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पेसा एक्ट में विसंगतियां : विधानसभा की उपसमिति ने अध्यक्ष को सौंपी थी रिपोर्ट,  दो साल बीत गये, नहीं हुई कार्रवाई

विधायक दीपक बिरूआ की अध्यक्षता में समिति ने की थी जांच, राज्य में पाया था पेसा कानून में विसंगतियां

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Chhaya

Ranchi: पेसा एक्ट 1996 को लागू कराने के लिए राज्य गठन के बाद से ही आदिवासी संगठन प्रयासरत हैं. लेकिन अब तक जितनी भी सरकारें बनीं किसी ने भी पेसा एक्ट को राज्य में सही तरीके से लागू करने का प्रयास नहीं किया. इस संबध में हर साल की तरह 2015-16 में विधानसभा में जिला परिषद् एवं पंचायती राज समिति का गठन हुआ. जिसके अध्यक्ष चाईबासा विधायक दीपक बिरूआ थे. इनकी समिति ने राज्य में पेसा एक्ट की विसंगतियों और राज्य में इस कानून के पूरी भावना से लागू करने पर एक रिपोर्ट तैयार की. जिसे 23.3.2016 को विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरांव को सौंपा गया. लेकिन अभी तक इस रिपोर्ट पर अध्यक्ष दिनेश उरांव ने कोई कार्रवाई नहीं की.

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क्या है रिपोर्ट में

विधायक दीपक बिरूआ ने अनुशंसा रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि पेसा एक्ट का राज्य में सही से क्रियान्वयन नहीं किया जा रहा है. और न ही इसे राज्य में लागू करने के लिए कोई स्पष्ट नियम कानून है. पेसा के प्रावधानों का जिक्र करते हुए समिति ने लिखा है कि जिला स्तर पर स्वाशासी परिषद् एवं निचले स्तर पर ग्राम सभा की व्यवस्था को स्वाययता प्रदान की जाएं. रिपोर्ट में लिखा गया है कि झारखंड पंचायती राज अधिनियम 2001 में अनुसूचित क्षेत्रों के लिए रखी गई प्रशासनिक संरचना पेसा एक्ट 1996 के संगत प्रतीत नहीं होती.

अनुसूचित क्षेत्रों पर छठी अनुसूची के अनुसार हो प्रशासनिक ढांचा

इस रिपोर्ट में कहा गया है कि राष्ट्रपति की ओर से 2007 से निर्गत अधिसूचना के अनुसार झारखंड के 12 जिले, 3 प्रखंड और 2 पंचायत को अनुसूचित क्षेत्र घोषित किया गया है. ऐसे में इन स्थानों में पेसा एक्ट 1996 के प्रवाधान के अनुसार प्रशासनिक ढांचा छठी अनुसूची के अनुकूल होगी.

हाइकोर्ट के आदेश की अवमानना से जुड़ा है मामला  

जांच रिपोर्ट में लिखा है कि हाईकोर्ट का निर्णय राज्य में पेसा एक्ट संगत है,  इसका समिति सम्मान करती है. लेकिन इस संदर्भ में समिति ने पाया कि पेसा एक्ट 1996 की धारा 4 ओ के तहत अनुसूचित क्षेत्रों की प्रशासनिक ढांचा छठीं अनुसूची के अनुकूल करने की बात कही गयी है. लेकिन इस पर सरकार ने ध्यान नहीं दिया है. पेसा कानून भूरिया कमेटी की अनुशंसा पर आधारित है. भूरिया कमेटी ने पाचवीं अनुसूची को और शक्ति प्रदान करने के लिए प्रशासनिक ढांचे को छठी अनुसूची की तरह करने की बात कही है.

सुप्रीम कोर्ट के आदेश की हो रही अनदेखी

इस संबध में विधायक दीपक बिरूआ ने कहा कि 2015-16 में मेरी अध्यक्षता में समिति ने पेसा एक्ट को लेकर सख्त रिपोर्ट अध्यक्ष दिनेश उरांव को सौंपी. दो साल बाद बीत गए लेकिन अभी तक अध्यक्ष ने इस पर कार्रवाई कर सरकार के पास इसे नहीं भेजा. जबकि कुछ दिनों पूर्व सुप्रीम कोर्ट ने भी आदेश सुनाया है कि विधानसभा की किसी भी समिति की ओर से अगर कोई अनुशंसा रिपोर्ट सौंपी जाती है तो जल्द से जल्द इस पर कार्रवाई की जाये. लेकिन अब तक इस पर कोई कार्रवाई नहीं कि गयी.

क्या कहते है अध्यक्ष

इस संबध में जब विधानसभा अध्यक्ष दिनेश उरावं से जानकारी ली गई तो उन्होंने कहा कि इस संबध में कोई जानकारी नहीं है. कोई रिपोर्ट नहीं सौंपी गयी है. ऑफिस में नहीं हैं कि जानकारी दे.

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ये लोग थे समिति शामिल

उक्त समिति में विधायक जय प्रकाश सिंह भोक्ता और जानकी प्रसाद यादव भी सदस्य थे. इसके साथ प्रशासनिक सेवा के आइएएस विनय कुमार सिंह, राम निवास दास, महेश नारायण, अनवर अंसारी और दिनेश कुमार थे.

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