Opinion

अरब-इजरायल के मजबूत संबंध अब खुल कर सामने आ गये हैं

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Hasan Jamal Zaidi

दुनिया के बदलते निजाम में मिडिल ईस्ट में ही सबसे पहले उथल-पुथल मचनी थी. और यहीं से ब्लाक सेट होने हैं. और लठ्ठ बजने की शुरुआत भी यही से होनी है. जैसे की उम्मीद थी बिल्कुल वही हो रहा है. अरब-इजराइल के मजबूत संबंध अब खुलकर सामने आ रहे हैं. कुछ लोग थोड़े हैरान हैं. उन्हें लग रहा है कि ऐसा कैसे हो सकता है ? लेकिन सत्ता चीज ही ऐसी है. इसके आगे बाकी चीजें महत्व नहीं रखती. जब-जब मजहबी या धार्मिक जुनून में होकर चीजों को देखेंगे, धोखा ही खाएंगे.

UAE ने इजराइल को आज मान्यता दे दी. उन्होंने अपने हित देखें. और उसके हिसाब से सही फैसला किया. कुछ समय बाद अपनी पब्लिक का माइंड सेट करने के बाद मोहम्मद बिन सलमान भी ऐसा ही करेंगे.

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वैसे देखा जाए तो इजराइल से पंगा भी क्या है उनका ? ठीक है फिलिस्तीनियों के इश्यू है या बैतुल मुकद्दस का मैटर है, तो इसके लिए वो अपनी कुर्सी को तो खतरे में नहीं डाल सकते ?

अरब पूरी तरह अमेरिकी शिकंजे में है. और वो उससे बाहर नहीं आ सकते. ये बात अच्छी तरह समझ लेनी चाहिए. उनका पैसा, इनवेस्टमेंट, डिफेंस और उनके खिलाफ सबूत सब अमेरिका के पास है.

ट्रंप ने इलेक्शन से पहले ही इतना सेट कर दिया है. नवंबर में अमेरिका में इलेक्शन है. डेमोक्रेट से ट्रंप का मुकाबला है. वहां का इलेक्शन का सिस्टम ऐसा है कि उसे समझना उस पर टाइम खोटी करना है.

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हिलेरी ने ट्रंप से कहीं ज्यादा वोट लाए, लेकिन वो जाने कहां के थोड़े से इलेक्ट्रोरल वोट उतने नहीं ले पाई इसलिए हार गयी. वहां हमेशा ऐसा ही होता है कि जो पूरे अमेरिका में जीत रहा होता है और पता चलता है कि वो फ्लोरिडा के 23 वोट नहीं ले पाया इसलिए हार गया. और ये जीत गये. अजीब मजाक है ?

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इसलिए मुझे तो लगता है कि ट्रंप ही जीतेंगे. और जीतना भी चाहिए. डेमोक्रेट के जो बाइडन हैं, वह लुक वाइज भी कुछ खास नहीं लग रहे और शायद उनका हेल्थ इश्यू भी है. वहां गोरे ही डिसाइड करते हैं.
तस्वीर बिल्कुल क्लियर है. सऊदी, यूएई, इजरायल, मिश्र ये अमेरिका वाले ब्लॉक में ही रहेंगे. बाकी ईरान, टर्की, कतर, रुस, चीन, पाकिस्तान दूसरे ब्लॉक में रहेंगे.

आज अगर पाकिस्तान को सऊदी अरब और चीन में से किसी एक को चुनना पड़े तो वो किसे चुनेंगे ? वो चीन को चुनेंगे. क्योंकि उनकी जरूरतों और हितों को जितना चीन पूरा कर सकता है, सऊदी अरब तो उसके आगे कुछ भी नहीं है. बिल्कुल यही मसला सऊदी अरब के साथ है. सब जरूरत का खेल है.
नेपाल तो हिंदू देश है. और भारत पर काफी हद तक आश्रित भी रहा है. लेकिन अब चीन के साथ होता जा रहा है. वहां की पब्लिक में जाकर सर्वे कर ले कोई, 90% लोग इंडिया के खिलाफ बोलेंगे.

इजरायल कोई अछूत नहीं है. और उनसे सिर्फ इसलिए ही तो झगड़ा है कि उन्होंने फिलिस्तीनियों को कैद कर रखा है ? उन पर जुल्म कर रहा है ? उनकी जमीन पर अवैध कब्जा किया हुआ है. बाकी और क्या लड़ाई है ? बाकी वो पुरानी मजहबी मतभेद ? तो वो तो सबमें आपस में भी है ? और वो हमेशा रहने हैं. क्योंकि जब तक सबके कठमुल्ले रहने हैं, तब तक मतभेद भी रहेंगे.

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