Jharkhand Story

कहानियां झारखंड आंदोलन की-10 : जब सीधी कार्रवाई के दौरान बच्चों ने भी लगाया था नारा- हम भी जेल जायेंगे!

Praveen Munda

Jharkhand Rai

Ranchi : झारखंड आंदोलन को देशभर में चलनेवाले सबसे लंबे आंदोलनों में से एक के तौर पर भी याद किया जाता है. यह आंदोलन कई दशकों तक चला. आंदोलन में राज्य के हर हिस्से से हजारों की संख्या में लोगों ने भाग लिया. इसमें कोई एक नायक नहीं था. कई साधारण लोग थे, जिन्होंने असाधारण काम किये. इस दौरान अनगिनत कहानियां बनीं. कई घटनाएं ऐसी थीं, जो यादगार बन गयीं. ऐसी ही घटनाओं में एक, सीधी कार्रवाई भी थी. इस आंदोलन में बच्चों को भी गिरफ्तार किया गया था.

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दरअसल, सीधी कार्रवाई आंदोलन के आखिरी चरण में जब पुलिस बड़ों को गिरफ्तार कर रही थी और बच्चों को छोड़ा जा रहा था, तब बच्चे भी चिल्ला उठे थे- हम भी जेल जायेंगे, हम भी! इलियास मजीद नामक आंदोलनकारी अपनी पुस्तक झारखंड आंदोलन और झारखंड गोमके होरो साहेब में लिखते हैं- आंदोलन में जो सैद्धांतिक परिपक्वता, जनसमर्थन मिला, उसकी नींव 1978 की सीधी कार्रवाई में रखी गयी थी. 16 अगस्त 1978 को सीधी कार्रवाई की शुरुआत हुई थी. यह एक महीने तक चली थी.

Samford

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सीधी कार्रवाई का आह्वान झारखंड पार्टी द्वारा किया गया था. इसकी शुरुआत प्रशासन को काला झंडा दिखाकर हुई थी. लोग काले बिल्ले लगाकर रांची की मुख्य सड़कों पर निकले. इलियास बताते हैं- रांची में काले बिल्ले लगाने के कारण कई छात्र-छात्राएं गिरफ्तार भी कर लिये गये. गिरफ्तार लोग 51 दिनों तक जेल में रहे.

सीधी कार्रवाई बिलकुल शांतिपूर्ण थी. इसे धरना-प्रदर्शन, अनशन, जनसभाएं, रास्ता रोको और बंद के जरिये अंजाम दिया जा रहा था. ये आयुक्त कार्यालय से लेकर ब्लॉक स्तर तक चलाये गये. हर जगह बड़ी संख्या में लोगों की इसमें भागीदारी रही. धरना-प्रदर्शन और अनशन पूरे छोटानागपुर, संथालपरगना, ओड़िशा के सीमावर्ती क्षेत्र में चले. इस दौरान वन आंदोलन भी चला. वन आंदोलन के क्रम में वन विभाग द्वारा हड़पे वनों पर भी कब्जा किया गया. झाड़ियों को साफ कर खेती की गयी. सागवान के पेड़-पौधों को काटने से रोका गया.

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इस आंदोलन के आखिरी चरण में 15 सितंबर को झारखंड बंद का आह्वान किया गया था. अविभाजित राज्य में रांची, पलामू, जमशेदपुर, चाईबासा और सुंदरगढ़ पूरी तरह बंद रहे. सड़कें सुनसान थीं और रेल तक रोके गये. रांची में पुरुषों और महिलाओं के साथ दर्जनों बच्चों को भी आंदोलन में गिरफ्तार किया गया था.

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