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Sushant Singh Rajput Death Anniversary: अगर आप अंदर से परेशान और अशांत हैं, तो फिर सुशांत बनते देर नहीं लगती

Sanjay Prasad
आज से ठीक दो साल पहले सुशांत सिंह राजपूत की असमय मौत हो गई थी. राजपूत की मौत पर तीन माह तक मीडिया में जो हंगामा दिखा, वह आज नहीं है. लेकिन आज भी सुशांत के किरदार उनके करोड़ों प्रशंसकों के दिलों में है. जब भी धोनी के खेल की बात होगी, सुशांत के अभिनय को भुलाया नहीं जा सकता. जब भी आईआईटी की परीक्षा में असफल होने की बात होगी, फिल्म छिछोरे का वह लड़का हमारी जेहन में होगा.

अंतिम फिल्म की शूटिंग जमशेदपुर में हुई
जमशेदपुर से सुशांत का रिश्ता तो और भी भावुक रहा है क्योंकि उन्होंने अपनी अंतिम फिल्म यहीं पर शूट की. कई बार उनकी फिल्म दिल बेचारा देखकर लगता है कि उन्हें अपनी मौत का शायद पहले से अहसास हो गया था. यही कारण है कि उनके किरदार में भी उनके अंदर की तड़प दिखने लगी थी.
आत्महत्या के खिलाफ बनी सुशांत की फिल्म
छिछोरे आईआईटी सिंड्रोम से ग्रसित पैरेन्ट्स की ऐसी कहानी है, जो अपनी महत्वाकांक्षा को बच्चों पर थोपते हैं. यह फिल्म देश के लाखों बच्चों की कहानी है, जो पैरेन्ट्स की महत्वांकाक्षा के बोझ तले घुट-घुट कर जीते हैं और कई बार अपनी इहलीला तक खत्म कर लते हैं. कोटा से आ रही खबरें इसकी गवाह है. छिछोरे ऐसे बच्चों के साथ ही पैरेन्ट्स को भी एक पावरफूल मैसेज देती है. लेकिन कभी सपने में भी नहीं सोचा था कि इस पावरफुल मेसेज का जरिया बने सुशांत एक दिन खुद अपनी जिंदगी खत्म कर लेंगे.
सुशांत का यूं चुपके से चले जाना
हमें बताता है कि पैसा, पावर, सक्सेस और ग्लैमर सब बाहरी नुमाइश भर मात्र है. अगर आप अंदर से परेशान और अशांत है, तो फिर सुशांत बनते देर नहीं लगती.

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