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सिंथेटिक ट्रैक मामला: ट्रैक की गुणवत्ता पर विश्व खेल संघ और खेल विभाग में छिड़ा रहा दंगल

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Ranchi: मोरहाबादी स्थित स्टेडियम में इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक बिछाये सालभर से अधिक हो चुके हैं. 2017 से जारी हुआ 8 लेन का ट्रैक बिछाने का काम जनवरी 2019 में पूरा हुआ.

इंटरनेशनल एथलेटिक्स संघ ने इसे इसी महीने सर्टिफिकेशन भी दे दिया. इस सर्टिफिकेशन के बाद खेल विभाग द्वारा तत्कालीन खेल मंत्री अमर बाउरी द्वारा औपचारिक उद्घाटन भी करा दिया गया.

मुख्यमंत्री आमंत्रण कप का आयोजन भी पिछले ही साल इस स्टेडियम में हो गया. पर खेल विभाग अब तक इसे अपने नियंत्रण में नहीं ले सका है.

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झारखंड के दो सिंथेटिक ट्रैक को आइएएफ ने दी है स्वीकृति

इंटरनेशनल एथलेटिक्स संघ द्वारा दुनियाभर में सर्टिफाइड सिंथेटिक ट्रैक की एक सूची जारी की गयी है. इसमें रांची के होटवार स्थित मेगा स्पोर्ट्स कॉम्पलेक्स स्थित ट्रैक और बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम, मोरहाबादी, रांची का भी नाम शामिल है.

सूची में पूरे भारत में तकरीबन 92 स्टेडियम में सर्टिफाइड इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक बिछाये जाने की जानकारी दी गयी है. इसी तरह दुनियाभर के अलग-अलग देशों में 919 सर्टिफाइड ट्रैक बिछाये जा चुके हैं.

अलग-अलग देशों में 53 इंडोर स्टेडियमों में ट्रैक बिछाये गये हैं. इस लिस्ट में भारत का नाम नहीं है.

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पूरी दुनिया में आइएएफ के मान्यता प्राप्त 16 लैबों में होती है जांच

विश्व खेल संघ यानि आइएएफ के द्वारा मान्यता प्राप्त 16 लैब पूरी दुनिया में संचालित हैं. सिंथेटिक सरफेस टेस्टिंग के लिए संघ द्वारा मान्यता प्राप्त लैबों में से तीन-तीन चीन और ब्रिटेन में हैं.

इसके अलावा स्विटजरलैंड, स्पेन, जर्मनी, नीदरलैंड, आस्ट्रिया, फ्रांस, अमेरिका इटली, थाईलैंड में भी लैब हैं. मोरहाबादी में लगे ट्रैक की गुणवत्ता की जांच के लिए ट्रैकमास्टर कंपनी लिमिटेड, थाईलैंड की लैब का उपयोग किया गया.

मोरहाबादी स्टेडियम में बिछाये गये सिंथेटिक ट्रैक को अंतरराष्ट्रीय स्तर के ट्रैक मास्टर द्वारा सर्टिफिकेट दिया गया है. थाईलैंड के लैब ट्रैक मास्टर के प्रतिनिधि मैथ्यू कोहेन ने इसे जारी किया है.

लैब द्वारा की गयी जांच के अनुसार बिरसा मुंडा फुटबॉल स्टेडियम, रांची में पोरप्लास्टिक एसडब्लू कंपटीशन का सिंथेटिक सरफेस प्रोडक्ट इस्तेमाल किया गया है जिसे जर्मनी में तैयार किया गया है.

इसे संवेदक ग्रेट स्पोटर्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड के द्वारा जनवरी 2019 में बिछाया गया. ट्रैकमास्टर्स इंटरनेशनल लिमिटेड के द्वारा 7 से 13 जनवरी, 2019 के बीच इसकी मार्किंग की गयी.

14 जनवरी को ब्रिटिश सर्वेयर मैथ्यू कोहेन ने इसका फाइनली सर्वे/निरीक्षण किया था. अंततः आइएएफ के टेक्निकल कमिटी चेयरमैन जॉर्ज सैलकिडो ने 22 जनवरी को सर्टिफिकेशन लेटर जारी किया. इसके अनुसार फरवरी 2024 तक ट्रैक की क्वालिटी लाइफ रहेगी.

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आइएएफ के सर्टिफिकेशन के बाद गुणवत्ता की जांच में लगा खेल विभाग

आइएएफ के गाइडलाइन के अनुसार उसके द्वारा अधिकृत सर्वेयर ने मोरहाबादी स्टेडियम में बिछाये गये इंटरनेशनल सिंथेटिक ट्रैक को समूची जांच प्रक्रिया के बाद आवश्यक सर्टिफिकेशन जारी कर दिया है.

अंतरराष्ट्रीय खेल संघ पूरी दुनिया में खेलों के मामले में सर्वोच्च पंचाट माना जाता है. उसके द्वारा सर्टिफाइड ट्रैक की गुणवत्ता के मामले में सवाल उठाना दिलचस्प माना जा सकता है.

संवेदक ग्रेट स्पोटर्स इंफ्रा प्राइवेट लिमिटेड, हैदराबाद के अनुसार उसने ट्रैक के लिए जारी टेंडर की शर्तों के अनुसार पूरा काम किया है. ट्रैक की टेस्टिंग और सर्टिफिकेशन के मामले में पूरी प्रक्रिया का अनुपालन पारदर्शिता के साथ किया गया है.

ऐसे में विभाग या किसी अन्य स्तर से अंगुली उठाया जाना गंभीरता नहीं है. अगर आंशिक स्तर से सुधार की जरूरत हो तो वह संवेदक के स्तर से अगले कुछ सालों तक जरूर किया जायेगा. शर्तों के अनुसार ट्रैक के मेंटेनेंस कार्य भी नियत अवधि तक किये जायेंगे.

रुकी पड़ी है भुगतान प्रक्रिया और खिलाड़ियों का अभ्यास

जनवरी, 2019 में संवेदक ने अपना काम पूरा करने की जानकारी एनआरइपी को दी. फरवरी में सर्टिफिकेशन संबंधी कार्य भी पूरा कर लिया गया. इसके बाद खेल विभाग को हैंडओवर के लिए लिखा.

डीएलपी (डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड) की वारंटी तीन सालों तक बतायी गयी. यानि अगले तीन सालों तक सिंथेटिक ट्रैक की पूरी तरह वारंटी संवेदक के जिम्मे थी.

सिंथेटिक ट्रैक बिछाने संबंधी कार्य पूरा होने के बाद 19 मार्च, 2019 को इसका उद्घाटन विभागीय मंत्री अमर बाउरी, समाज कल्याण मंत्री लुईस मरांडी, नगर विकास मंत्री सीपी सिंह, विभागीय सचिव राहुल शर्मा और अन्य लोगों की उपस्थिति में किया गया.

पर इसके बाद खेल संघों की आपत्तियों के मद्देनजर खेल विभाग ने नवंबर, 2019 में जांच समिति बिठायी. समिति ने कुछ कार्यों में त्रुटियों का उल्लेख किया. इसके बाद से संवेदक का भुगतान रुका पड़ा है.

फिलहाल मोरहाबादी में ट्रैक बिछाने के मामले में Newswing में लगातार आती खबरों के बाद खेल विभाग रेस हो चुका है. एनआरइपी-2 ने भुगतान प्रक्रिया आरंभ करने और औपचारिक रूप से स्टेडियम हैंडओवर लेने की दिशा में कदम बढ़ाये हैं.

उम्मीद की जा रही है कि मार्च महीने तक यह काम पूरा हो जाएगा. जल्दी ही खिलाड़ियों को इसका उपयोग करने का मौका मिलेगा.

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