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बकोरिया मामले में सुप्रीम कोर्ट का फैसला स्वागत योग्य : योगेंद्र प्रताप

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Ranchi : झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप ने कहा कि बकोरिया कथित मुठभेड़ कांड की सीबीआई जांच पर रोक लगाने के लिए झारखंड सरकार द्वारा दायर की गयी एसएलपी (स्पेशल लीव पिटीशन) को सुप्रीम कोर्ट द्वारा खारिज करने का फैसला स्वागत योग्य है. यह फैसला झारखंड सरकार के उस मंसूबे पर भी पानी फेरनेवाला है, जिसमें वह इस मामले में संलिप्त बड़े पुलिस अधिकारियों की गर्दन बचाने के लिए जी-जान से लगी हुई है. इस फैसले से राज्य सरकार का चेहरा पूरी तरह बेनकाब हो चुका है. सुप्रीम कोर्ट द्वारा हाई कोर्ट के फैसले को बरकरार रखते हुए मामले की जांच सीबीआई से कराने के फैसले से अब पीड़ित परिवार को न्याय की उम्मीद के साथ-साथ मामले का पूरी तरह दूध का दूध और पानी का पानी होने की उम्मीद जगी है.

सरकार को सीबीआई जांच से गुरेज क्यों है

योगेंद्र प्रताप ने कहा कि सवाल गंभीर है कि आखिर राज्य सरकार को सीबीआई जांच से गुरेज क्यों है. सरकार सीबीआई जांच से क्यों कतराती रही है? जब हाई कोर्ट ने 22 अक्टूबर 2018 को सीबीआई जांच का आदेश दे दिया, तब फिर राज्य सरकार को सुप्रीम कोर्ट में इसके खिलाफ पिटीशन दायर करने की जरूरत क्या थी? आखिर सरकार दोषी पुलिस अधिकारियों पर इतनी मेहरबान क्यों है? हैरत की बात यह है कि सरकार ने सीबीआई जांच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में तब याचिका दायर की, जब सीबीआई जांच प्रारंभ हो चुकी थी. सरकार की इस मामले में प्रारंभ से ही कई ऐसी गतिविधियां खुद इशारा करती रही हैं कि कहीं न कहीं सरकार की भूमिका इस मामले में संदिग्ध है. सरकार के सुप्रीम कोर्ट जाने के फैसले का उसी वक्त झाविमो सहित अन्य विपक्षी पार्टियों के अलावा सरकार के मंत्री सरयू राय तक ने विरोध किया था, परंतु बहुमत के नशे में अंधी हो चुकी राज्य सरकार ने किसी की नहीं सुनी. सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मामले से पूरी तरह धुंध छंटने के आसार अब दिखने लगे हैं.

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