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मुंबई में डांस बार खोले जाने को सुप्रीम कोर्ट की हरी झंडी, नोट और सिक्के उड़ाने की इजाजत नहीं

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुंबई में डांस बार अब शाम के छह बजे से रात 11.30 बजे तक खोले जा सकेंगे

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NewDelhi : मुंबई में डांस बार खोलने की इजाजत मिल गयी है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार 17 जनवरी को मुंबई में डांस बार को कुछ शर्तों के साथ खोलने की इजाजत दे दी है. बता दें कि सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार के 2016 के कानून को वैध माना, साथ ही कुछ नियमों में बदलाव किये हैं. आदेश दिया गया है कि  डांस बार में नोट और सिक्के नहीं उडाये जा सकेंगे, लेकिन बार गर्ल्स को टिप दी जा सकेगी. जानकारी के अनुसार कोर्ट ने अपने फैसले में महाराष्ट्र सरकार के कानून में अश्लीलता पर सजा के तीन साल के प्रावधान को मंजूर कर लिया है.  सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद मुंबई में डांस बार अब शाम के छह बजे से रात 11.30 बजे तक खोले जा सकेंगे.

डांस बार में शराब परोसने और ऑर्केस्ट्रा को भी इजाजत होगी.  हालांकि कोर्ट ने अपने फैसले में कहा है कि बार में किसी तरह की अश्लीलता नहीं होनी चाहिए.  इसके उल्लंघन पर तीन साल की सजा होगी. डांस बार में सीसीटीवी लगाना अनिवार्य नहीं होगा.

डांसर और मालिक के बीच वेतन फिक्स करना सही नहीं

डांस बार में एरिया और ग्राहकों के बीच दीवार नहीं होगी. सरकार ने नियम तय किया था कि ग्राहक और डांसरों के बीच एक तीन फुट ऊंची दीवार बनाई जाये, जिससे डांस तो देखा जा सके, मगर उन तक पहुंचा न जा सके.  साथ ही कोर्ट ने कहा कि मुंबई जैसे क्षेत्र में धार्मिक और शैक्षणिक स्थलों से एक किलोमीटर की दूरी पर डांस बार होने का नियम तर्कसंगत नहीं है.  अब मुंबई में ज्यादा डांस बार देखने को मिल सकते हैं. कोर्ट ने कहा कि डांसर और मालिक के बीच वेतन फिक्स करना सही नहीं.  ये अधिकार सरकार का नहीं, बल्कि मालिक और डांसर के बीच आपसी कॉन्ट्रैक्ट का मामला है. इससे पहले, डांस बार पर महाराष्ट्र सरकार द्वारा बनाये कड़े कानून पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पिछले साल 30 अगस्त को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था.

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वक्त के साथ अश्लीलता की परिभाषा बदल गयी  : बता दें कि होटलों और रेस्तरां के संगठन ने कोर्ट में महाराष्ट्र सरकार के कानून को चुनौती दी थी. सुनवाई के दौरान महाराष्ट्र सरकार ने कहा था कि नया कानून संवैधानिक दायरे में आता है और महिलाओं के शोषण को रोकता है. सरकार ने यह भी कहा था कि कानून महिलाओं का सम्मान बनाये रखने और उनकी हिफाजत के लिए ही हैं;  वहीं, कोर्ट ने माना था कि वक्त के साथ अश्लीलता की परिभाषा बदल गयी है और अब मोरल पुलिसिंग भी हो रही है.

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