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SC ने चुनाव आयोग के खोले हाथ, पेड न्यूज वाले अब बच नहीं पायेंगे

पेड न्यूज के माले में अब चुनाव आयोग खुल कर कार्रवाई कर सकेगा. बता दें कि SC की तीन सदस्यीय पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के पैरा 77 वाले उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उसने पेड न्यूज के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से चुनाव आयोग को रोक रखा था.

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NewDelhi : पेड न्यूज के मामले में अब चुनाव आयोग खुल कर कार्रवाई कर सकेगा. बता दें कि SC की तीन सदस्यीय पीठ ने दिल्ली हाईकोर्ट के पैरा 77 वाले उस आदेश पर रोक लगा दी है, जिसमें उसने पेड न्यूज के खिलाफ कोई भी कार्रवाई करने से चुनाव आयोग को रोक रखा था.  बता दें कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला आने वाले विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगा, क्योंकि चुनाव के समय पेड न्यूज के मामले सामने आते हैं. इससे पूर्व हुई सुनवाई में चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से कहा था कि कोई भी ऐसी खबर, जिसमें राजनेता अपने रिकॉर्ड और उपलब्धियों के आधार पर अपने पक्ष में मतदान की अपील कर रहा हो, उसे पेड न्यूज माना जायेगा. जानकारी के अनुसार कि सुप्रीम कोर्ट में चुनाव आयोग मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के एक निर्णय के खिलाफ पहुंचा था, जिसमें मध्य प्रदेश के मंत्री नरोत्तम मिश्रा को पेड न्यूज के आरोप में तीन साल के लिए अयोग्य ठहराने के आयोग के फैसले को हाईकोर्ट की एक सदस्यीय पीठ ने 18 मई को खारिज कर दिया था.

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चुनाव आयोग के अनुसार क्या है पेड न्यूज

आयोग के अनुसार हाईकोर्ट पेड न्यूज के खिलाफ कार्रवाई करने की उसकी भूमिका को प्रतिबंधित करने की गलती कर रहा है. बता दें कि आयोग ने इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर कहा कि बहुत ज्यादा प्रसार क्षेत्र वाले समाचार पत्रों में प्रत्याशियों के नाम से जारी बयानों में उनके रिकॉर्ड और उपलब्धियों की प्रशंसा करने के साथ मतदाताओं से सीधे वोट देने की अपील भी की जाती है.  ऐसी खबरों को चुनाव आयोग सामान्य खबर नहीं बल्कि पेड न्यूज मानता है. याचिका में आयोग ने सुप्रीम कोर्ट से इस मुद्दे की सुनवाई करने की अपील की थी.  आयोग ने अपनी याचिका में यह भी कहा था कि अगर फ्री स्पीच की आड़ में इस तरह के जानबूझकर प्रचार वाले संबोधनों को चुनाव के समय छूट दी गयी तो पहुंच वाले उम्मीदवार इसका लाभ उठा लेंगे.

बता दें कि 2014 में महाराष्ट्र और हरियाणा समेत कई राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव  में पेड न्यूज के काफी मामले सामने आये थे.  सबसे ज्यादा हरियाणा में 212 पेड न्यूज के मामले सामने आये थे.  महाराष्ट्र में 73, झारखंड में 7 और जम्मू-कश्मीर में कुल 21 पेड न्यूज के मामले उजागर हुए थे. इसके बाद  (2015 में हुए विधानसभा चुनावों में दिल्ली में कुल 59 मामले और बिहार में सात पेड न्यूज के मामले सामने आये थे.  इस क्रम में 2016 में भी असम में पांच, तमिलनाडु में 17 और पश्चिम बंगाल में पेड न्यूज का एक मामला सामने आया था.

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