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प्रोफेसर साहब के पद और ओहदे के चक्कर में पिस रहे विद्यार्थी, छात्र करते रहते हैं इंतजार

Ranchi: डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में प्रोफेसर और रीडर साहबों द्वारा पद और ओहदे के लिये जोड़-तोड़ हो रहा है. कौन आगे निकलेगा बस इसी का ताना-बाना बुनने में ही प्रोफेसर और रीडर व्यस्त हैं. सभी अपनी पहुंच और पैरवी के हिसाब से आगे निकलने की कोशिश में हैं. प्रोफेसर साहब की इस बाजीगरी में विद्यार्थी पीस रहे हैं. कॉलेज में पढ़ाई नहीं हो रही है. ऐसे में सिलेबस पूरा नहीं होने का भी खतरा मंडरा रहा है.

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क्लास लेने नहीं पहुंचते प्रोफेसर

विश्वविद्यालय के शिक्षक अनेक पदों पर काम रहे हैं. इसकी वजह से वे छात्रों की कक्षा नहीं ले रहे हैं. छात्र विश्वविद्यालय में पढ़ने तो आ रहे हैं, लेकिन प्रोफेसर के क्लास में नहीं होने से पढ़ाई नहीं हो रही हैं. इसको लेकर छात्रों ने पिछले दिनों कुलपति से शिकायत भी की थी. दरअसल रजिस्ट्रार, डीएसडब्लू, परीक्षा नियंत्रक, एफओ एवं सीयूडीसी पद पर जिन प्रोफेसरों का चयन विश्वविद्यालय द्वारा किया गया, इन अधिकारियों के पास अधिकारिक पद के साथ-साथ कई विभागों की जिम्मेदारी भी है.

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किन अधिकारियों के पास क्या अतरिक्त पदभार

डीएसडब्लू नमिता सिंह के पास एचओडी भौतकी विज्ञान, विमेंश सेल, प्लेसमेंट सेल, कॉर्डिनेटर सीएआइटी का अतिरिक्त पदभार है. इसकी वजह से वो भौतिकी विभाग में पूरे सप्ताह दो से तीन घंटे की ही क्लास ले पाती हैं.

रजिस्ट्रार डॉ एनडी गोस्वामी के पास कॉर्डिनेटर बीबीए और एमसीएस का अतिरिक्त पद्भार है. इस वजह से वो भी अपनी कक्षाओं में कम ही दिखते हैं.

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परीक्षा नियंत्रक अशोक महतो के पास विभागाध्यक्ष गणित, कॉर्डिनेटर एमएसी आइटी, कॉर्डिनेटर एमसीए और टेबूलेटर का अतिरिक्त पद्भार है. इसके वजह से वे अपने विभाग गणित में छात्रों को कम समय दे पाते हैं.

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एफओ डॉ एनएन ओझा के पास कॉर्डिनेटर इलेक्ट्रॉनिक्स विभाग का अतिरिक्त पद है. इसके कारण वे अपने विभाग के छात्रों को समय नहीं दे पाते हैं. विश्वविद्यालय के वित्त संबंधित फाइलों में उलझे रहते हैं.

सीयूडीसी डॉ मो अयूब के पास एचओडी उर्दू विभाग का अतिरिक्त पद है, उर्दू विभाग में मो अयूब के अलावे एक ही शिक्षक इसके वजह से उर्दू विभाग के छात्रों की कक्षाएं सुचारू रूप से नहीं हो पाती है.

नियमों की अनदेखी कर दिया गया अधिकारियों को पद्भार

यूजीसी के नियमों की अनदेखी कर डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय में अधिकारियों को पद प्रदान किया गया. यूजीसी के अनुसार, डीएसडब्लू, रजिस्ट्रार, परीक्षा नियंत्रक, एफओ और सीयूडीसी पद काबिज अधिकारियों को विभाग से लीलीन ग्रांट लेना होता है. उसके बाद ही वो अधिकारी पद पर योग्यदान दे सकते हैं. जबकि एसपीएमयू में ये अधिकारी अपने पद के साथ कई विभागों की जिम्मेवारी लिए हुए हैं.

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क्या कहते हैं कुलपति प्रो एसएन मुंडा

डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय के कुलपति ने कहा कि मामला संज्ञान में आया है. जल्द ही इस दिशा में विश्वविद्यालय के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श कर अधिकारियों को अतरिक्त पदभार से मुक्त किया जायेगा. विश्वविद्यालय में शिक्षकों की कमी के कारण ऐसी स्थिति है. आनेवाले दिनों में सारी समस्याओं का समाधान कर लिया जायेगा.

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