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सुशील गुप्ता का आनंद ज्वेलर्सः क्या 7 साल बाद खुल पायेगा राज्य की सबसे बड़ी 12.25 करोड़ के गहनों की चोरी का रहस्य

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Saurav Singh

Ranchi : 1 सितंबर को रांची से प्रकाशित हिंदी अखबारों में एक खबर है. खबर चौंकाने वाला है. खबर है कि 13-14 अक्टूबर 2013 की रात रांची में हुई सबसे बड़ी चोरी केस की जांच अब तक नहीं पूरी हुई है. जांच में अब तेजी आयेगी. सबसे बड़ी चोरी इसलिए क्योंकि 12.25 करोड़ रुपये के गहने की चोरी का केस दर्ज हुआ था. जिनमें से 11.75 करोड़ रुपये के गहने बरामद हो गये.

गहने की चोरी मेन रोड स्थित आनंद ज्वेलर्स से हुई थी. और बरामदगी आनंद ज्वेलर्स की छत पर पानी टंकी से हुई. आनंद ज्वेलर्स के मालिक का नाम सुशील गुप्ता है और इनका चर्च कांप्लेक्स में भी गायत्री ज्वेलर्स नाम की एक दुकान है.

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पढ़िये, इस अजब चोरी की गजब कहानी

रांची के प्रसिद्ध आनंद ज्वेलर्स से 12.25 करोड़ रुपये के गहनों की चोरी करने वाले चोर सात साल बाद भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं. झारखंड के इतिहास में यह सबसे बड़ी चोरी का मामला था. बड़ा सवाल यह है कि आखिर रांची के मेन रोड में स्थित इतने बड़े ज्वेलरी शॉप में करोड़ों की चोरी की घटना की जांच अब तक क्यों पूरी नहीं हो पायी. आखिर कहां छिपे हैं गहनों के चोर. इस चोरी की घटना में सबसे बड़ी आश्चर्य की बात यह थी कि चोरों ने 12.25 करोड़ रुपये के गहनों चोरी की थी, लेकिन 11.75 करोड़ के जेवर वे अपने साथ नहीं लेकर गये. 11.75 करोड़ के गहने बरामद भी हो गये.

गुप्त सूचना पर गहनों की बरामदगी उसी दुकान की छत के ऊपर रखे पानी टंकी से हुई,  जहां से चोरी हुई थी. लेकिन कई सवाल अब भी हैं, जिसका जवाब जानना हर कोई चाहता है. आखिर चोर कौन है? उसने इतनी मेहनत कर चोरी की,  लेकिन गहने लेकर क्यों नहीं गये,  गहने ले भी गये,  तो सबसे कम कीमत वाले चांदी के गहने ही क्यों ले गये. पुलिस को सूचना देनेवाला आखिर कौन था? आज सात साल बाद भी पुलिस और आम लोगों को इन सवालों के जवाब नहीं मिल पाये हैं.

13-14 अक्टूबर 2013 की रात हुई थी आनंद ज्वेलर्स से चोरी

साल 2013 के 13-14 अक्तूबर की रात रांची के आनंद ज्वेलर्स से 12.25 करोड़ के सोना, चांदी,  हीरे के जेवरों की चोरी हुई थी. इसके बाद चोरों की तलाश में पुलिस ने पूरे राज्य को छान मारा था. जेल से लेकर दूसरे राज्यों के अपराधियों से पूछताछ की गयी.

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मामले के उदभेदन के लिए एसएसपी की अगुवाई में एक डीएसपी, तीन इंस्पेक्टर और एक दारोगा की टीम बनायी गयी. टीम ने रायपुर, जयपुर और दिल्ली जाने की भी योजना बनायी. इसके बाद गया से एक व्यक्ति को हिरासत में लेकर पूछताछ किया गया. फिर भी पुलिस को कोई सफलता नहीं मिली. इसी दौरान पुलिस को एक गोपनीय कॉल आया और बताया गया कि गहने कहां हैं. इसके बाद पुलिस ने उसी दुकान की छत की पानी टंकी से चोरी के गहनों को बरामद किया.

एसएसपी को आया गुमनाम कॉलः कहा गया पानी में रखे हुए हैं गहने

गहना बरामद होने की कहानी कम रोचक नहीं है. चोरों को तलाश करते-करते पुलिस थक चुकी थी. इसी बीच रांची के तत्कालीन सीनियर एसपी साकेत सिंह को 25 अक्तूबर की रात में करीब 9.00 बजे एक फोन आया. फोन करने वाले ने अपना नाम नहीं बताया.

लेकिन कहा कि,  मेरे साथ धोखा हुआ है. इसलिए अब तक की सबसे बड़ी चोरी की घटना का सुराग दे रहा हूं. गहने अभी कहीं नहीं गये हैं. पानी में रखे हुए हैं और दुकान के नजदीक में ही है. काली पूजा या उसके बाद हटाया जायेगा. पहले तो एसएसपी को लगा कि शायद फोन पर किसी ने मजाक किया है, लेकिन उन्हें एक उम्मीद की किरण दिखाई दी. फिर उन्होंने डेली मार्केट सर्किल के इंस्पेक्टर और हिंदपीढ़ी थाना के थानेदार को अपने घर पर बुलाया. पूरी बात बतायी.

दुकान की पानी टंकी  में ही चार बैग में छिपाकर रखे गये थे जेवर

फोन करने वाले ने एसएसपी को सिर्फ यह बताया कि गहने दुकान के नजदीक पानी में हैं. अब पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी पानी वाले जगह को ढूंढने की, क्योंकि वहां आस-पास पानी के कई स्त्रोत थे. कई कुएं और पानी के टंकी आसपास थे. पुलिस ने सबसे पहले दुकान की ही पानी की टंकी को देखने का फैसला किया. एसएसपी ने रात में इंस्पेक्टर और थानेदार को आनंद ज्वेलर्स भेजा.

वहीं दूसरी तरफ आनंद ज्वेलर्स के मालिक सुशील गुप्ता को फोन कर दुकान की चाबी लेकर दुकान पहुंचने को कहा. पुलिस अधिकारियों ने पहले दुकान के पहले तल्ले पर स्थित टंकी को देखा. उसमें कुछ नहीं मिला. फिर दूसरे तल्ले के बाथरूम की टंकी को देखा. वहां भी कुछ नहीं मिला. इसके बाद पुलिस छत पर पहुंची. छत पर 1500 लीटर क्षमता की टंकी थी. टॉर्च से देखने पर बैग दिखा. बैग को पहले बाहर से ही निकालने की कोशिश की गयी. नहीं निकलने पर इंस्पेक्टर टंकी के भीतर घुस गये और उसमें रखे चार बैग को निकाला.

जब बैग को खोला गया तो उसमें से गहने मिले. इसके बाद दुकान से मशीन मंगाकर गहनों को तौला गया. तौलने पर पता चला कि कुछ जेवर अभी भी नहीं मिले हैं. 12.25 करोड़ के जेवर चोरी हुए थे और बरामद हुए लगभग 11.75 करोड़ के. बरामद जेवर को पुलिस ने दुकान मालिक को ही सौंप दिया.

सैकड़ों सवाल उठे, लेकिन अब तक एक भी सवाल का नहीं मिला जवाब

इसके बाद सवाल उठने लगा कि आखिर चोर सारे गहने लेकर क्यों नहीं भागे. चोरों ने उसी दुकान की टंकी में जेवर क्यों छिपाये. चोर क्या इतने बेवकूफ थे, वे दुकान के ग्रिल और शटर काटकर करोड़ों के जेवर चोरी कर लें और उसे ले जाने के बजाए उसी दुकान की पानी टंकी में छिपा दें.

फिर यह भी सवाल सामने आया कि एसएसपी को फोन करनेवाला कौन था ? अगर चोरों में बंटवारे को लेकर फूट पड़ गयी थी, तो फोन करनेवाले ने दूसरे चोरों का नाम क्यों नहीं बता दिया?  पुलिस ने इन सब सवालों के जवाब तलाशने शुरू कर दिये, लेकिन हैरानी की बात है कि आज चार सात साल बाद भी पुलिस को इनमें से एक भी सवाल के जवाब नहीं मिले हैं.

आनंद ज्वेलर्स में कैसे हुई थी चोरी?

12 अक्तूबर 2013 को आनंद ज्वेलर्स के मालिक और कर्मचारी दुकान बंद कर घर चले गये. इसके बाद 13 और 14 अक्तूबर को दुर्गा पूजा की छुट्टी थी, साथ ही फेलिन तूफान के कारण मौसम खराब था. इस वजह से दुकान भी बंद थी.

15 अक्तूबर की सुबह करीब 10.30 बजे दुकान खुली. कर्मचारी जैसे ही दुकान के भीतर गये, हक्के-बक्के रह गये. सारे जेवर गायब थे. इसके बाद कर्मचारियों ने दुकान मालिक सुशील गुप्ता को खबर दी. वह भी बदहवास पहुंचे. दुकान के ऊपर तक गये.

सात दरवाजे काटकर जेवर ले गये थे चोर

उन्होंने देखा कि चोर सात दरवाजों को काट कर सारे जेवर ले गये थे. इसके बाद पुलिस और इंश्योरेंस कंपनी ने जांच शुरू कर दी. जांच के दौरान पता चला कि चोर सीसीटीवी कैमरा और वीडियो रिकॉर्ड करनेवाली मशीन भी अपने साथ ले गये हैं. देर रात तक यह पता चला कि आठ करोड़ की चोरी हुई.

दूसरे दिन स्टॉक मिलान का काम पूरा हुआ तो चोरी गयी ज्वेलरी की कीमत 12.25 करोड़ हो गयी. चोरी की इतनी बड़ी वारदात की खबर आने के बाद रांची सहित पूरे राज्य में सनसनी फैल गयी.

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