Opinion

मजदूरों से ऐसी बेरूखी कि MP प्रशासन ने लिफ्ट देने को भी गैरकानूनी बताया

Girish Malviya

आप सोचते हैं कि राज्य सरकार कम से कम अपने राज्य प्रवासी मजदूरों को एक जगह से दूसरी जगह तो पुहंचा सकती है? आप सोचते हैं कि एक जिले के कलेक्टर को कम से कम इतना तो करना ही चाहिए कि वह अपने अधिकारियों को निर्देश दे कि यदि कोई खाली ट्रक हाइवे पर जा रहा हो तो उसे रोक कर हाईवे पर चल रहे मजदूरों को बैठा दे ताकि कम से कम जहां तक वो खाली ट्रक जा रहा हो वहां तक ये लोग पैदल चलने से बच जाएं.

माफ कीजिए आप गलत सोचते हैं, मध्यप्रदेश में परिवहन आयुक्त RTO ने सभी परिवहन अधिकारियों को यात्री वाहन और मालयानों की चेकिंग करने के निर्देश दिये हैं.

मधुकुमार ने कहा कि इससे प्रवासी मजदूरों के अवैध परिवहन एवं मोटरयान अधिनियम का उल्लंघन करने से कोरोना संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है. इसलिए इस पर रोक लगाने के लिए सभी वाहनों की चेकिंग जरूरी हो गयी है.

कोविड-19 महामारी के मद्देनजर आवश्यक वस्तुओं के निर्बाध परिवहन के लिए प्रदेश में किसी भी मालयान का रोकना निषेध किया गया था, परंतु कुछ मालयान चालकों/मालिकों द्वारा इस आदेश का दुरूपयोग कर एक राज्य से दूसरे राज्य के मध्य प्रवासी मजदूरों का अवैध परिवहन करने के साथ ही मजदूरों से किराया भी वसूल किया जा रहा है.

ठीक है मजदूरों से किराया लेना तो गलत है, लेकिन क्या ऐसी आपातकालीन परिस्थितियों में मानवीयता के आधार ट्रकों में खाली स्थान पर मजदूरों को बैठाने की ढील नहीं दी जा सकती. यही परिवहन आयुक्त RTO जब किसी मुख्यमंत्री की या प्रधानमंत्री की रैली होती है, तो सारी स्कूल बसों को अधिग्रहित कर लेते हैं.उस समय इनकी सक्रियता और नियम कायदों की उपेक्षा देखने लायक होती है. लेकिन कोरोना काल में देखिए इन्हें कैसे कानून कायदा सूझ रहा है.

डिस्क्लेमर : ये लेखक के निजी विचार हैं.

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