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निलंबित कार्यपालक अभियंता संजय कुमार किये जायेंगे डिमोट, जेपीएससी को भेजी जायेगी फाइल

प्रधानमंत्री कार्यालय को सीधे रिपोर्ट करने में निलंबित हुए थे संजय कुमार

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Ranchi : पेयजल और स्वच्छता विभाग के निलंबित कार्यपालक अभियंता संजय कुमार को पांच वर्ष के लिए डिमोट किया जायेगा. इन्हें सहायक अभियंता के पद पर डीमोट करने की मंजूरी मुख्यमंत्री रघुवर दास ने भी दे दी है. झारखंड लोक सेवा आयोग (जेपीएससी) का अनुमोदन मिलते ही श्री कुमार को कार्यपालक अभियंता से सहायक अभियंता बनाकर उनकी पोस्टिंग की जायेगी. विभाग के संयुक्त सचिव अभय नंदन अंबष्ठ ने बताया कि गैजेटेड अफसर नियुक्ति नियमावली में जेपीएससी का अनुमोदन जरूरी है. उन्होंने कहा कि नियमावली के अनुसार नौकरी से बर्खास्तगी अथवा डिमोशन पर राजपत्रित अधिकारियों के लिए जेपीएससी को फाइल भेजना जरूरी होता है.

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क्या था मामला

विभाग के गिरिडीह-2 अंचल में पदस्थापित श्री कुमार पर प्रधानमंत्री कार्यालय को सीधे रिपोर्ट करने के लिए निलंबित किया गया था. इनपर यह आरोप प्रमाणित हुआ था कि इन्होंने ट्यूबवेल से संबंधित प्रधानमंत्री कार्यालय से पूछे गये सवाल पर बगैर किसी वरीय अधिकारी की अनुमति के सीधे अपना जवाब भेजा था. इतना ही नहीं इन्होंने शौचालय निर्माण के लिए गिरिडीह में एक संवेदक से अपनी पत्नी और बेटे के एकाउंट में पैसे भी लिये थे. इसी आरोप में इन्हें निलंबित करते हुए विभागीय कार्यवाही शुरू की गयी थी.

 पांच वर्ष तक इंक्रीमेंट का लाभ नहीं देने की हुई थी अनुशंसा

विभागीय सचिव अराधना पटनायक की तरफ से संजय कुमार को कार्यपालक अभियंता से सहायक अभियंता के पद पर डीमोट करने और 2019-2014 तक इंक्रीमेंट का लाभ नहीं दिये जाने की अनुशंसा भी की गयी थी. विभाग के गैजेटेड अफसर नियुक्ति नियमावली के आधार पर की गयी कार्रवाई में सहायक अभियंता के मूल वेतन पर ही काम करने की सिफारिश की गयी थी. इतना ही नहीं यदि पांच वर्ष के दौरान फिर निलंबित हुए, तो जीवन निर्वाह भत्ता भी नहीं दिये जाने की सिफारिश की गयी थी.

निलंबित अभियंता ने हाईकोर्ट में कर रखा था मुकदमा

निलंबित अभियंता संजय कुमार ने अपने निलंबन के विरुद्ध विभाग के खिलाफ झारखंड हाईकोर्ट में याचिका दायर कर रखी थी. झारखंड हाईकोर्ट ने विभागीय अधिकारियों को न्यायोचित फैसला लेते हुए नवंबर माह में ही सूचित करने का फैसला दिया था. इसपर याचिकाकर्ता संजय कुमार को भी अपना पक्ष विभाग में रखने को कहा गया था.

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