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उपभोक्ता आंदोलन मजबूत करने पर सरयू राय ने दिया जोर

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Ranchi: खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामलों के मंत्री सरयू राय ने कहा है कि समय आ गया है कि उपभोक्ता आंदोलन को मजबूत किया जाये. राज्य में उपभोक्ता आंदोलन कमजोर रहा है. मौजूदा सरकार ने इसे मजबूती देने का प्रयास किया है. सरयू राय ने उक्त बातें सोमवार को प्रोजेक्ट भवन सभागार में राष्ट्रीय उपभोक्ता अधिकार दिवस पर आयोजित कार्यक्रम में कहा.

इस मौके पर उन्होंने उपभोक्ता जागरूकता के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने के लिए महिला वर्ग में किरण सिंह को प्रेमलता जागरूकता पुरस्कार, पुरुष वर्ग में चन्द्रदेव मांझी को बिरसा मुंडा सम्मान तथा सर्वोत्तम संस्था के रूप में अनुसूचित जाति हरिजन, मछुवा संस्थान को पुरस्कृत किया. साथ ही इन्हें 25 हजार रुपये का चेक और स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया. कार्यक्रम में खाद्य, सार्वजनिक वितरण एवं उपभोक्ता मामले विभाग के अपर सचिव बीएन चौबे समेत विभागीय अधिकारी, कर्मचारी तथा उपभोक्ता संरक्षण समितियों के सदस्य उपस्थित थे.

उपभोक्ता संरक्षण समितियों का किया गया है गठन

उन्होंने कहा कि राज्य और जिला स्तर पर उपभोक्ता संरक्षण समितियों का गठन किया जा चुका है. हम इनके सदस्यों को बैठकों में भाग लेने के लिए राज्यस्तरीय सदस्यों को क्रमशः 5 हजार और जिला स्तरीय सदस्यों को 2 हजार देने जा रहे हैं. अगर वे कहीं विभाग के काम से जाते हैं तो उन्हें यात्रा भत्ता आदि देने पर विचार किया जा रहा है. सरयू राय ने कहा कि आज जरूरत है कि शिक्षा और बिजली क्षेत्र के उपभोक्ता जागरूक हों. गुणवत्तायुक्त शिक्षा न मिले, पर्याप्त बिजली न मिले तो उनपर जुर्माना हो. मगर ये सब काम संस्थाओं को मजबूत करके ही किया जा सकता है. केंद्र सरकार इस दिशा में तत्पर है. नया उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम-2018 इसी दिशा में एक कदम है.

उपभोक्ता अदालतों में त्वरित न्याय पर दिया बल

मौके पर उपस्थित कोल्हान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति आरपीपी सिंह ने कहा कि लोगों को त्वरित न्याय दिलाने की जरूरत है. अपना उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें एक मामले में न्याय पाने में करीब 4 से 5 साल लगे और इसके बाद भी न्याय नहीं मिला. उन्होंने जमीनी हकीकत पर चर्चा करते हुए कहा कि जागरूकता के लिए कानून बनाना ही सबसे महत्वपूर्ण नहीं है. हम एनजीओ, सिविल सोसायटी के लोग और प्रबुद्ध माननीय न्यायाधीश आपस में समन्वय बनाकर काम करें तो बात बनेगी. विनोबा भावे विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ रमेश शरण ने कहा कि कि. हर व्यक्ति उपभोक्ता है लेकिन हमारे यहां अधिकार के लिए आवाज उठाने वाले कम हैं. उन्होंने उपभोक्ता अदालतों में त्वरित न्याय पर की जरूरत पर भी बल दिया.

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