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एक हफ्ते में मनरेगा के 200 करोड़ की संदिग्ध निकासी, विभाग ने बिठायी जांच

मार्च, 2021 के आखिरी हफ्ते में धड़ाधड़ जेनरेट हुए बिल और निकल गयी राशि

  • मैटेरियल सप्लाई के मद में भुगतान में गड़बड़ी की है आशंका
  • एक-एक बिल को सॉफ्टवेयर में अपलोड करने का दिया निर्देश

Nikhil Kumar

Ranchi. झारखंड में मार्च, 2021 के अंतिम हफ्ते में मनरेगा के 200 करोड़ रुपये की संदिग्ध निकासी हुई है. ग्रामीण विकास विभाग खुद हैरत में है कि वित्तीय वर्ष के अंतिम माह के अंतिम हफ्ते में एकमुश्त तौर पर इतनी बड़ी रकम की निकासी आखिर कैसे हो गयी ? विभाग को आशंका है कि इस संदेहास्पद निकासी में जिलों के अफसरों, मनरेगा कर्मियों और सप्लायर्स की मिलीभगत है. अब विभाग ने इसकी जांच का आदेश दिया है. सभी जिलों के उपायुक्तों और उप विकास आयुक्तों से वित्तीय वर्ष 2020-21 में मनरेगा के तहत लिये गये भुगतान के सभी विपत्रों की जांच कर रिपोर्ट मांगी गयी है.

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आशंका है कि मनरेगा की योजनाओं में मैटेरियल सप्लाई के नाम पर बड़ी गड़बड़ी हुई है. विभाग ने पहले से ही गाइडलाइन जारी कर रखी है कि मैटेरेयिल सप्लाई या फिर मजदूरी भुगतान के विपत्र समय पर जमा लेकर भुगतान कर दिया जाये. इसे लेकर जिलों को समय-समय पर पत्र भी भेजे जाते रहे हैं. निर्देश यह भी था कि निर्धारित समय सीमा के भीतर मैटेरियल सप्लाई और मजदूरी भुगतान के बिल जमा कर राशि की निकासी की जा सकती है, लेकिन पाया गया है कि 15 मार्च तक मनरेगा की योजनाओं के तहत खरीदी गयी सामग्री के बिल भुगतान के लिए या तो पेश नहीं किये गये या अफसरों के टेबल पर पड़े रहे.

मार्च के आखिरी हफ्ते में अचानक मनरेगा के बिल धड़ाधड़ जेनरेट किये गये और सभी जिलों को मिलाकर लगभग 200 करोड़ रुपये की निकासी कर ली गयी. विभाग अचानक से एक हफ्ते के दौरान बड़ी संख्या में बिल जेनरेट कर राशि की निकासी को संदिग्ध मान रहा है.

जानकारों का कहना है कि अगर मनरेगा की योजनाओं के तहत काम लगातार चल रहे होते, तो बिलों की निकासी भी क्रमवार होनी चाहिए थी. लेकिन इसके बजाय अचानक से मनरेगा की छोटी-बड़ी सैकड़ों योजनाओं के नाम पर राशि की निकासी से यह आशंका हो रही है कि कहीं कागजों पर योजनाएं दिखाकर फर्जी तरीके से सरकारी रकम का वारा-न्यारा न कर लिया गया हो.

विभाग ने जिलों को मैटेरियल सप्लाई के एक-एक विपत्र की जांच कर मनरेगासॉफ्ट (ऑनलाइन सिस्टम) में अपलोड करने का आदेश दिया है. बता दें कि मनरेगा के तहत मजदूरी भुगतान के भी सभी बिल सॉफ्टवेयर पर अपलोड किये जाने का नियम है.

मनरेगा में ली जाती हैं ऐसी योजनाएं

मनरेगा के तहत स्थायी संरचना निर्माण, नलकूप, कुआं, पशु शेड, मुर्गी शेड इत्यादि योजनाएं ली जाती हैं. इन योजनाओं में निर्माण के लिए सामग्री की खरीद स्थानीय सप्लायरों-दुकानों से की जाती है. इन योजनाओं में पहले भी सामग्री की खरीदारी के नाम पर छोटी-बड़ी गड़बड़ियां पकड़ी जाती रही हैं. आशंका है कि इस बार भी ऐसी गड़बड़ी हुई है. चूंकि संदिग्ध निकासी की रकम 200 करोड़ से ज्यादा मानी जा रही है, इसलिए यह मामला बड़ा हो गया है.

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