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छात्रसंघ चुनाव में छात्र संगठनों को नहीं मिल रही महिला प्रत्याशी

चुनाव लड़ने में दिलचस्पी नहीं ले रही हैं छात्राएं

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Ranchi : रांची विश्वविद्यालय (आरयू) एवं डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (एसपीएमयू) में छात्रसंघ चुनाव की घोषणा होते ही विश्वविद्यालय कैंपस में चुनाव को लेकर चहल-पहल तेज हो गयी है. छात्रसंघ चुनाव को लेकर छात्रसंघ अभी से रणनीति बनाने में जुट गये हैं. छात्र संगठनों ने उम्मीदवारों की चयन प्रक्रिया भी शुरू कर दी है. लेकिन, इस बीच छात्र संगठनों को सबसे ज्यादा समस्या महिला प्रत्याशी खोजने में आ रही है. इसका कारण है कि इस बार छात्रसंघ चुनाव में छात्राएं प्रत्याशी के रूप में कम ही सहभागिता निभाना चाहती हैं. कैंपस में छात्राएं उम्मीदवार के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज नहीं करा रही हैं. इसका मुख्य कारण है कि फाइनल परीक्षा छात्रसंघ चुनाव के बाद होनेवाली है.

विभागों, कॉलेजों में कैंप लगाकर महिला उम्मीदवारों को ढूंढ रहे छात्र संगठन

आजसू, एनएसयूआई, जेसीएम, जेवीसीएम जैसे छात्र संगठनों ने चुनाव की तिथि की घोषणा के बाद कॉलेज एवं विश्वविद्यालय स्तर पर अपने उम्मीदवारों की घोषणा आरंभ कर दी है. लेकिन, इन छात्र संगठनों के उम्मीदवारों की लिस्ट से महिला उम्मीदवार गायब हैं. उम्मीदवारों के चयन के लिए छात्र संगठन इन दिनों सभी विभागों एवं कॉलेजों में कैंप कर रहे हैं, ताकि उन्हें महिला उम्मीदवार मिल सकें.

कटहल पेड़ के पास लग रहा छात्र संगठनों का अड्डा

मोरहाबादी स्थित आरयू कैंपस के कटहल पेड़ के पास एवं मुंशी जी चाय दुकान पर इन दिनों छात्र संगठनों के नेताओं का जमावड़ा पूरे दिन लगा रहता है. कटहल पेड़ के पास छात्र संगठन प्रत्याशियों की खोज में जमावड़ा लगाये रहते हैं. वहीं, पेड़ के नीचे छात्र संगठनों द्वारा चुनाव की रणनीति पर पूरे दिन चर्चा होती रहती है. सबसे कमाल की बात है कि चुनाव की घोषणा होते ही छात्र संगठन कैंपस के अच्छे छात्रों को अपनी ओर रिझाने में लगे हैं, ताकि इनके माध्यम से उन्हें अच्छे उम्मीदवार मिल सकें. छात्र संगठनों के पास छात्र उम्मीवार के रूप में इनके संर्पक में हैं, लेकिन छात्राओं ने इस बार चुनाव प्रक्रिया में उम्मीदवार के रूप अभी तक दिलचस्पी नहीं दिखायी है. न्यूज विंग से बातचीत के क्रम में कई विभागों की छात्राओं ने कहा कि चुनाव एवं परीक्षा की तिथियों में ज्याद अंतर नहीं होने के कारण वे उम्मीवार के रूप में नहीं खड़ा होना चाहती हैं. इसके कारण उनकी परीक्षा पर असर पड़ सकता है. छात्राओं का कहना है कि चुनाव प्रक्रिया के दौरान बेहतर उम्मीदवार को अपना वोट वे जरूर देंगी, लेकिन उम्मीवार बनने के मूड में हैं.

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