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सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने जस्टिस बोस व जस्टिस बोपन्ना के नाम की सिफारिश दोबारा भेजी, केंद्र की आपत्ति दरकिनार

NewDelhi :  SC कॉलेजियम ने केंद्र सरकार की जस्टिस बोस और जस्टिस बोपन्ना की नियुक्ति पर आपत्तियों को खारिज कर दिया है.  खबर है कि केंद्र सरकार की दलील खारिज करते हुए जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस एएस बोपन्ना की सुप्रीम कोर्ट में जज की नियुक्ति की लेकर सिफारिश एक बार फिर केंद्र सरकार के पास भेजी गयी है. कॉलेजियम ने कहा है कि वरिष्ठता पर मेरिट को तरजीह दी जानी चाहिए. बता दें, केंद्र सरकार ने कॉलेजियम की सिफारिश को नकार दिया था. सरकार ने वरिष्ठता का हवाला देकर जस्टिस अनिरुद्ध बोस और जस्टिस एएस बोपन्ना की सिफारिश पर कॉलेजियम को फिर से विचार करने को कहा था.

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सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के 31 पद स्वीकृत हैं

इसी क्रम में  कॉलेजियम ने बॉम्बे हाईकोर्ट के जज जस्टिस बीआर गवई और हिमाचल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश भी केंद्र को भेजी है. बता दें कि कॉलेजियम ने 12 अप्रैल को झारखंड उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस अनिरुद्ध बोस और गुवाहाटी उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस एएस बोपन्ना को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की थी. सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों के 31 पद स्वीकृत हैं. फिलहाल न्यायालय में 27 न्यायाधीश हैं.

जान लें कि न्यायमूर्ति बोस न्यायाधीशों की अखिल भारतीय वरिष्ठता के क्रम में 12वें नंबर पर हैं. उनका मूल उच्च न्यायालय कलकत्ता उच्च न्यायालय रहा है. न्यायमूर्ति बोपन्ना वरिष्ठता क्रम में 36वें नंबर पर हैं. पिछले साल जब न्यायमूर्ति बोस के नाम की सिफारिश दिल्ली उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश पद के लिए की गयी थी, उस समय  भी सरकार ने उनका नाम लौटा दिया था.

 कोलेजियम सीनियर जजों का एक समूह है

कोलेजियम सीनियर जजों का एक समूह है,  जो सुप्रीम कोर्ट में किसी भी जज की नियुक्ति के लिए अपनी पेशकश दे सकता है. सुप्रीम कोर्ट के जजों की नियुक्ति भारत के राष्ट्रपति करते हैं. लेकिन संविधान के आर्टिकल 124 (2) के तहत राष्ट्रपति को इसके लिए सुप्रीम कोर्ट के जजों और सभी प्रदेशों के हाई कोर्ट के जजों से भी सलाह मशवरा करना पड़ता है. सुप्रीम कोर्ट में जजों की नियुक्ति उनकी सीनियोरिटी के आधार पर की जाती है. लेकिन यदि बीते समय में किसी हाई कोर्ट के जज ने कुछ ऐसा शानदार प्रदर्शन किया होता है तो उन्हें सुबूतों के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में प्रमोट किया जा सकता है.

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