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स्‍वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के लिए केंद्र से अब नहीं मिल रही मदद, 6613.74 करोड़ की परियोजना अब तक नहीं हो सकी है पूरी

इचा डैम और खरकई बराज का काम अब भी अधूरा, मार्च 2018 में मिले 351 करोड़ का यूटिलिटी सर्टिफिकेट नहीं भेजा सरकार ने

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Ranchi : स्‍वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना के लिए अब केंद्र सरकार से मदद नहीं मिल रही है. सरायकेला-खरसांवा जिले में 1972 में शुरू की गयी योजना में चांडिल डैम, ईचा डैम के अलावा गालूडीह बराज और खरकई नदी पर बराज बनाया जाना था. इसके अलावा इन सभी परियोजनाओं की दांयी और बांयी तरफ सिंचाई नहर का निर्माण भी किया जाना था. चांडिल डैम और गालूडीह बराज का निर्माण तो शत-प्रतिशत पूरा कर लिया गया है. पर सिंचाई नहरों का काम धीमा चल रहा है. केंद्र सरकार की तरफ से 1978 में अविभाजित बिहार के समय परियोजना 129 करोड़ की लागत से शुरू की गयी थी.

परियोजना में मार्च 2018 तक 5722.75 करोड़ रुपये खर्च

अलग झारखंड राज्य बनने के बाद इसे त्वरित सिंचाई लाभ कार्यक्रम (एआइबीपी) में शामिल किया गया और योजना की लागत बढ़ कर 6613.74 करोड़ रुपये हो गयी. परियोजना में मार्च 2018 तक 5722.75 करोड़ रुपये खर्च किये गये. 2018-19 के बाद से केंद्र सरकार ने योजना के लिए एक भी राशि झारखंड को नहीं दी है. इससे परियोजना का काम भी धीमा हो गया है. सूत्रों के अनुसार केंद्र से योजना के लिए मार्च 2018 में 351 करोड़ रुपये की अंतिम किस्त दी गयी थी. इसकी उपयोगिता प्रमाण पत्र अब तक नहीं भेजा गया है. उपयोगिता प्रमाण पत्र नहीं दिये जाने की वजह से ही केंद्रीय सहायता नहीं दी जा रही है.

परियोजना से झारखंड के सरायकेला-खरसांवा जिले में पीने के पानी की आपूर्ति के अलावा सिंचाई की समुचित व्यवस्था करने का प्रावधान भी किया गया था. शहरी और ग्रामीण क्षेत्र की जरूरतों को पूरा करने के लिए यह एक महात्वाकांक्षी योजना थी.

 

क्या-क्या बना है स्‍वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना में

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स्‍वर्णरेखा बहुद्देशीय परियोजना में दो महत्वपूर्ण डैम चांडिल और गालूडीह बराज का काम पूरा कर लिया गया है. चांडिल डैम के बांयी सिंचाई नहर के 127.28 किलोमीटर तक का नहर बनाने का काम पूरा कर लिया गया है, जबकि दाहीने तरफ की 33 किलोमीटर की नहर का काम बाकी है. सिंचाई के लिए वितरण नेटवर्क भी 70 फीसदी ही पूरा हो पाया है. ईचा डैम योजना का एक महत्वपूर्ण हिस्सा था. इसमें रैयतों के विरोध की वजह से काम लगातार प्रभावित हुआ. डैम के लिए अब तक 30 फीसदी ही काम पूरा हो सका है. ईचा डैम के मुख्य बांयी नहर का काम 80 फीसदी पूरा हो सका है.

कुल 42 किलोमीटर तक की नहर बांयी तरफ बनायी जानी थी. डैम के राइट मेन कैनाल का काम 82 प्रतिशत पूरा हुआ है. वितरण नेटवर्क 70 फीसदी ही बना है. गालूडीह बराज का लेफ्ट मेन कैनाल 70 फीसदी, राइट मेन कैनाल शत प्रतिशत पूरा कर लिया गया है. वहीं खरकई बराज का काम 84 फीसदी ही कंपलीट हो सका है. इसकी बांयी नहर की जांच रिपोर्ट ही पूरी की जा सकी है. दांयी मुख्य नहर का काम 82 फीसदी कंपलीट हो चुका है. वितरण नेटवर्क भी 90 फीसदी बन गया है.

 

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