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सूरज की प्रेमिका 

शाम घूंघट डाल कर निकलती है

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सूरज की प्रेमिका
Neeraj Neer

शाम घूंघट डाल कर

निकलती है

कमरे से आँगन में। 

फिर दोनों हाथ बढ़ाकर

मूँद देती है

आसमान की आँखें

और कर लेती है आलिंगन 

सूरज का।    

फिर चूमती है उसके होठों को ..

सूरज लज्जाशील है। 

शर्म से लाल हो उठता है।

तब शाम खींच देती है

चारो तरफ

अँधेरे का पर्दा

और फिर अलोप जाती है

सूरज के साथ।  

शाम सूरज की प्रेमिका है

जो निकलती है

कमरे से

आँगन में ….

 

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