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राजधानी में बनना था सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल, 7 साल बाद भी काम नहीं हो सका शुरू

  • डोरंडा के घाघरा में बनना था अपोलो सुपरस्पेशियलिटी हॉस्पिटल
  • 11 सितंबर 2012 को निगम बोर्ड की बैठक में पास हुआ था निर्णय
  • रघुवर कैबिनेट में भी प्रस्ताव पर लगी थी मुहर, जमीन अधिग्रहण बनी समस्या

Ranchi :  राजधानी के डोरंडा स्थित घाघरा इलाके में अपोलो ग्रुप के सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल बनने का सपना अभी तक अधर में है. जिस वक्त हेमंत सोरेन डिप्टी सीएम थे उसी वक्त इस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल को बनाने की बात सामने आयी थी.

यह हॉस्पिटल रांची नगर निगम की 2.80 एकड़ जमीन पर बनाया जाना था. रघुवर सरकार ने भी 2015 को इस प्रोजेक्ट पर पहल की थी. लेकिन हॉस्पिटल तक पहुंचने में जमीन अधिग्रहण में आयी समस्या के कारण ही राजधानी की यह प्रस्तावित य़ोजना धरातल पर नहीं उतर सकी है.

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7 साल में भी जमीन का मामला नहीं निपटा सका है निगम

डोरंडा के घाघरा में अपोलो हॉस्पिटल बनाने का निर्णय 11 सितंबर 2012 को निगम बोर्ड की बैठक में पास हुआ था. चेन्नई अपोलो को रांची में अपनी शाखा खोलनी थी, पर सात साल बीत जाने के बावजूद अब तक अस्पताल की एक ईंट भी नहीं जोड़ी जा सकी है.

अस्पताल के लिए नगर निगम द्वारा आवंटित 2.80 एकड़ जमीन पर झाड़ियां उग आयीं हैं, पर चेन्नई अपोलो प्रबंधन अब भी रास्ते के लिए राह तक रहा है. बताया गया कि अपोलो प्रबंधन प्रस्तावित हॉस्पिटल तक पहुंचने के लिए 40 फुट चौड़े रास्ते के लिए जमीन मांग रहा था. लेकिन इस पहुंच पथ के लिए निगम के समक्ष जमीन अधिग्रहण की समस्या सामने आयी थी.

स्थानीय रैयतों ने हॉस्पिटल के लिए जमीन देने से साफ इनकार कर दिया था. सात साल बाद भी निगम और जिला प्रशासन जमीन अधिग्रहण का मामला नहीं निपटा पाये हैं.

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जब टेंडर का फाइनेंशियल बिड हुआ था पास, उस वक्त हेमंत थे डिप्टी सीएम

राजधानी में बननेवाले इस सुपर स्पेशियलिटी हॉस्पिटल में कुल 200 बेड होने की बात की गयी थी. इसके लिए निगम की टेंडर कमिटी ने चेन्नई के इस ग्रुप के फाइनेंशियल बिड को पास कर दिया था. जिस वक्त यह बिड पास हुई थी, उस दौरान अर्जुन मुंडा सरकार में वर्तमान सीएम हेमंत सोरेन डिप्टी सीएम थे.

रघुवर सरकार में भी यह मामला संज्ञान में आया था. राजधानीवासियों को बेहतर इलाज मिल सके, इसके लिए रघुवर कैबिनेट ने भी सहमति जतायी थी. 2.80 एकड़ जमीन पर बननेवाले इस हॉस्पिटल के लिए अपोलो ग्रुप को जमीन लीज पर देने के प्रस्ताव पर रघुवर कैबिनेट ने जुलाई 2015 को सहमति जतायी थी.

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