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#Corona के आगे लाचार सुपर पावर अमेरिकाः एक दिन में 2228 लोगों की मौत, WHO की रोकी फंडिंग

New York: दुनिया के सुपर पावर के नाम से जाना जानेवाला अमेरिका कोरोना वायरस के आगे लाचार नजर आ रहा है. इस घातक बीमारी के कारण अमेरिका में 25000 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है. वहीं संक्रमण के 6,05,000 से अधिक मामले सामने आये हैं. पिछले 24 घंटे में यहां दो हजार से अधिक लोगों की जान जा चुकी है.

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इधर अमेरिका ने विश्व स्वास्थ्य संगठन पर चीन की तरफदारी करने का आरोप करते हुए फंडिंग पर रोक लगा दी है.

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जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में पिछले 24 घंटों में 2,228 लोगों की कोरोना वायरस के कारण मौत हो गई है, जो एक दिन में मृतकों की सर्वाधिक संख्या है. जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, मंगलवार तक 6,05,000 से अधिक अमेरिकी कोरोना वायरस से संक्रमित पाए गए जो इस बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित तीन अन्य देशों से अधिक है.

24 घंटे में 2,228 लोगों की मौत

एक ही दिन में सर्वाधिक 2228अमेरिकियों की मौत हुई. इससे पहले 10 अप्रैल को एक ही दिन में 2,074 लोगों की मौत हुई थी. देश में इस बीमारी का केंद्र बने न्यूयॉर्क में अभी तक 2,03,020 लोगों के संक्रमित होने की पुष्टि हुई है और 10,842 लोगों की मौत हो चुकी है.

जॉन्स हॉप्किन्स यूनिवर्सिटी के अनुसार, इस जानलेवा वायरस से देश में कुल 25,981 लोगों की मौत हो चुकी है.

न्यूयॉर्क में 10 हजार से ज्यादा लोगों की मौत

अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर में मंगलवार को कोरोना वायरस से मरने वाले लोगों की संख्या 10,000 के पार चली गई है. अधिकारियों ने तकरीबन उन 4000 लोगों के मारे जाने का अनुमान जताया है जो जांच में कभी संक्रमित नहीं पाए गए लेकिन उनकी कोविड-19 से मौत की आशंका है.

शहर के स्वास्थ्य विभाग ने एलान किया कि 3,778 लोगों की इस बीमारी से मौत होने की आशंका है.

नए आंकड़ों से पता चलता है कि अमेरिका में कोरोना वायरस के केंद्र बने इस शहर में इस संक्रामक रोग से मरने वाले लोगों की संख्या बढ़कर 10,367 पर पहुंच गई है.

शहर के स्वास्थ्य आयुक्त ओक्सीरिस बारबोट ने कहा, ‘‘ये आंकड़े वायरस के हमारे शहर पर पड़े असर को दिखाता है और साथ ही ये इस महामारी के स्तर का पता लगाने में हमारी मदद करेंगे और हमारे फैसलों के लिए हमारा मार्गदर्शन करेंगे.’’

विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार, जिन लोगों के मारे जाने का अनुमान जताया गया है, वे ऐसे लोग हैं जो कोरोना वायरस की जांच में संक्रमित नहीं पाए गए थे लेकिन उनके मौत के प्रमाणपत्र में मौत की वजह कोविड-19 या उसके जैसी कोई बीमारी बताई गई है.

अमेरिका में तेजी से फैल रहे इस संक्रामक रोग का सबसे अधिक दंश न्यूयॉर्क शहर ने झेला है जहां पूरे देशभर में मारे गए लोगों की लगभग आधी संख्या है.

गत सप्ताह मेयर बिल डी ब्लासियो ने बताया था कि घरों में मारे गए कई लोगों को कोविड-19 के कारण मरने वाले लोगों के तौर पर नहीं गिना गया जबकि उनकी मौत का कारण यह बीमारी रही होगी. नर्सिंग होम्स तथा अन्य देखभाल केंद्रों में भी और मौतें होने की आशंका है.

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अमेरिका ने रोकी WHO की फंडिंग

चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस को फैलने से रोकने में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका से अमेरिका खफा है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पहले ही WHO पर चीन का पक्ष लेने का आरोप लगाते हुए फंडिंग रोकने की धमकी दी थी.

अब राष्ट्रपति ट्रंप ने इस पर अमल करते हुए WHO की फंडिंग रोकने का ऐलान कर दिया है.
मंगलवार को इसकी घोषणा करते हुए ट्रंप ने WHO पर कोरोना की गंभीरता को तब तक छिपाने का आरोप लगाया, जब तक कि इस बीमारी ने पूरी दुनिया में अपने पांव नहीं पसार लिए. मीडिया से बात करते हुए अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि कोरोना वायरस फैलने की बात छिपाने और कुप्रबंधन में विश्व स्वास्थ्य संगठन की भूमिका की समीक्षा की जा रही है.

संकट से उबरने की कोशिश जारी- ट्रंप

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस वैश्विक महामारी पर व्हाइट हाउस के नियमित संवाददाता सम्मेलन में कहा, ‘‘अमेरिका इस वायरस के खिलाफ लड़ाई में ठोस प्रगति करने की कोशिश कर रहा है. हमें इस अप्रत्यक्ष दुश्मन के कारण हर कीमती जान के खोने का गम है लेकिन अंधकार में भी हम प्रकाश की किरणें देख सकते हैं. हम सुरंग देखते हैं और सुरंग के अंत में हम प्रकाश देखते हैं.’’

उन्होंने कहा कि अमेरिका में किसी भी देश के मुकाबले प्रति व्यक्ति सबसे अधिक आईसीयू बिस्तर हैं. उन्होंने कहा, ‘‘हमारे पास हर 100,000 लोगों पर 34.7 आईसीयू बिस्तर हैं जो इटली में 100,000 लोगों पर 12.5 बिस्तर, फ्रांस में 11.6 बिस्तर, स्पेन में 9.7 बिस्तर से कहीं अधिक हैं.’’

उन्होंने देश में कोरोना वायरस से लड़ने के लिए उठाए जाने वाले कदमों का जिक्र करते हुए कहा कि अस्पतालों और अन्य स्वास्थ्य देखभाल केंद्रों में 16,000 से अधिक वेंटीलेटर्स हैं जिनका इस वक्त इस्तेमाल नहीं किया जा रहा है.
ट्रंप ने कहा कि अमेरिका के खाद्य एवं औषध प्रशासन ने रटगर्स यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं द्वारा विकसित की गई जांच को मंजूरी दे दी है जिसमें मरीजों की लार का इस्तेमाल किया जा सकता है.

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