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Success Story: जमशेदपुर के अंशुमन भगत ने झारखंड के प्रसिद्ध लेखकों की कतार में बनाई जगह, आप भी जान‍िए

Jamshedpur : जमशेदपुर शहर में जिस प्रकार कला के क्षेत्र में युवा तेजी से अपने पांव पसारते नजर आ रहे हैं वहीं साहित्य और लेखन के क्षेत्र में भी अपने नाम को ऊंचाइयों के शिखर तक पहुंचा रहे.  साथ ही साथ अपने शहर का नाम भी रोशन कर रहे हैं. लेखन के क्षेत्र में अंशुमन भगत तेजी से सुर्खियों में नजर आ रहे हैं. अब उनका नाम झारखंड के प्रसिद्ध लेखकों के श्रेणी में भी आ गया है. यह एक बड़ी उपलब्धि है जिससे जमशेदपुर के अन्य युवा में साहित्य एवं लेखन के क्षेत्र में रुझान बढ़ता दिख रहा है. हालांकि पहले से ही जमशेदपुर में कई प्रसिद्ध लेखक हुए हैं जिन्होंने लेखन में अपनी पहचान बनाई है और आज के युवा पीढ़ी में भी यह दिखाई दे रहा है.

अबतक चार पुस्‍तकें प्रकाश‍ित

झारखंड के जमशेदपुर शहर में अंशुमन का जन्म हुआ था. अंशुमन भगत साहित्य में अपने योगदान से लोगों के बीच पहचान बना रहे हैं. वर्ष 2018 में अंशुमन भगत की पहली पुस्तक “योर ओन थॉट” दिल्ली के इन्विंसिबल पब्लिशर द्वारा प्रकाशित की गई थी और अब तक चार पुस्तकें प्रकाशित हो चुकी हैं. हाल ही में ऑथर्स ट्री पब्लिशिंग हाउस द्वारा प्रकाशित भगत की चौथी किताब “एक सफर में” फिल्म जगत की आंतरिक सच्चाई, जीवन में ग्रंथों का महत्व तथा पाठकों को पूर्ण रूप से जीवन के वास्तविकता से परिचित कराने की कोशिश की गई है.

Sanjeevani

एक्टिंग में सफलता नहीं मिली तो राइटिंग में बनाया कर‍ियर
फिल्मी दुनिया की चकाचौंध से हर कोई वाकिफ होना चाहता है किंतु जब अपने सपनों को सच करने की बात सामने आती है तो कई मुश्किलें सामने खड़ी हो जाती है. लेकिन सच्ची निष्ठा और लगन हो तो बड़ी से बड़ी मुसीबत को भी हम दरक‍िनार कर आगे निकल जाते हैं. इसी उम्मीद में अंशुमन भगत अभिनेता बनने के लिए जमशेदपुर से मुंबई गए थे. लेकिन कहते हैं ना कि कुछ चीजें दूर से कुछ और दिखाई देती हैं और करीब आने के बाद कुछ और. वैसे मुंबई से लोग केवल अभिनेता बनकर बाहर नहीं निकलते बल्कि डायरेक्टर, राइटर, संगीतकार और न जाने कितने कला उभर कर सामने आते हैं. और आज अंशुमन भगत एक लेखक के रूप में जाने जाते हैं.

लेखन साहित्य और संस्कृति से जोड़े रखने में अहम भूमिका निभाती है

बचपन से ही अंशुमन भगत को लिखने का शौक था किंतु सही मायने में मुंबई आने के बाद ही उनकी लेखन में दिलचस्पी बढ़ गई और मौका मिलने पर अंशुमन कभी-कभी अपने मोबाइल या डायरी में अपने खुद के दिमाग में चल रहे कुछ विचारों को लिख लिया करते थे. अंशुमन भगत का कहना है कि जो बातें हम किसी से कह कर नहीं बता सकते तो वैसे मैं लेखनी के माध्यम से अपनी बातों को किताब का रूप देकर लोगों तक अपनी बातों को पहुंचने में सक्षम हो सकते हैं. लेखन हमें साहित्य के साथ-साथ हमारी संस्कृति तथा धरोहर से जोड़े रखने में बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. यही वजह है कि उनकी लेखन में रुचि दिन प्रति दिन बढ़ती गई और अब तक चार किताबें लिख चुके हैं. यह चारों किताब अमेजन पर बेस्टसेलिंग सेलिंग के श्रेणी में आ चुकी है. फिलहाल अंशुमन भगत अपनी पांचवीं पुस्तक पर कार्य कर रहे हैं जो राजनीतिक पर आधारित है.
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