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रघुवर की कार्यशैली, व्यवहार व प्राथमिकता से व्यथित सरयू राय 28 फरवरी को दे सकते हैं इस्तीफा

अमित शाह को लिखे पत्र में कहाः खटपट से, विवाद से, कशमकश से और शर्मिंदगी से छुटकारा चाहता हूं

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Ranchi: झारखंड के मुख्यमंत्री रघुवर दास की कार्यशैली, व्यवहार व प्राथमिकताओं से व्यथित राज्य के खाद्य आपूर्ति मंत्री सरयू राय 28 फरवरी को मंत्री पद से इस्तीफा दे सकते हैं. सरयू राय झारखंड मंत्रिमंडल में रह कर पिछले दो साल से शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं. प्रधानमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह के समक्ष झारखंड सरकार की असंतोषजनक कार्यशैली की जानकारी देने के बाद भी हालात में सुधार नहीं हुए हैं. दो साल पहले जो स्थिति थी, आज की तारीख में और भी बदतर हो गई है. सरकार में ऐसे-ऐसे काम हो रहे हैं, जिन्हें पचा पाना उनके लिए संभव नहीं हो पा रहा है. इन कारणों से सरयू राय व्यथित हैं. वह खटपट से, विवाद से, कशमकश से और शर्मिंदगी से छुटकारा चाहते हैं.

अमित शाह से मुलाकात की कोशिश की

सरयू राय ने आठ फऱवरी को दिल्ली जाकर भाजपा अध्यक्ष से मुलाकात की कोशिश की. अमित शाह के दिल्ली में नहीं रहने के कारण उनसे मुलाकात नहीं हुई. जिसके बाद उन्होंने अमित शाह के नाम एक पत्र लिख कर छोड़ा है. सूत्रों के मुताबिक पत्र में उन्होंने साफ कहा हैः आप जब भी आदेश करेंगे हाज़िर हो जाउंगा. विनम्र अनुरोध है कि वर्तमान फ़रवरी माह के अंत तक या इसके पूर्व इस बारे में आपका निर्देश मुझे प्राप्त हो जायेगा.

पीएम को भी बतायी थी अपनी पीड़ा

उल्लेखनीय है कि तीन दिन पहले सरयू राय ने यह जानकारी सार्वजनिक की थी कि चार अगस्त 2017 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से और 16-18 सितंबर 2017 के बीच भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष से मिल कर झारखंड सरकार की असंतोषजनक कार्यशैली से अवगत कराया था. साथ ही यह भी बता दिया था कि झारखंड मंत्रिमंडल में रह कर वह शर्मिंदगी महसूस कर रहे हैं.

मेरे लिए उनके अनुरूप ढलना संभव नहीं

अमित शाह के नाम छोड़े गये पत्र में सरयू राय ने लिखा हैः मैं समझता हूँ कि हर व्यक्ति की अपनी कार्यशैली होती है, अपनी प्राथमिकताएं होती हैं, अपनी विशेषताएं होती हैं, ख़ूबियां-ख़ामियां होती हैं. मैं अंतर्मन से इसका समादर करता हूं. किसी की आलोचना करना मेरा मक़सद नहीं है. मेरा आपसे इतना ही निवेदन है कि यदि माननीय मुख्यमंत्री जी की कार्यशैली में, बात-व्यवहार में, प्राथमिकताओं में बदलाव संभव नहीं है, उनके अनुरूप ढलना मेरे लिए संभव नहीं है और केन्द्रीय नेतृत्व अथवा राज्य नेतृत्व के पास इस बारे में पहल करने का समय नहीं है तो बेहतर होगा कि होगा कि मैं केन्द्रीय नेतृत्व के समक्ष असमंजस की स्थिति पैदा करने के बदले स्वयं मंत्रिपरिषद से अलग हो जाउं ताकि रोज़-रोज़ की खटपट से, विवाद से, कशमकश से और शर्मिंदगी से मुझे छुटकारा मिले.

अमित शाह ने दिया था आश्वासन

सरयू राय ने पत्र में इस बात का जिक्र किया है कि चार अगस्त 2017 को जब उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को झारखंड सरकार के कामों के बारे में जानकारी देते हुए यह कहा था कि उन्हें मंत्रिमंडल में रह कर शर्मिंदगी महसूस हो रही है. तब प्रधानमंत्री ने उनसे कहा था कि मंत्री पद छोड़ना समस्या का हल नहीं है. कोई कमी है तो उसे दूर किया जायेगा. प्रधानमंत्री ने उन्हें अमित शाह से मिलने की सलाह दी थी. इसके बाद 21 अगस्त को सरयू राय भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से मिले. श्री शाह ने उन्हें 16-18 सितंबर 2017 के बीच झारखंड प्रवास के दौरान मामला सुलझाने का आश्वासन दिया था. 16-18 सितंबर 2017 के बीच अमित शाह के रांची प्रवास के बाद कुछ समय तक तो सबकुछ ठीक-ठाक रहा. लेकिन आज की स्थिति, उस समय की स्थिति से भी बदतर हो गयी है.

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