरी को एक जांच समिति बनायी गयी है. निदेशक ने जांच में साथ देने को रांची डीएसओ, पथ निर्माण और ग्रामीण कार्य विशेष प्रमंडल के एग्जीक्यूटिव इंजीनियर को भी लिया है.

टीम ट्रैक बिछाये जाने के लिए जारी टेंडर और उसमें IAAF (विश्व एथलेटिक्स संघ) के प्रावधानों के अनुसार किये गये कार्यों का मूल्यांकन कर रही है. यानि सिविल वर्क और पथ निर्माण के कार्यों को जानने वाले इंजीनियर अब सिंथेटिक ट्रैक के क्वालिटी स्टैंडर्ड को परख रहे हैं.

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इंटरनेशनल सर्वेयर के लेटर पर नहीं है भरोसा

सिंथेटिक ट्रैक मामले में रोचक बात यह है कि जिस ट्रैक को इंटरनेशनल सर्वेयर ने सर्टिफिकेशन दे दिया, उससे विभाग को संतुष्टि नहीं मिल पा रही है. संवेदक ग्रेट स्पोर्ट्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद के अनुसार उसने इंटरनेशनल लैब, थाईलैंड में ट्रैक के गुणवत्ता की जांच करायी है. इसी के आधार पर इंटरनेशनल सर्वेयर ने सर्टिफिकेशन जनवरी, 2019 में जारी किया था.

झारखंड एथलेटिक्स खेल संघ की आपत्तियों के बाद खेल विभाग ने नवंबर, 2019 में विभागीय स्तर से जांच करायी. उसमें कई मानकों पर कमियां खोजकर संवेदक को सुधार के लिए कहा गया. हालांकि विभाग के पास ट्रैक की क्वालिटी परखने के मामले में तकनीकी रूप से दक्ष टीम अब भी नहीं है. खेल विभाग की जांच के बाद अब रांची जिला प्रशासन की टीम जांच कार्य में जुटी है. कायदे से वे भी अगर जांच करेंगे तो इंटरनेशनल एथलेटिक्स संघ द्वारा अधिकृत लैब में ही ट्रैक संबंधी आवश्यक गुणवत्ता की जांच करानी होगी.

संवेदक के अनुसार उसने जांच के लिए जिस लैब और प्रक्रिया का उपयोग किया, वही काम नयी जांच टीम को भी करना होगा. फिलहाल तो खिलाड़ी और खेल संगठनों से जुड़े लोग ऐसे रवैये पर हैरानी जता रहे हैं. वे इसे एक पाले से दूसरे पाले में गेंद फेंकने की कला बताने लगे हैं.

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