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GSAT 7A सैटेलाइट की सफल लॉन्चिंगः वायुसेना की बढ़ेगी ताकत, संचार सेवा होगी मजबूत

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Shriharikota:  अंतरिक्ष की दुनिया में भारत को एक और कामयाबी मिली है. इसरो ने अपने बहुप्रतीक्षित उपग्रह जीसैट-7ए को बुधवार को निर्धारित समय शाम 4 बजकर 10 मिनट पर लॉन्च कर दिया. जीसैट-7ए इसरो का 35वां संचार सेटेलाइट है. इस सेटेलाइट से देश के संचार व्यवस्था को मजबूती मिलेगी. एक ओर जहां इंटरनेट स्पीड बढ़ेगी, वही दूसरी ओर वायु सेना को इससे ताकत मिलेगी.

2018 का इसरो का 17वां मिशन

यह ISRO का इस साल के दौरान 17वां मिशन है, और अब तक कुल मिलाकर श्रीहरिकोटा से यह 69वां रॉकेट लॉन्च है. इसरो के मुताबिक संचार सेटेलाइट जीसैट-7ए को उपग्रह प्रक्षेपण यान जीएसएलवी-एफ-11 के जरिए श्रीहरिकोटा सतीश धवन अंतरिक्ष केंद्र के दूसरे स्टेशन से लॉन्च किया गया है. 2,250 किलोग्राम वज़न वाला सैन्य संचार उपग्रह GSAT-7A जियोसिन्क्रोनस सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल मार्क III (GSLV Mk III) के ज़रिये लॉन्च किया गया. GSAT-7 और GSAT-6 के साथ मिलकर GSAT-7A संचार उपग्रहों का एक बैन्ड तैयार कर देगा, जो भारतीय सेना के काम आएगा.

इसरो (ISRO) की इस सफलता पर बोलते हुए अध्यक्ष डॉ के. सीवन ने एक टीवी चैनल को बताया कि, “यह अत्याधुनिक सैटेलाइट है, जिसे ज़रूरतों के हिसाब से बनाया गया है, और यह सबसे दूरदराज के इलाकों में भी हाथ मे पकड़े जाने वाले उपकरणों तथा उड़ते उपकरणों से भी संपर्क कर सकता है…”

वायुसेना की बढ़ेगी ताकत

इस सैटेलाइट की मदद से भारतीय वायुसेना को बड़ी ताकत मिलेगी. इस उपग्रह से ग्राउंड रडार स्टेशन, एयरबेस और AWACS एयरक्राफ्ट को इंटरलिंक करने में काफी मदद मिलेगी. यही नहीं एयरफोर्स के ग्लोबल ऑपरेशन को भी बड़ा पुश मिलेगा. ना सिर्फ एयरबेस इंटरलिंक बल्कि ड्रोन ऑपरेशन, मानवरहित एरियल व्हीकल (UAV) की ताकत बढ़ाने का काम भी जीसैट- 7ए करेगा. गौरतलब है कि इससे पहले भी इसरो नेवी के लिए रुकमणी लॉन्च कर चुका है.

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