न्यूज़ विंग
कल का इंतज़ार क्यों, आज की खबर अभी पढ़ें

कठौतिया कोल ब्लॉक की जमीन खरीद की हेराफेरी में फंसे तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी सुधीर कुमार

अब सुधीर कुमार के खिलाफ चलेगी विभागीय कार्यवाही, उषा मार्टिन को आवंटित किया गया था कठौतिया कोल ब्लॉक

651

Ranchi: कठौतिया कोल ब्लॉक के मामले में पलामू के तत्कालीन अनुमंडल पदाधिकारी सुधीर कुमार दास फंस गये हैं. अब उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही चलेगी. श्री दास पर कठौतिया कोल ब्लॉक के लिये जमीन खरीदारी प्रक्रिया में व्यापक हेराफेरी का आरोप है. साथ ही सरकारी राजस्व का नुकसान पहुंचाने का भी आरोप है. इस संबंध में पलामू डीसी द्वारा गठित प्रपत्र क भी सरकार को सौंप दिया गया है. प्रथम दृष्टया आरोप प्रमाणित पाया गया है. इस पूरे मामले की जांच के लिये सेवानिवृत्त आइएएस विनोद चंद्र झा को जांच पदाधिकारी बनाया गया है. कार्मिक ने इसका आदेश सात जनवरी को जारी कर दिया है. कठौतिया कोल ब्लॉक उषा मार्टिन को आवंटित किया गया था.

कैसे हुआ था कठौतिया कोल ब्लॉक में घोटाला

किसी भी निजी कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित हो उसके लिए दो फेज में क्लियरेंस लिया जाता है. पहले फेज में माइनिंग विभाग और वन विभाग की तरफ से क्लियरेंस लिया जाता है, जो कि राज्य सरकार के स्तर से हो जाता है. दूसरे फेज में भारत सरकार को ये क्लियरेंस रिपोर्ट भेजी जाती है. भारत सरकार यदि क्लियरेंस से संतुष्ट होती है, तो माइनिंग करने की अनुमति देती है. कठौतिया कोल ब्लॉक मामले में दूसरे फेज की क्लियरेंस के लिए पलामू प्रशासन की तरफ से भारत सरकार को भेजा ही नहीं गया. ब्लॉक से उस जमीन का नक्शा ही गायब करवा दिया गया, जहां माइनिंग के लिए अनुमति दी गयी थी. सारे नियमों को ताक पर रखते हुए निजी कंपनी को कोल ब्लॉक आवंटित कर दिया गया.

तत्कालीन कमिश्नर ने जांच में पायी थी गड़बड़ी

इस मामले की जांच कमिश्नर स्तर से करायी गयी. रिटायर्ड आइएएस और तत्कालीन पलामू कमिश्नर एनके मिश्रा ने मामले की जांच की. उन्होंने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि डीसी ने गलत तरीके से कोल ब्लॉक का आवंटन किया है, जिससे सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व की क्षति हुई है. रिपोर्ट में कहा गया कि कोल ब्लॉक का आवंटन सरकार के कहने पर कमिश्नर स्तर के अधिकारी की तरफ से किया जाना चाहिए. जिस वक्त उषा मार्टिन को कठौतिया कोल ब्लॉक आवंटित किया गया था पलामू की डीसी पूजा सिंघल थीं. मामले को लेकर एसीबी जांच की बात भी हुई थी. लेकिन अभी तक एसीबी जांच शुरू नहीं हो पायी है.

इसे भी पढ़ें – तकनीकी कमियों के कारण फिर रुका हरमू प्लाइओवर निर्माण कार्य, मेकॉन फिर बनाएगा नया डीपीआर

हमें सपोर्ट करें, ताकि हम करते रहें स्वतंत्र और जनपक्षधर पत्रकारिता...

%d bloggers like this: