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छात्रसंघ चुनाव : सभी प्रत्‍याशी छात्रों को रिझाने में जुटे

कैंपस में छात्रों पर चढ़ाछात्र संघ चुनाव क्रेज, कोई नहीं है टक्कर में क्यों पड़े हो चक्कर से गुंजा पूरा कैंपस

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Ranchi : मोराहबादी मैदान स्थित रांची विश्वविद्यालय (आरयू) और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विश्वविद्यालय (एसपीएमयू) के कैंपस में छात्रों पर चुनावी बुखार पूरी तरह से चढ़ गया है. कैंपस में अपनी जीत सुनिश्चित कराने के लिए छात्रसंगठन कड़ी मेहनत कर रहे हैं. चुनावी महौल में आरयू कैंपस पूरी तरह से जेएनयू फेल्वर में पर इन दिनों चल रहा है, प्रत्याशी नियमित समय से कैंपस पहुंच कर छात्रों को अपनी रिझाने में जुट जा रहे हैं. जेसीएम की अध्यक्ष पद की उम्मीदवार सोनम राज उरांव पीजी स्तर की पढ़ाई दिल्ली यूनिवर्सिटी से की हैं. उन्होंन बताया कि बतौर प्रत्याशी उन्हें आरयू कैंपस में कैंपेनिंग (चुनाव प्रचार) करने में डीयू से ज्यादा आनंद आ रहा है.

न्यूज विंग से बातचीत के क्रम में उन्होंने कहा कि झारखंड के छात्रों में राजनीतिक चिंतन शक्ति काफी ज्यादा है. कैंपस के छात्रों में जबरदस्त राजनीतिक समझ है. संवाद के दौरान यह समझ आ जाता है. संयुक्त सचिव की प्रत्याशी चीनड्रला टोपनो ने कहा कि उनकी पूरी पढ़ाई दिल्ली में हुई है, शोधार्थी छात्र होने के नाते उन्होंने चुनाव प्रक्रिया में हिस्सा लिया है. वे इस चुनाव के माध्यम से झारखंड की राजनीति में अपनी पकड़ बनना चाहती हैं, ताकि सक्रिया राजनीति में महिलाओं को सहभगिता बढ़ सके.

युवा अपने अधिकारों को लेकर गंभीर

उपसचिव के पद की प्रत्याशी स्वेता तिवारी कैंपस में चुनावी महौल से काफी उत्साहित दिखीं. उन्होंने बताया कि छात्रसंघ चुनाव के माध्यम से कैंपस के सभी छात्रों को जानने एवं समझने का अवसर मिला है. झारखंड के युवा अपने अधिकारों को लेकर इतने गंभीर है कि चुनाव के दौरान चर्चा में सभी हिस्सा ले रहे हैं. विश्वविद्यालय को सुचारू रूप से चलाने के लिए अपनी सलाह भी दे रहे हैं. कुल मिलाकर विश्वविद्यालय कैंपस में छात्रसंघ चुनाव का बुखार छात्रों पर सर चढ़कर बोल रहा है. छात्रों स्वतंत्र एवं छात्र संगठन के बैनर तले चुनावी प्रक्रिया में हिस्सा ले रहे हैं.

आजसू, एवीबीपी, एनएसयूआइ, जेसीएम, जेसीएस, एसीएस जैसे छात्र संगठन छात्रसंघ के चुनावी महौल में एक ही स्लोगन के साथ अपने-अपने प्रत्याशियों के पक्ष में वोट मांग रहे हैं. मुद्दा सभी छात्र संगठन के अलग-अलग हैं, लेकिन छात्रों से संवाद एवं भीड़ जुड़ाने के लिए सभी एक ही स्लोगन को प्रयोग कर नारे लगा रहे हैं, “कोई नहीं है टक्कर में क्यों पड़ हो चक्कर में”. इतना नारा लगाते ही सभी प्रत्याशी छात्रों को अपनी ओर रिझाने में जुट जा रहे हैं.

ACS ने सभी सीटों पर SC,ST प्रत्याशियों को मैदान में उतारा

आदिवासी मूलवासी छात्रसंघ ने आरयू विवि और डॉ श्यामा प्रसाद मुखर्जी विवि के सभी सीटों पर प्रत्याशी के रूप में एसी एवं एसटी छात्रों को प्रत्याशी के रूप में चुनावी मैदान में उतारा है. एसीएस के संजय महली ने कहा कि आदिवासी एवं मूलवासी के अधिकारों की बात एसीएस करती है. इसलिए एसीएस ने सभी 85 सीटों पर आदिवासी एवं दलित छात्रों को चुनावी मैदान में उतारा है, ताकि एससी,एसटी छात्रों में राजनीतिक विकास का संचार किया जा सके. वहीं संगठन के द्वारिका दास ने कहा कि जीत या हार छात्रसंघ चुनाव में लगा रहता है. एसीएस जीत एवं हार के लिए चुनावी मैदान में नहीं कूद रही है. बल्कि आदिवासी और दलित समाज के छात्रों को मंच प्रदान करने की पहल पर जोर दे रही है. ताकि इस मंच के माध्यम से झारखंड में मूलवासी को स्थापित कर सकें.

राजनीतिक दलों के विरोध में स्वतंत्र छात्र संगठन ने उतारे प्रत्याशी

आरयू और एसपीएमयू कैंपस में छात्रों के बीच राजनीतिक दलों के प्रभावों को देखते हुए कैंपस में स्वतंत्र छात्र संगठन ने अपने प्रत्याशी चुनावी मैदान में उतारे हैं. संगठन के रिंकू शाही का कहना है कि कैंपस में ज्यात्तर प्रत्याशी किसी न किसी राजनीतिक दल की आंड में छात्रसंघ चुनाव लड़ रहे हैं. ऐसे में उनकी संगठन इसका विरोध करते हुए अपने प्रत्याशी को मैदान में उतार रही है. ताकि कैंपस में राजनीतिक दलों के प्रभाव को कम किया जा सके.

 

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