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सरकारी डिप्लोमा कॉलेजों के छात्रों को सरकार के इस फैसले से होगा नुकसान

Ranchi: पिछले कैबिनेट के निर्णय में एक यह भी था कि डिप्लोमा को डिग्री परीक्षा आयोजित नहीं की जायेगी. यह परीक्षा राज्य के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में तीसरे सेमेस्टर में दाखिले के लिए ली जाती थी. कोरोना के कारण यह परीक्षा आयोजित नहीं की जा सकेगी. नामांकन मार्क्स के आधार पर होगा.

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सरकार के इस निर्णय से राज्य के सरकारी डिप्लोमा कॉलेजों के छात्रों को नुकसान होगा और सीधा फायदा राज्य के प्राइवेट कॉलेजों से डिप्लोमा करने वाले छात्रों को होगा. सरकारी डिप्लोमा कॉलेजों के छात्रों का कहना है कि प्राइवेट कॉलेजों के छात्रों को अधिक मॉर्क्स दिये गये हैं.

सरकारी सभी कॉलेजों के छात्रों के मार्क्स प्राइवेट की तुलना में कम हैं. ऐसे में अगर मार्क्स के आधार पर नामांकन कराया जायेगा तो सरकारी कॉलेजों के अधिकतर सीटों पर प्राइवेट कॉलेजों के छात्रों का ही कब्जा हो जायेगा. अधिकतर छात्र बीआइटी सिंदरी की सीटों को ध्यान में रखकर तैयारी करते हैं जहां डीटूडी के लिये सभी ब्रांच में दस सीटें रखी जाती हैं.

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जब फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा हो सकती है तो फिर डीटूडी परीक्षा क्यों नहीं

छात्रों का कहना है कि जब फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा आयोजित हो सकती है तो फिर डीटूडी परीक्षा क्यों नहीं ली जा सकती है. छात्रों ने बताया कि जितने छात्र फाइनल सेमेस्टर की परीक्षा में शामिल हुए थे, उतने ही या उससे भी कम छात्र डीटूडी परीक्षा में भाग लेते हैं, ऐसे में परीक्षा नहीं होने से हम सरकारी कॉलेजों के छात्रों को सिर्फ और सिर्फ नुकसान होगा.

एक साल तक सिर्फ डीटूडी परीक्षा की तैयारी करते हैं छात्र

रांची में दो सरकारी डिप्लोमा कॉलेज हैं. पहला गर्वमेंट पॉलिटेक्निक रांची और महिला गर्वमेंट पॉलिटेक्निक कॉलेज रांची. ये दोनों कॉलेज डिप्लोमा इंट्रेंस परीक्षा के टॉप रेंकर्स को अलॉट किये जाते हैं. अधिकतर मौकों में जिन छात्रों को सरकारी कॉलेज में दाखिला नहीं मिल पाता वैसे छात्र प्राइवेट की तरफ रुख करते हैं. कई अपनी च्वाइस से भी प्राइवेट में दाखिला लेते हैं.

दोनों सरकारी कॉलेजों के छात्रों ने कहा कि हमारे टॉपर्स के मार्क्स 82 प्रतिशत से अधिक नहीं हैं, पर प्राइवेट कॉलेजों के अधिकतर छात्रों के मार्क्स 85 प्रतिशत से अधिक हैं. ऐसे में हम पिछड जाएंगे. छात्रों ने बताया कि परीक्षा नहीं होने से हमारी एक साल की मेहनत बर्बाद हो जाएगी. हमें सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में दाखिला नहीं मिल पाएगा.

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