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सुप्रीम कोर्ट के निर्णय का सबसे अधिक प्रभाव झारखंड के आदिवासियों पर : हेमंत सोरेन

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  • पूर्व मुख्यमंत्री ने वन अधिकार कानून को लेकर भाजपा पर साधा निशाना
  • 30 लाख आदिवासियों के विस्थापन के लिए भाजपा को बताया जिम्मेदार
  • पाकिस्तान पर की गयी कार्रवाई को लेकर भारतीय वायुसेना को दी बधाई

Dumka : वन अधिकार कानून को लेकर सुप्रीम कोर्ट के निर्णय पर जेएमएम कार्यकारी अध्यक्ष हेमंत सोरेन ने कहा है कि इसका सबसे अधिक प्रभाव झारखंड के आदिवासी-मूलवासी पर पड़ेगा. हालांकि यह विषय पूरे देश का है, लेकिन राज्य की 29 फीसदी जमीन वन भूमि के अंतर्गत आती है और यहां बड़े पैमाने पर आदिवासी-मूलवासी बसते हैं. इससे स्पष्ट है कि इनके जीवन पर इसका व्यापक असर पड़ेगा. उन्होंने कहा कि लगभग 20 लाख आदिवासी परिवार जीवन-यापन के लिए जंगलों पर आश्रित हैं. हेमंत सोरेन मंगलवार को अपनी संघर्ष यात्रा– भाग 5 के तहत दुमका दौरे पर थे. इस दौरान उन्होंने पुलवामा आतंकी हमले के जवाब में भारतीय वायुसेना की कार्रवाई की भी प्रशंसा की. कहा कि निःसंदेह भारतीय सेना ने पूरे देश को गौरवान्वित किया है और वह बधाई की पात्र है.

राज्य में ही अस्वीकृत हुए 1,00,930 आवेदन

हेमंत सोरेन ने कहा कि जिन आदिवासियों (इसमें भूमिहीन भी शामिल हैं) ने वनपट्टा को लेकर सरकार को आवेदन दिया था, भाजपा सरकार ने इनमें से कई आवेदनों को रद्द कर दिया है. अगर केवल झारखंड की ही बात करें, तो अब तक 1,00,930 आवेदन अस्वीकृत किये गये है. सुप्रीम कोर्ट के निर्णय के बाद अब इन अस्वीकृतों को जबरन उनकी जमीन से बेदखल किया जायेगा. अस्वीकृत आवेदन का यह अर्थ नहीं है कि वे फर्जी हैं, बल्कि भाजपा की गलत नीतियों के कारण राज्य में आवेदन करने की प्रक्रिया त्रुटिपूर्ण है.

चहेते पूंजीपतियों और भू-माफियाओं को लाभ पहुंचाना चाहती है भाजपा

हेमंत सोरेन ने कहा कि पूरे प्रकरण में दुःख की बात है कि रघुवर सरकार ने राज्य के आदिवासियों को अनदेखा कर न्यायालय को गलत जानकारी दी या कहें कि आधी-अधूरी रिपोर्ट पेश की. दरअसल, इसके पीछे गरीब आदिवासियों के हक को मारकर भाजपा अपने चहेते पूंजीपतियों और भू-माफियाओं को फायदा पहुंचा रही है. ऐसा कर भाजपाइयों ने सारे संवैधानिक नियमों को ताक पर रखकर कुचल दिया. उन्होंने कहा कि कोर्ट ने भी कड़ी फटकार लगाते हुए केंद्र और राज्य को 27 अप्रैल तक शपथपत्र दायर करने का निर्देश दिया है, जो बताता है कि सरकार इस मामले में कितनी दोषी है.

पहले ही 30 लाख आदिवासी हो चुके हैं विस्थापित, उलगुलान जरूरी

हेमंत सोरेन ने कहा कि पहले ही राज्य में ईको सिस्टम के नाम पर बड़े पैमाने पर आदिवासी-मूलवासी लोगों को विस्थापित करने का षड्यंत्र रचा जा रहा है. विकास के नाम पर अब तक 30 लाख लोग विस्थापन के शिकार हुए हैं, जिनका अब कोई अता-पता नहीं. इसके लिए भाजपा की सरकार पूरी तरह से दोषी रही है. ऐसे में हम आदिवासी-मूलवासियों के पास उलगुलान करने के सिवाय कोई रास्ता नहीं बचा है. आगामी चुनाव में भाजपा की सरकार को उखाड़ फेंकने में सहयोग की बात करते हुए हेमंत सोरेन ने कहा कि जेएमएम हर वक्त इनके साथ खड़ी है.

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