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हार्दिक की याचिका पर तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, लोकसभा चुनाव लड़ने पर लगा प्रश्नचिन्ह

New Delhi: कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं. और उनके लोकसभा चुनाव लड़ने पर भी सवालिया निशान लगता दिख रहा है. दरअसल 2015 के मेहसाणा दंगा मामले में उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिली है.

तत्काल सुनवाई से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

उच्चतम न्यायालय ने गुजरात उच्च न्यायालय के उस आदेश को चुनौती देने वाली हार्दिक पटेल की याचिका पर तत्काल सुनवाई से इनकार किया जिसमें 2015 के दंगे मामले में उसकी सजा पर रोक लगाने से इनकार किया गया था.

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हार्दिक पटेल की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि अभी कोई अर्जेंसी नहीं है. उच्चतम न्यायालय ने कहा कि हार्दिक पटेल की याचिका पर तत्काल सुनवाई की जरुरत नहीं है क्योंकि उच्च न्यायालय का आदेश पिछले साल अगस्त में आया था.

चुनाव लड़ने पर संशय

उल्लेखनीय है कि अपनी याचिका में कांग्रेस नेता हार्दिक पटेल ने गुजरात हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाने और सज़ा को निलंबित करने की मांग की है. दरअसल, हाईकोर्ट के फैसले के कारण हार्दिक पटेल को फिलहाल लोकसभा चुनाव लड़ने के लिए अयोग्य करार दिया गया है.

ऐसे में अगर उन्हें सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं मिलती है तो फिर हार्दिक पटेल का चुनाव लड़ना मुश्किल हो जाएगा. बता दें कि याचिका में कहा गया है कि नामांकन दाखिल करने की आखिरी तारीख चार अप्रैल है.

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इसलिए सुप्रीम कोर्ट हाई कोर्ट के फैसले पर रोक लगाए. हार्दिक ने अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट के 2007 के नवजोत सिंह सिद्धू फैसले का हवाला दिया है.

क्या है मामला

उल्लेखनीय है कि 2015 में मेहसाणा में हुए उपद्रव के मामले में 29 मार्च को गुजरात हाईकोर्ट से हार्दिक पटेल को बड़ा झटका लगा था.

हाईकोर्ट ने हार्दिक पटेल की उस याचिका को ख़ारिज कर दिया था जिसमें मेहसाणा दंगा मामले में उनकी दोषसिद्धि को निलंबित करने की अपील की गई थी.

ज्ञात हो कि दंगा भड़काने के आरोप में साल 2018 में निचली कोर्ट ने पाटीदार नेता हार्दिक पटेल को दोषी ठहराते हुए दो साल की जेल की सजा सुनाई थी.

हालांकि, अगस्त 2018 में हाई कोर्ट ने उनकी दो साल की सजा तो निलंबित कर दी थी लेकिन दोषसिद्धि को बरकरार रखा था. इसके चलते वो जनप्रतिनिधि अधिनियम के तहत चुनाव लडने से अयोग्य हो गए.

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