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पहली बार रिम्‍स में हुआ कॉर्निया का सफल ट्रांसप्‍लांट, कतार में हैं 2000 मरीज

स्‍वास्‍थ्‍य सचिव बोलीं- हर साल 250 मरीजों के कॉर्निया ट्रांसप्‍लाट का लक्ष्‍य हो

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Ranchi: रिम्‍स में पहली बार दो मरीजों की आंखों की कॉर्निया का सफल ट्रांसप्‍लांट किया गया है. शनिवार को इन मरीजों से मिलने स्वास्थ्य सचिव निधि खरे रिम्स पहुंचीं. इस मौके पर रिम्स के निदेशक डॉ आरके श्रीवास्तव ने बताया कि राज्य में 2000 मरीजों को तत्काल कॉर्निया ट्रांसप्लांट की जरूरत है. वहीं स्‍वास्‍थ्‍य सचिव निधि खरे ने कहा कहा कि साल में 250 मरीजों का कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने का लक्ष्य होना चाहिए.

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निशा और निर्मला का हुआ सफल कॉर्निया ट्रांसप्‍लांट

राजेंद्र इंस्टिट्यूट ऑफ साइंस (रिम्स) के नेत्र विभाग में दो लड़कियों 17 साल की निर्मला और 16 साल की निशा का पहली बार कॉर्निया ट्रांसप्लांट किया गया है. इन दोनों की आखें चोट लगने से खराब हो गई थी. गिरिडीह की एक महिला ने नेत्रदान किया था, उसके बाद ही निर्मला व निशा की आंखों को नई रोशनी मिली. डॉक्टरों की 2 टीम के द्वारा यह ऑपरेशन हुआ. जिसका नेतृत्‍व डॉ राहुल प्रसाद और डॉ सुनील ने किया. रिम्‍स पहुंची स्‍वास्‍थ्‍य सचिव कॉर्निया ट्रांसप्‍लांट के मरीजों से मिलकर उनकी सेहत की भी जानकारी ली. इस दौरान उन्होंने कहा कि यह हम सभी के लिए गर्व की बात है कि अब राज्य के लोगों को कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा.

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कॉर्निया ट्रांसप्‍लांट का लक्ष्‍य तय करने के लिए प्रोसेस ऑनलाइन हो

स्वास्थ्य सचिव ने निधि खरे ने सफल कॉर्निया ट्रांसप्लांट पर खुशी जाहिर करते हुए कहा कि यह रिम्स के लिए गर्व का विषय है, कि हमने सफलतापूर्वक कॉर्निया का ट्रांसप्लांट किया है. वहीं उन्होंने कहा कि कॉर्निया ट्रांसप्लांट से ज्यादा लोगों की आंखे ठीक करने का लक्ष्य होना चाहिए. उन्होंने कहा कि साल में 250 मरीजों का कॉर्निया ट्रांसप्लांट करने का लक्ष्य होना चाहिए. साथ ही उन्होंने कहा कि ट्रांसप्लांट विधि के रजिस्ट्रेशन को ऑनलाइन किया जाए. ताकि लोगों को सहूलियत हो. उन्होंने कहा कि इसके लिए लोगों को भी जागरुक होना होगा. ताकि, अधिक से अधिक लोग इससे निजात पा सकें और इस रंगबिरंगी दुनिया को अपनी आंखों से देख सकें. इसमें नेत्रदान करने के लिए भी लोगों को आगे आना होगा. तभी किसी का जीवन रंगीन हो सकेगा.

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कॉर्निया ट्रांसप्‍लांट के लिए नहीं जाना होगा मरीजों को बाहर

इसके लिए वर्तमान में लोग दिल्ली, मुंबई और कोलकाता के अलावा अन्य निजी अस्पतालों में मोटी रकम देकर ईलाज कराते हैं. रिम्स में इस सफल ऑपरेशन के बाद यहां के लोगों में उम्मीद जगी है, अब कॉर्निया ट्रांसप्लांट के लिए लोगों को दूसरे राज्यों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा.

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