Fashion/Film/T.VLead NewsNational

सुपरस्टार रजनीकांत को आज मिलेगा भारतीय सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान दादा साहब फाल्के अवॉर्ड

New Delhi : भारतीय सिनेमा और दक्षिण भारतीय फ़िल्मों के दिग्गज अभिनेता रजनीकांत को 51वें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार से सम्मानित किया जाएगा. रजनीकांत आज यानी 25 अक्टूबर को नई दिल्ली में अपना दादा साहब फाल्के पुरस्कार प्राप्त करेंगे. समारोह में जाने से पहले रजनीकांत ने चेन्नई में अपने घर के बाहर मीडिया से बातचीत की, जिसमें उन्होंने कहा कि यह प्रतिष्ठित अवार्ड जीतने की कभी उम्मीद नहीं की थी. इसके साथ ही उन्होंने के बालाचंदर को याद करते हुए कहा कि उन्हें दुख है कि उनके गुरु केबी सर उन्हें अवार्ड प्राप्त करते हुए देखने के लिए जीवित नहीं है. इसके साथ ही फैंस को शुक्रिया देते हुए रजनीकांत ने ट्वीट भी किया.

 

advt

 

रजनीकांत ने ट्वीट करते हुए इसकी जानकारी दी, उन्होंने कहा कि उनके लिए सोमवार एक महत्वपूर्ण अवसर है क्योंकि उन्हें भारत सरकार से सिनेमा का सर्वोच्च सम्मान, दादा साहब फाल्के पुरस्कार मिलेगा. यह आपके प्यार और सपोर्ट के बिना मुश्किल था.

दूसरी बात, मेरी बेटी सौंदर्या विशगन ने अपने स्वतंत्र प्रयासों से ‘हूट’ नामक लोगों के लिए एक बहुत ही उपयोगी ऐप बनाने का बीड़ा उठाया है और वह इसे भारत से दुनिया के सामने पेश करने जा रही है. लोग अब अपनी आवाज के माध्यम से अपने विचार व्यक्त कर सकते हैं, इच्छाओं और विचारों की तरह ही वे अपनी पसंद की किसी भी भाषा में लिखित रूप में करते हैं. मुझे इस अभिनव, उपयोगी और अपनी तरह का पहला ‘हूट ऐप’ मेरी आवाज (एसआईसी) में लॉन्च करने में बहुत खुशी हो रही है.’

1 अप्रैल 2021 को केन्द्रीय सूचना और प्रसारण मंत्री श्री प्रकाश जावड़ेकर ने आज 51वें दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के नाम का ऐलान किया था. 2019 का दादा साहेब फाल्के पुरस्कार के लिए पाँच सदस्यों की ज्यूरी ने एकमत से रजनीकांत के नाम की सिफ़ारिश की थी. ज्यूरी में आशा भोंसले, सुभाष घई, मोहन लाल, शंकर महादेवन और बिश्वजीत चटर्जी शामिल थे.”

भारत में सबसे लोकप्रिय सितारों में से एक रजनीकांत को भारत सरकार द्वारा 2000 में पद्म भूषण और 2016 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया जा चुका है. रजनीकांत ने तमिल सिनेमा में ‘अपूर्व रागंगल’ से डेब्यू किया था.

मुश्किलों से भरा रहा रजनीकांत का बचपन

रजनीकांत का बचपन मुश्किलों से भरा रहा है. बचपन में उन्हें आर्थिक तंगी का सामना करना पड़ा. रजनीकांत की असली नाम शिवाजी राव गायकवाड़ था. यही शिवाजी राव आगे चलकर रजनीकांत बने. रजनीकांत पांच साल के थे तभी उनकी मां का निधन हो गया. मां के निधन के बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधे पर आ गई. रजनीकांत के लिए भी घर चलाना इतना आसान नहीं था. उन्होंने घर चलाने के लिए कुली तक का काम किया.

फिल्मों में आने से पहले थे बस कंडक्टर

रजनीकांत फिल्मों में आने से पहले बस कंडक्टर की नौकरी करते थे. रजनीकांत ने तमिल फिल्म इंडस्ट्री में बालचंद्र की फिल्म ‘अपूर्वा रागनगाल’ से एंट्री ली थी. इस फिल्म में कमल हासन और श्रीविद्या भी थे. रजनीकांत ने अपने अभिनय की शुरुआत कन्नड़ नाटकों से की थी. दुर्योधन की भूमिका में रजनीकांत घर-घर में लोकप्रिय हुए थे.

कई नकारात्मक किरदारों का अभिनय करने के बाद रजनीकांत पहली बार नायक के रूप में एसपी मुथुरमन की फिल्म भुवन ओरु केल्विकुरी में दिखे थे. बता दें, उनके प्रति लोगों की दीवानगी इस हद तक है कि वे उन्हें ‘भगवान’ मानते हैं. रजनीकांत की फिल्में सुबह साढ़े तीन बजे तक रिलीज हो जाती हैं. कुली से सुपरस्टार बनने वाले रजनीकांत कभी यहां तक नहीं पहुंच पाते अगर उनके दोस्त राज बहादुर ने उनके अभिनेता बनने के सपने को जिंदा न रखा होता. और उन्होंने ही रजनीकांत को मद्रास फिल्म इंस्टिट्यूट में दाखिला लेने के लिए कहा. दोस्त की बदौलत ही रजनीकांत आगे बढ़ते गए और फिर फिल्मों में काम करने लगे.

1983 में बॉलीवुड में रखा कदम

साल 1983 में उन्होंने बॉलीवुड में कदम रख दिया. उनकी पहली हिंदी फिल्म अंधा कानून थी. रजनीकांत ने इसके बाद सिर्फ तरक्की की सीढ़ियां चढ़ीं. आज वे दक्षिण भारतीय सिनेमा के सबसे बड़े स्टार कहे जाते हैं. दादा साहेब फाल्के को भारतीय सिनेमा का जन्मदाता कहा जाता है. उनके ही नाम पर हर साल ये पुरस्कार दिए जाते हैं. अब तक 50 बार ये पुरस्कार दिया जा चुका है. रजनीकांत से पहले अमिताभ बच्चन को यह पुरस्कार दिया गया था.

Related Articles

Back to top button
%d bloggers like this: