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कहानी पप्पू यादव कीः अतीत रहा दागदार, पर संकट काल में बने तारणहार

Patna: पटना पुलिस ने जन अधिकार पार्टी के संयोजक राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव को मंगलवार को गिरफ्तार कर लिया. कोरोना गाइड लाइन का पालन नहीं करने के आरोप में पटना पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया है. दर्जनों आपराधिक घटनाओं में नामजद और आरोपी रहे पप्पू यादव आज के संकटकाल में नायक की छवि वाले नेता हैं.

बिहार में पिछली बार आयी बाढ़ के बीच वह इकलौते नेता थे, जो अपने बूते राहत के अभियान में जुटे थे. यह और बात है कि संकट में जनता की मदद को खड़े रहने के बावजूद बीते चुनाव में जनता ने उन्हें और उनकी पार्टी को नकार दिया था. आपदा के इस वक्त जब हर तरफ अफरा-तफरी है, लोग परेशानी में जूझ रहे हैं, तो ज्यादातर विधायक और सांसद ‘फरार’ हैं. वहीं पप्पू यादव मुसीबत में घिरे लोगों के लिए हर वक्त घने अंधेरे के बीच रोशनी के लेकर पहुंच रहे हैं.

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हर मदद को तैयार हैं पप्पू यादव

वरिष्ठ पत्रकार लव कुमार मिश्रा पप्पू यादव के बारे में कहते हैं कि पप्पू यादव अकेले नेता हैं जो दिन रात लोगों की मदद कर रहे हैं. उनका अतीत जो भी रहा हो लेकिन वर्तमान बिहार के राजनेताओं से अच्छा है. आम लोगों को जब नेताओं की जरुरत है तब सभी अपने घर में छिपे हुए हैं. इधर, पप्पू आम लोगों के बीच फ्री में खाना, ऑक्सीजन और दवा बांट रहे हैं.

राजनीतिक दलों के बड़े-बड़े नेता अपने घर में कैद हैं वहीं पप्पू यादव आए दिन उन्हें राजधानी पटना के सरकारी अस्पतालों में लोगों के पास उनकी दवा लेकर पहुंच रहे हैं. वो अस्पतालों में मरीजों को होने वाली परेशानी को उनके परिजनों के द्वारा सुनते हैं और अस्पताल की कार्यशैली को लेकर सवाल उठाते रहते हैं.

जब डूब रहा था पटना

यह पहला अवसर नहीं है जब पप्पू यादव ऐसा कर रहे हैं. 2 साल पहले पटना डूब रहा था तब भी वे उतना ही सक्रिय थे. इसी उत्साह से वे तब भी आम लोगों के बीच फरिश्ता बन कर आए थे. पटना की सड़कों पर गले भर पानी में डूब-डूबकर लोगों को दिन रात मदद की थी. जरूरतमंदों तक पीने का पानी और राशन पहुंचा रहे थे. रेस्क्यू कर रहे थे.

लोग आज भी तत्कालीन डिप्टी सीएम सुशील कुमार मोदी का वह हाफ पैंट पहने हुए रेस्क्यू वाला दृश्य नहीं भूले हैं. कैसे वे कई दिनों तक अपने घर में घिरे थे. तेजस्वी यादव दिल्ली में थे और नीतीश कुमार भी लंबे वक्त के बाद ही पटना का जायजा लेने निकले थे. तब पप्पू यादव लगातार पानी में डूब-डूबकर लोगों की मदद कर रहे थे. तब उनके आलोचकों ने कहा था पप्पू यादव नाटक कर रहे हैं.

पप्पू नाटक करते हैं तो हर किसी को करना चाहिए

वर्ष 2015 में पप्पू यादव ने तब अधिक सुर्खियां हासिल की थीं जब वे लालू-नीतीश की जोड़ी के खिलाफ खड़े हुए थे और एनडीए द्वारा फंडेड बताए जाते थे. हालांकि तब यह प्रयोग फेल रहा था. इसके बाद 2019 के लोकसभा चुनाव में भी इनपर वोटकटवा होने का आरोप लगा.

लेकिन हर मुसीबत के समय लोगों की सेवाभाव में इन्होंने कोई कमी नहीं की. पप्पू यादव जहां कोरोना के मरीजों को दवाइयां और ऑक्सीजन पहुंचाने में लगे हैं, वहीं कई लोग इसे फिर ‘नाटक’ कह रहे हैं. हालांकि कुछ लोग कहते हैं कि मुसीबत के समय खड़ा होने वाला शख्स अगर नाटक भी कर रहा है, तो यह सभी को करना चाहिए. लेकिन आपातकाल में घरों में छिपने वाला नेता नहीं चाहिए.

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