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ऐसी है झारखंड की विकास गाथा : केंद्र ने 14वें वित्त आयोग के पहले किस्त के 6.4 अरब दिये, राज्य ने जिलों को भेजे सिर्फ 1.21 अरब

लालफीताशाही का शिकार है झारखंड की पंचायती राज व्यवस्था, सिर्फ सात जिलों को ही मिली 14वें वित्त आयोग की राशि, सरकार का खजाना खाली होना माना जा रहा है अहम वजह

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Ranchi : किसी भी राज्य के विकास को मापने का पैमाना ग्रामीण क्षेत्रों में हो रहे विकास को माना जाता है. ग्रामीणों क्षेत्रों का विकास मूलत: पंचायत का विकास माना जाता है. लेकिन, पंचायतों को उनका हक मिले ही नहीं, तो आखिर कैसे विकास की गंगा बहे. 2018-19 के 14वें वित्त आयोग की राशि के पहले किस्त के तौर पर केंद्र के खजाने से करीब 6.4 अरब रुपये राज्य के खजाने में तो आ गये, लेकिन यह धनराशि जिलों तक नहीं पहुंच पायी. 24 जिलों में से सिर्फ सात जिलों को ही इस धनराशि का कुछ अंश मिल पाया है. बाकी के जिले अपने हिस्से की राशि की बाट जोह रहे हैं. पता नहीं उन्हें कब यह राशि मिले. जिलों तक राशि न पहुंचने की एक अहम वजह राज्य का खजाना खाली होना माना जा रहा है. उधर, यह राशि नहीं मिलने से पंचायतों का कामकाज ठप पड़ा है.

ऐसी है झारखंड की विकास गाथा : केंद्र ने 14वें वित्त आयोग के पहले किस्त के लिए दिये 6.4 अरब, राज्य ने जिलों को भेजे सिर्फ 1.21 अरब

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पंचायतों को पैसे दिये बिना ही केंद्र को पत्र भेज कहा- निर्गत कर दिये सारे पैसे

ग्राम स्वराज की प्राथमिकता रखनेवाली रघुवर सरकार की पंचायती राज व्यवस्था पूरी तरह लालफीताशाही का शिकार होती जा रही है. एक ओर पंचायतों को 14वें वित्त आयोग के वित्तीय वर्ष 2018 -19 की पंचायत की योजना के लिए प्रथम किस्त निर्गत करने का पत्र सरकार के संबंधित विभाग द्वारा जारी कर दिया जाता है, इसके बाद भी पंचायत को राशि नहीं मिल सकी है. पत्र में राज्य के कई आला अधिकारियों के हस्ताक्षर भी हैं. इनमें अवर सचिव राजीव रंजन, निदेशक सह विशेष सचिव, सरकार के सचिव शामिल हैं. पत्र की प्रति महालेखाकार झारखंड, योजना सह वित्त विभाग, अवर सचिव सह निकासी एवं व्ययन पदाधिकारी ग्रामीण विकास विभाग पंचायती राज, सभी जिला के उपविकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी, सभी प्रमंडलीय आयुक्त, उपायुक्त को भेजी गयी थी. पंचायतों को 14वें वित्त अयोग (2018-19) का प्रथम किस्त जारी कर दिये जाने संबंधी पत्र भारत सरकार के पंचायती राज मंत्रालय और वित्त मंत्रालय को भी भेज दिया गया था. इसके वबाजूद अभी तक जिला में भी राशि नहीं पहुंच सकी.

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ट्रेजरी से रिलीज नहीं हो पा रही राशि

राज्य के पास केंद्र सरकार के करीब 417 करोड़ रुपये पहले से ही पड़े हुए हैं. साथ ही पंचायतों के लिए 14वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राशि भी सरकार के पास है. अब यह राशि ट्रेजरी से रिलीज नहीं हो पा रही है. क्या सरकार ने इस राशि का उपयोग कहीं और कर दिया है, इस संबंध में भी कोई कहने को तैयार नहीं है. ऐसे में विकास कार्य के लिए पंचायतों को मिलनेवाली राशि, जो केंद्र द्वारा भेजी गयी है, वह पंचायत को नहीं मिल पा रही है. इस वजह से पंचायतों के गांवों का विकास कार्य पूरी तरह ठप हो गया है. बता दें कि यह राशि राज्य के सभी 24 जिलों की पंचायतों में विकास कार्य के लिए उपयोग में लायी जानी है, जिससे पंचायत को जलापूर्ति, सीवरेज एवं ठोस अपशिष्ट प्रबंधन, स्वच्छता, जल निकासी, समुदायिक परिसंपत्तियों के रखरखाव, सड़क, फुटपाथ एवं स्ट्रीट लाइट के रखरखाव, श्मशान-कब्रिस्तान के रखरखाव, राज्य सरकार द्वारा पंचायतों के लिए समय-समय पर निर्धारित आधारभूत कार्यों में खर्च करना है.

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दूसरे किस्त में 6.4 अरब दिसंबर-जनवरी में मिलने हैं केंद्र से, लेकिन अटक सकती है यह राशि

पहले किस्त में से अभी तक राज्य के केवल सात जिलों को ही राशि भेजी जा सकी है. शेष 17 जिलों में अभी तक राशि नहीं भेजी गयी है. वहीं, केंद्र से दूसरे किस्त की राशि दिसंबर-जनवरी में आनी है. ऐसे में अगर पहले किस्त की राशि का उपयोगिता प्रमाणपत्र राज्य सरकार केंद्र को नहीं भेजती है, तो दूसरे किस्त की राशि 6.4 अरब रुपये रिलीज नहीं हो पायेगी. इसका दुष्प्रभाव गांव के विकास पर पड़ेगा.

कब जारी किया गया था पंचायतों को राशि निर्गत करने का पत्र

पंचायती राज सचिव, झारखंड सरकार द्वारा 14 अगस्त 2018 को ही सभी जिलों को 14वें वित्त आयोग द्वारा 2018-19 का प्रथम किस्त की अनुशंसित राशि देने के लिए पत्र निर्गत गया था. प्रथम किस्त की राशि छह अरब चार करोड़ 12 लाख रुपये निर्गत किये जाने थे. इनमें से मात्र गोड्डा, चतरा, धनबाद, लातेहार, लोहरदगा, देवघर और खूंटी जिला को राशि मिली है. अन्य जिलों की राशि अब तक जिला में नहीं पहुंच सकी है.

क्या कहते हैं उपविकास आयुक्त सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी

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बोकारो के डीडीसी रवि रंजन कहते हैं कि 2018-19 में 14वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित पंचायत की विकास योजना की राशि बोकारो जिला को नहीं मिली है. वहीं, गिरीडीह के डीडीसी सह मुख्य कार्यपालक पदाधिकारी मुकुंद दास ने कहा कि 2018-19 में 14वें वित्त अयोग द्वारा अनुशंसित किसी भी तरह की राशि पंचायत के लिए जिला को प्राप्त नहीं हुई है. वहीं, चतरा के डीडीसी मुरली मनोहर प्रसाद कहते हैं कि पैसा तो आया है, लेकिन यह किस साल का है ध्यान नहीं, शायद पैसा आया है.

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क्या कहते हैं पंचायती राज सचिव प्रवीण टोप्पो

14वें वित्त आयोग की राशि सभी जिलों को निर्गत कर दी गयी है. जब उनसे पूछा गया कि मात्र 7 जिलों को ही राशि भेजी गयी है, तो उन्होंने कहा कि जिन जिलों को राशि निर्गत नहीं हुई है, उन्हें राशि निर्गत कर दी जायेगी, अभी वह प्रोसेस में है.

क्या कहते हैं झारखंड मुखिया संघ के अध्यक्ष विकास महतो

मुखिया संघ झारखंड प्रदेश द्वारा पत्र लिखकर मुख्यमंत्री, ग्रामीण विकास मंत्री पंचायती राज, मुख्य सचिव झारखंड सरकार से 14वें वित्त आयोग द्वारा 2018-19 के प्रथम किस्त की आवंटित राशि को भेजने का आग्रह किया गया है. विभाग द्वारा सभी जिलों को 14वें वित्त आयोग द्वारा अनुशंसित राशि देने के लिए सिर्फ पत्र निर्गत किया गया है. लेकिन, पत्र निर्गत करने के दो महीने बीत जाने के बाद भी पंचायतों को राशि नहीं मिली है. अभी तक 24 जिलों में से केवल सात जिलों को ही राशि दी गयी है. मुखिया संघ का कहना है कि सरकार की ओर से अगर 10 दिनों में राशि पंचायतों को नहीं मिलती है, तो वह आंदोलन के लिए विवश होगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी राज्य सरकार की होगी.

पंचायत और निकाय को अपने अधिकार प्राप्त करने के लिए करना पड़ रहा है संघर्ष

रघुवर सरकार द्वारा पंचायत की मजबूती के कार्य की 2016 में प्रशांस हुई थी. लेकिन, हाल के महीनों में सरकार द्वारा जिन 29 अधिकारों की परिकल्पना की गयी थी, उसका अनुपालन नहीं होने से राज्य के पंचायत प्रतिनिधियों में सरकार के प्रति आक्रोश भी बढ़ता जा रहा है. पंचायत के लिए चुनकर आये प्रतिनिधियों को पंचायत, निकायों को अधिकार प्राप्त करने के लिए काफी संघर्ष करना पड़ रहा है. वहीं, गांव के विकास के लिए सरकार द्वारा आदिवासी विकास समिति और ग्राम विकास समिति का गठन किये जाने से स्थिति और भी संघर्षमय हो गयी है.

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सरकार पंचायत को मजबूत करने की बात कहती है, पर मजबूती सिर्फ कागजों में

इसके बावजूद गांव की सरकार को सरकारी महकमा सहजता के साथ आत्मसात करता नहीं दिख रहा है. संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए वर्षों से पंचायती राज संस्थाओं को मजबूत करने की मांग को सूबे की सरकार ने स्वीकार तो कर लिया, लेकिन हालात जस के तस हैं. कहने को तीन स्तर की पंचायती राज संस्थाएं (ग्राम पंचायत, पंचायत समिति और जिला परिषद्) को अधिकार दे दिये गये हैं, लेकिन अब भी मामला फंड, फंक्शन और फंक्शनरीज में ही लटका है. न तो उन संस्थाओं के लिए मैन पावर को लेकर कोई दिशा-निर्देश है और न ही उनसे जुड़े कामों को लेकर कोई तस्वीर सा़फ की गयी है.

राज्य में कितने पंचायत प्रतिनिधि हैं

झारखंड राज्य के गठन के बाद दो पंचायत चुनाव हो चुके हैं. राज्य में 24 जिलों के 263 प्रखंडों में हुए चुनाव में 4402 ग्राम पंचायतों में मुखिया पद के लिए चुनाव हुए. इसके अतिरिक्त ग्राम पंचायतों के 54330 वार्ड सदस्यों, पंचायत समिति के 5423 व जिला परिषद के 545  सदस्यों के लिए चुनाव हुए. इस बार झारखंड में पंचायती राज चुनाव में 54 प्रतिशत महिलाएं चुनकर आयी हैं, जो आरक्षण सीमा से चार प्रतिशत ज्यादा थी.

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