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पूंजीपतियों को जमीन दिलाना बंद करे, आदिवासियों को धर्म के नाम पर न बांटे सरकार :  गोपीकांत 

Ranchi : नदी,नाला खेल मैदान,हड़गड़ी,जतरा टांड़ समेत सभी सामुदायिक जमीनों को लैंड बैंक में शामिल किया जा रहा है,साथ ही इसे सिंगल विंडो सिस्टम के तहत पूंजीपतियों को भी दे दिया जा रहा है. इस तरह सरकार आदिवासियों,रैयतों, किसानों सहित जल,जंगल,जमीन को उखाड़ फेंकने की साजिश  कर रही है. उक्त बातें सीपीआइएम के राज्य सचिव गोपीकांत बख्शी ने कही.

वे तुपुदाना स्थित जमगाई में जौनी जौकीम तिरू के शहादत दिवस पर आयोजित जुलूस में शामिल हुए.  उन्होंने कहा कि गैरमजरूआ आम, गैरमजरूआ खास जमीन को सरकार लूट रही है.  सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने फरवरी में आदिवासियों को जंगल से हटाने की बात की थी.

जो सरकार के गैर जिम्मेदाराना रवैये के कारण हुआ. क्योंकि सरकार सुनवाई के दौरान उपस्थित नहीं रहती थी. भले ही जुलाई तक के लिए मामले को टाला गया है, लेकिन फिर भी मूलवासियों के गले में तलवार तो लटक ही रही है.

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 ग्राम सभा को अधिकार नहीं देने का नतीजा

गोपीकांत ने कहा कि 2018 में 42.19 लाख दावे पेश किये गये थे. जिसमें से 18.89 लाख को मंजूरी दी गयी. इन दावों में अधिकांश दावे ग्राम सभा की संस्तुतियों के खिलाफ जाकर ठुकरा दिये गये. सरकार ग्राम सभा से पूछना ही नही चाहती. वनाधिकार नियमों के अनुसार वन पट्टा देने के लिए ग्राम सभा की संस्तुति जरूरी है.

ऐसे में बिना ग्राम सभा के संस्तुति के सरकार मनमाने तरीके वन पट्टा को ठुकरा दे रही है. जबकि मूलवासियों का जीवन इसी पर निर्भर है. इन बातों से जानकारी हेाती है कि वन अधिकार पर पर दायर याचिका मे मिलीभगत की गयी है.

धर्म के नाम पर बांट रही सरकार

राज्य सचिव मंडल सदस्य प्रकाश विप्लव ने कहा कि सरकार लोगों को धर्म के नाम पर बांटने का काम रही है. पिछले साढ़े चार साल को देखे तो राज्य सरकार ने आदिवासियों को धर्म के नाम पर बांटने का काम किया. सरकार को चाहिए कि स्वच्छ राजनीति करें.

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धर्म के नाम पर राजनीति कर देश की छवि को धूमिल न करें. इस दौरान रैली के बाद आम सभा की गयी मौके पर राजेंद्र सिंह मुंडा, सुफल महतो, प्रफुल लिंडा, सुखनाथ लोहरा, सुरेश मुंडा समेत अन्य लोग उपस्थित थे.

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