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#Supreme_Court ने उमर अब्दुल्ला की हिरासत पर जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस भेजा, 2 मार्च तक मांगा जवाब

NewDelhi : उमर अब्दुल्ला की हिरासत को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट  ने जम्मू-कश्मीर प्रशासन को नोटिस जारी किया है. जान लें कि उमर अब्दुल्ला की बहन सारा अब्दुल्ला पायलट ने पब्लिक सेफ्टी एक्ट (PSA) के तहत हिरासत को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है और उन्हें कोर्ट में पेश कर रिहा करने की मांग की है. इस पर कोर्ट ने नोटिस जारी कर जम्मू-कश्मीर प्रशासन से जवाब मांगा है. मामले की अगली सुनवाई 2 मार्च को होगी.

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कपिल सिब्बल ने याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई के लिए अपनी दलील रखी

सारा की तरफ से पेश हुए सीनियर कांग्रेस नेता और जाने-माने वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिस अरुण मिश्रा और इंदिरा बनर्जी की बेंच के सामने याचिका पर जल्द से जल्द सुनवाई के लिए अपनी दलीलें रखी.  सिब्बल ने कहा कि यह बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका है ऐसे में इसपर जल्द सुनवाई की जरूरत है.  कोर्ट ने याचिकाकर्ता के पक्ष को सुनने के बाद सुनवाई के लिए 2 मार्च का दिन निर्धारित कर दिया.

ताकि अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के खिलाफ विरोध को दबाया जा सके

पायलट ने कहा है कि प्रशासन ने यह सुनिश्चित करने के लिए नजरबंद किया ताकि संविधान के अनुच्छेद-370 को निरस्त करने के खिलाफ विरोध को दबाया जा सके. शांति व्यवस्था बहाल रखने को लेकर उनसे किसी खतरे का सवाल ही नहीं उठता. उन्होंने अपनी याचिका में कहा है कि इस शक्ति का इस्तेमाल करने का उद्देश्य न केवल उमर अब्दुल्ला को कैद में रखने के लिए, बल्कि नेशनल कॉन्फ्रेंस के पूरे नेतृत्व को और साथ ही अन्य राजनीतिक पार्टियों के नेतृत्व को कैद में रखने का है. इसी तरह का व्यवहार फारूक अब्दुल्ला के साथ किया गया है.

उमर अब्दुल्ला (49) और महबूबा मुफ्ती (60) को पिछले साल पांच अगस्त से एहतियातन हिरासत में रखा गया है, जब केंद्र ने जम्मू कश्मीर को विशेष दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधानों को हटाने और इस पूर्ववर्ती राज्य को दो केंद्र शासित क्षेत्रों- लद्दाख एवं जम्मू कश्मीर- में बांटने की घोषणा की थी.

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सारा अब्दुल्ला पायलट ने अपने भाई की हिरासत को अवैध बताया

सुनवाई के बाद मीडिया से बातचीत में सारा ने कहा, हमें उम्मीद है क्योंकि यह बंदी प्रत्यक्षीकरण का मामला है, जल्द ही उमर अब्दुल्ला को रिहाई मिलेगी. कहा कि हमें न्याय प्रणाली पर पूरा भरोसा है.  हम चाहते हैं कि अन्य कश्मीरियों को भी वैसे ही अधिकार मिले जैसे भारत के अन्य नागरिकों को मिले हुए हैं.

सारा अब्दुल्ला पायलट ने 10 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर जम्मू कश्मीर जन सुरक्षा कानून ( PSA) 1978 के तहत अपने भाई की हिरासत को अवैध बताया और कहा था कि शांति व्यवस्था बहाल रखने को लेकर उनसे किसी खतरे का सवाल ही नहीं उठता.  मालूम हो कि उमर अब्दुल्ला की नजरबंदी की तय सीमा गुरुवार को समाप्त हो रही थी, लेकिन इससे पहले ही प्रशासन ने PSA के तहत उनकी नजरबंदी बढ़ा दी.

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