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हर मोर्चे पर सरकार को घेरने वाले सुदेश महतो ने आखिर क्यों थामा फिर से बीजेपी का हाथ? 

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Ranchi :  झारखंड में राजनीति का रुख चाहे जो भी हो.आजसू की रणनीति बस सत्ता के इर्ध-गिर्द रहने की रही है. 2014 के बाद बनी सरकार के कार्यकाल में देखा गया है कि आजसू ने कई मोर्चों पर सरकार को घेरने की कोशिश की है.

आजसू को धरना-प्रदर्शन तक सरकार के खिलाफ करते देखा गया है. भले ही कैबिनेट में आजसू पार्टी का सदस्य हो, लेकिन कई नीतियों की आजसू ने निंदा की और सरकार को भला-बुरा भी कहा.

सरकार के कार्यकाल को देखते हुए कहा भी जाने लगा था कि बीजेपी और आजसू शायद साथ छोड़ दें. खुद सुदेश महतो ने गोमिया विधानसभा उप चुनाव के बाद बीजेपी के बारे कहा था कि “सरकार के पास बहुमत तो है, लेकिन जनमत नहीं”.

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ऐसे बयान देने के बाद अब अपनी जमीन खिसकती देख आजसू ने एक बार फिर से अपनी फितरत के मुताबाकि बीजेपी का हाथ थामा लिया है. गिरिडीह में एक सीट मिलने के बाद आजसू एनडीए फोल्डर में शामिल है. ऐसे में यह जानना जरूरी है कि सुदेश महतो ने बीजेपी को किन-किन मुद्दों पर घेरने की कोशिश की थी. 

स्थानीय नीति पर

रांची में 2 जून 2018 को मुख्यमंत्री को एक पत्र लिखा. पत्र में उन्होंने लिखा कि ज्वलंत मुद्दों पर गंभीरता से विचार किया जाये. स्थानीय/नियोजन नीति में ऐसा प्रावधान/संशोधन हो कि तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी की नियुक्तियों में शत प्रतिशत नियुक्ति वैसे लोगों की हो जिनका राज्य/जिला के अंदर अपने या पूर्वजों के नाम जमीन, बासगीत आदि का उल्लेख पिछले सर्वे रिकार्ड ऑफ राइटस में दर्ज हो.

2 दिसंबर 2018 को को हजारीबाग के बड़कागांव में आजसू के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा था कि जमीन को लेकर किसान भयभीत हैं. बड़कागांव, केरेडारी के किसान और खेतिहर मजदूरों की जमीन अधिग्रहण की नीति और नियम ताक पर रख कर ली जा रही है.

इस इलाके की बड़ी आबादी ने अपनी मेहनत और ताकत से खेती को जिंदगी का अहम हिस्सा बनाया, लेकिन पिछले कुछ सालों में तेजी से उनकी जमीनें हाथ से निकलती जा रही है.

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भूमि अधिग्रहण पर : बहुमत सरकार के साथ है, लेकिन जनमत नहीं

21 जुलाई 2018 को कहा था कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद सरकार की योजनाएं धरातल पर नहीं उतर पा रही हैं. उन्होंने कहा कि पार्टी विचार कर रही है. जल्द ही कोई ठोस निर्णय सबके सामने आ जायेगा.

आजसू सुप्रीमो ने उसी दौरान कहा था. वर्तमान में बहुमत सरकार के साथ है, लेकिन जनमत नहीं है. बहुमत के साथ-साथ जनमत को हासिल करने के लिए सरकार को आम लोगों की उम्मीदों पर खरा उतरना होगा. इसके साथ ही उन्होंने भूमि अधिग्रहण बिल को जल्दबाजी और बगैर विषयों की जानकारी का लिया गया निर्णय बताया था.

12 जुलाई 2018 को सुदेश महतो ने झारखंड के भूमि अधिग्रण बिल में संशोधन, स्थानीयता जैसे ज्वलंत मुद्दों पर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह से बात की थी. इस पर अमित शाह ने आश्वासन भी दिया था कि इन सभी मुद्दों पर झारखंड सरकार को निर्देशित किया जायेगा.

15 जून 2018 को आजसू पार्टी का भूमि अधिग्रहण संशोधन विधेयक को लेकर पहले और आज भी कड़ा विरोध किया था. उन्होंने कहा था कि झारखंड सरकार की भूमि अधिग्रहण नीति में संशोधन, झारखंड के जनभावनाओें के विपरीत उठाये गये कदम हैं. केंद्रीय कृषि मंत्रालय ने भी इस नीति को समर्थन नहीं किया था.

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स्कूलों के मर्जर पर :झारखंड की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी : सुदेश महतो

03 मई को सुदेश कुमार महतो ने स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के सचिव से रांची जिले के 363 स्कूलों के विलय को स्थगित रखते हुए मानकों का पुनर्मूल्यांकन करने का आग्रह किया था. इसके अलावा उन्होंने कहा था कि इससे वर्तमान में छात्रों की शिक्षा पर असर पड़ेगा.

10 अक्‍टूबर को आजसू पार्टी के केंद्रीय अध्यक्ष सुदेश कुमार महतो ने कहा था कि झारखंड की शिक्षा व्यवस्था बेपटरी नजर आती है. सरकार को बताना चाहिए कि इस हाल के लिए जिम्मेदान कौन है. शिक्षा व्यवस्था में सुधार के नाम पर किये जा रहे प्रयोग लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं. साथ ही कहा था कि मुख्यमंत्री ने कभी कहा था कि वे बोरा स्कूल में पढ़े हैं. इसलिए किसी स्कूल में बोरा नहीं रहने देंगे, लेकिन बच्चों को अब भी बेंच-डेस्क का इंतजार है.

24 सितंबर को चांडिल अनुमंडल स्थित जामडीह में उलगुलान फाउंडेशन के बैनर तले कार्यक्रम में राज्य सरकार पर निशाना साधा था और स्कूल विलय के निर्णय को सरासर गलत ठहराया था.

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सीएनटी-एसपीटी एक्‍ट पर:सीएनटी-एसपीटी एक्ट में संशोधन राज्य के अस्तित्व के लिए खतरा

आजसू पार्टी के सुप्रीमो सुदेश महतो ने कहा कि राज्य सरकार द्वारा सीएनटी-एसपीटी एक्ट में किया गया संशोधन राज्य के अस्तित्व के लिए खतरा है. हमने हर मंच, हर सभा, हर पटल पर संशोधन का विरोध किया है. विधेयक में संशोधन के खिलाफ हम किसी भी हद तक जा सकते हैं. उक्त बातें महतो ने कांके रोड में आजसू बुद्धिजीवी मंच के केंद्रीय कार्यकारिणी की बैठक में कही थी.

20 अगस्त 2016 को सरकार की सहयोगी पार्टी आजसू ने बड़े तल्ख अंदाज में सरकार को एक्ट में छेड़छाड़ नहीं करने की चेतावनी दी थी. सुदेश महतो ने कहा था कि पीएम ने दुमका में कहा था कि आदिवासियों की जमीन छिनने वाला कोई पैदा नहीं हुआ. सीएम ने भी शपथ लेने के बाद कहा था कि सीएनटी-एसपीटी में बदलाव नहीं होगा. इसके बाद भी संशोधन हो रहा है. इसे किसी भी हाल में बर्दाश्त नहीं किया जायेगा.

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