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सुधांशु मित्तल के साले की कंपनी पर 10 हजार करोड़ रुपये की ठगी का आरोप

New Delhi: गुरुग्राम की रियल इस्टेट कंपनी, आइरियो (IREO) ग्रुप पर 10 हजार करोड़ रुपये की ठगी का आरोप लगा है. हैरानी की बात ये है कि इस कंपनी के खिलाफ अब तक किसी सरकारी एजेंसी ने कोई कार्रवाई नहीं की है. कंपनी के मालिक बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल के साले हैं.

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क्या है पूरा मामला ?

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एनडीटीवी की रिपोर्ट की माने तो पिछले पांच महीनों के अंदर आइरियो (IREO) ग्रुप के दो निवेशकों ने कंपनी के वाइस प्रेसिंडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गोयल के खिलाफ जालसाजी और ठगी का मुकदमा दर्ज कराया. ललित गोयल के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने वाली पहली कंपनी है अमेरिका की एक्सॉन कैपिटल. इसके बाद अमेरिका की चिल्ड्रेन इनवेस्टमेंट फंड फाउंडेशन (Children’s Investment Fund Foundation) ने भी दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग में कंपनी के खिलाफ मामला दर्ज कराया. इन दोनों के अलावा दुनिया के कुछ बड़े निवेशकों जैसे, स्टेनफोर्ड यूनिवर्सिटी, टाइगर पार्टनर्स और यूनिवर्सिटी ऑफ नॉट्रेडम ने भी कंपनी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है. सभी ने कंपनी के वाइस प्रेसिंडेंट और मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गोयल के खिलाफ जालसाजी का मामला दर्ज कराया है.

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IREO ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गोयल
 IREO ग्रुप के मैनेजिंग डायरेक्टर ललित गोयल 

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कौन है घोटाले का मास्टरमाइंड ललित गोयल ?

ललित गोयल बीजेपी के बड़े नेता सुधांशु मित्तल के साले हैं. आइरियो (IREO) कंपनी के पूर्व सीइओ रमेश संका का दावा है कि अपने राजनीतिक रसुख की बदौलत इस पूरे मामले को दबाने की कोशिश हो रही है. उन्होने आरोप लगाया कि आइरियो (IREO) कंपनी के मार्फत सुधांशु मित्तल बीजेपी को करोड़ों रुपये का गुप्त चंदा देते हैं. इसी कारण केन्द्र सरकार के कुछ मंत्री ललित गोयल और कंपनी को बचाने की कोशिश कर रहे हैं.

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एजेंसियां क्यों नहीं कर रही जांच ?

एनडीटीवी का दावा है कि केन्द्र सरकार की किसी एजेंसी ने आइरियो (IREO) ग्रुप या ललित गोयल के खिलाफ अभी तक जांच शुरु नहीं की है. इस बारे में संपर्क करने पर दिल्ली पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग ने शिकायतों की जांच के बाद कार्रवाई का भरोसा दिया. वहीं सीबीडीटी ने ऐसी किसी शिकायत की जानकारी से इनकार किया है. सेट्रल बोर्ड ऑफ एक्साइज़ एंड कस्टम ने इस केस पर किसी भी तरह की जानकारी देने से साफ इनकार कर दिया.

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आइरियो (IREO) कंपनी से मेरा लेना-देना नहीं- सुधांशु मित्तल

एनडीटीवी ने जब बीजेपी नेता सुधांशु मित्तल से बात की तो उन्होने कंपनी पर लगे जालसाजी के आरोपों पर कहा कि उनका आइरियो (IREO) कंपनी के साथ किसी तरह का व्यवसायीक रिश्ता नहीं है. उन्होने इस आरोप को बेबुनियाद बताया कि कंपनी बीजेपी को बड़ा चंदा देती है. उनका कहना था कि चंदे की जानकारी उन्हे नहीं है. सुधांशु मित्तल ने ललित गोयल से अपने रिश्ते की बात जरुर स्वीकार की है.

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कंपनी पर क्या है आरोप ?

एनडीटीवी की रिपोर्ट की माने तो फरवरी, 2018 में एक्शॉन कैपिटल (Axon Capital) और चिल्ड्रेन इनवेस्टमेंट फंड फाउंडेशन (Children’s Investment Fund Foundation) ने अपनी शिकायत में कहा कि उन्होने आइरियो ग्रुप में करीब 2000 करोड़ (दो हजार करोड़) रुपये का निवेश किया. जिसमें से कंपनी ने करीब 650 करोड़ रुपये की हेराफेरी की. इसके बाद इन्ही दो कंपनियों ने मई 2018 में दोबारा शिकायत दर्ज कराई. इस शिकायत में कंपनी पर 10 हजार करोड़ रुपये की हेराफेरी का आरोप लगाया. एक्शॉन कैपिटल के सीइओ दीनाकरण सिंह का दावा है कि कंपनी के कुल 76 निवेशकों ने उनकी शिकायत को सही बताया है.

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कैसे हुआ पूरा घोटाला ?

सरकार का कानून है कि कोई भी विदेशी कंपनी कृषि भूमि को खरीद नहीं सकती. आइरियो (IREO) ग्रुप के ज्यादातर शेयर विदेशी कंपनियों के पास हैं. ऐसे में ललित गोयल ने निवेशकों से कहा कि वे स्थानीय रियल इस्टेट कंपनियों से जमीन खरीदेंगे. इसके बाद ललित गोयल ने कमांडर रियल्टर्स (Commander Realtors ) नाम की कंपनी बनाई. इस कंपनी के सौ फीसदी शियर ललित गोयल के पास हैं. कमांडर रियल्टर्स ने स्थानीय रियल इस्टेट कंपनियों से जमीन खरीदी तो जरुर, लेकिन जमीन आइरियो (IREO) ग्रुप को कभी ट्रांसफर नहीं की गईं. पूरे दस हजार करोड़ रुपये का इकलौता मालिक ललित गोयल बन बैठा.

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ललित गोयल ने अपनी सफाई में क्या कहा ?

ललित गोयल का कहना है कि आप जिस आइरियो (IREO) कंपनी की बात कर रहे हैं उसमें मेरी हिस्सेदारी महज 10 फीसदी के आसपास है. बाकि 90 फीसदी शेयरों के मालिक दीसरे लोग हैं. अगर कंपनी ने अपने निवेशकों के साथ कोई धोखा किया है तो इसकी जानकारी कंपनी के मेजर शेयर होल्डर्स को होगी.

एनडीटीवी से बात करते हुए राजनीतिक रसूख की बात पर ललित गोयल ने कहा कि क्या ये उनकी गलती है कि उनकी बहन की शादी किसी राजनीतिक परिवार में हुई है ?

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2010 में ललित गोयल पर इनकम टैक्स की रेड

इससे पहले 2010 में ललित गोयल पर इनकम टैक्स डिपार्टमेंट और इडी की रेड हुई थी. वो छापेमारी आइरियो (IREO) ग्रुप में गलत तरीके से निवेश करने के संबंध में थी. अब तक उस केस में क्या हुआ, इसकी जानकारी किसी को नहीं है.

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