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नामकुम : फर्जी ग्रामसभा दिखाकर ले ली पत्थर खदान, मात्र 300 मीटर की दूरी पर है स्कूल

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Ranchi : रांची जिला प्रशासन अवैध स्टोन क्रशरों को सील करने का अभियान कई बार चला चुका है. बिना दस्तावेजों के चल रहे अवैध क्रशरों को जेसीबी मशीन की मदद से ध्वस्त किये जाते रहे हैं. लेकिन अब भी फर्जी दस्तावेजों की मदद से लीज लेने वालों पर प्रशासन कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.

नामकुम अंचल के दुन्दू मौजा में फर्जी ग्रामसभा के आधार पर लाइसेंस प्राप्त कर हो रहे खनन कार्य से ग्रामीणों को कई समस्याओं का सामना करना पड़ रहा है. खदान से महज 300 मीटर दूरी पर नव सृजित प्राथमिक विद्यालय, टंगराटोली पर स्थित है. इसके बावजूद जिला खान अधिकारी ने खनन पट्टा दे दिया.

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दुन्दु मौजा में फर्जी ग्रामसभा के आधार पर खोली गयी क्रशर और खदान को लेकर ग्रामीण विरोध करते रहे है. लेकिन इसकी सुनवाई जिले के आला आधिकारियों द्वारा नहीं की गयी. अब ग्रामीण अंचल कार्यलाय में जाकर प्रर्दशन करने की बात कह रहे हैं.

ग्रामीण विनिता कुजूर कहती हैं, “ग्रामसभा को मिले संवैधानिक आधिकार को जिले के अधिकारियों द्वारा स्वीकार नहीं किया जा रहा है.  खनन और क्रशर से हो रहे नुकसान को लेकर अब तक कई बार अधिकारियों को ज्ञापन सौंपा गया, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई.”

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कहा है दुन्दू मौजा थाना नम्बर 274

फर्जी ग्रामभा दिखाकर ले ली स्टोन माइंस.
माइंस से महज तीन सौ मीटर दूर स्कूल.

रांची-खूंटी सड़क पर सफायर इंटरनेशनल स्कूल के पीछे दुन्दू मौजा स्थित है. इस गांव में 76 के करीब आदिवासी और दो दलित परिवारों की बसाहट है. टोला के लोगों की आजीविका मजदूरी और खेती है.

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ग्रामीणों के अनुसार क्रशर से टोला के लोगों को किसी तरह का फायदा नहीं हो रहा है, बल्कि नुकसान ही हो रहा है. खेती-बारी पर भी बुरा प्रभाव पड़ रहा है. हरदाग के टांगरटोली में दो नयी क्रशर मशीनें 2016 में लगायी गयी थीं जिसमें अब स्थानीय लोगों को काम में नहीं रखा जाता है.

गांव के लोग इसकी वजह बताते है कि 20 मई 2016 को एस के स्टोन के क्रशर में विस्फोट के दौरान कई मजदूर घायल हो गये थे, जिसमें बरती कुमारी और बलराम सिंह बिंझिया को काफी चोट लगी थी. बरती को अपने दोनों हाथ गंवाने पड़े थे. बलराम सिंह के पैर की हड्डी टूटकर बाहर निकल गयी थी. गांव वालों के विरोध के बाद के कारण गांव के लोगों को काम में नहीं रखा जाने लगा.

कब-कब किस आधिकारी के सामने लगायी गुहार

फर्जी ग्रामसभा दिखाकर ले ली पत्थर खदानग्रामीणों द्वारा 17 अप्रैल 2018 को खनन विभाग झारखंड प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड, जिला खनन पदाधिकारी, अंचलाधिकारी नामकुम, पुलिस उपाधीक्षक हटिया को आवेदन दिया गया जिस पर कोई कार्रवाई नहीं की गयी.

5 दिसंबर 2018 को भी एसडीओ को भी क्रेशर बंद करने संबंधी पत्र ग्रामसभा के द्वारा दिया गया.इसके बाद दो अप्रैल 2019 को नामकुम सीओ, प्रखंड विकास पदाधिकारी नामकुम को भी आवेदन दिये गये. हाल ही में 5 जुलाई 2019 को डीसी रांची को भी फर्जी ग्रामसभा के संबंध में जानकारी दी गयी. इसके बावजूद अब तक अधिकारियों के द्वारा किसी भी तरह की कार्रवाई नहीं की गयी.

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कैसे हुआ खेल फर्जी ग्रामसभा का

फर्जी ग्रामसभा के दस्तावेज हरदाग मुखिया द्वारा तैयार कर लीजधारियों को दिये गये. जिस कागज को ग्रामसभा की बैठक के रूप में लीज लेने के समय दिखाया गया उस कागज में ग्राम प्रधान ने हस्ताक्षर ही नही किया.

क्या है ग्रामसभा के अधिकार

पांचवीं अनुसूची क्षेत्र के अंतर्गत झारखंड के 13 जिले आते है जिसमें एक रांची भी है. 24 अप्रैल, 1993 से प्रभावी, संविधान (तिहत्तरवां संशोधन) अधिनियम, 1992, भारत के संविधान में नौवें भाग में सन्निविष्ट किया गया है और पंचायतों को ग्रामीण भारत के लिए स्थानीय स्व-शासन की संस्थाओं के रूप में एक संवैधानिक दर्जा प्रदान करता है. ग्रामसभा को अपने इलाके में लघु खनिज संपदा के प्रबंधन का अधिकार दिया गया है.

क्या कहते है टीएससी मेंबर

टीएसी मेंबर रतन तिर्की कहते हैं, पांचवी अनुसूची क्षेत्र में ग्राम सभाओं की भूमिका अहम होती है. यह अपने राजस्व क्षेत्र में ग्राम सरकार की तरह कार्य करता है. ग्रामसभा की अनुमति बिना लघु खनिज संपदा का दोहन करना असंवैधानिक है . दुन्दू मौजा में फर्जी ग्रामसभा कर खदान लीज लेने का मामला है. इस पर जिले के आला अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए.

क्या कहते हैं खदान संचालक

पूरे मामले पर खदान संचालक का कहना है, ग्रामीणों द्वारा फर्जी ग्रामसभा की बात करना बेबुनियाद है. सभी नियमो का पलान करते हुए खनन कार्य का पट्टा प्राप्त किया गया है. ग्रामीणों को किसी तरह का नुकसान ना हो इसका पूरा ख्याल रखा जाता है.

वही नजदीक में सरकारी स्कूल होने पर संचालक कहते हैं खदान में छोटे-छोटे विस्फोट किये जाते हैं ताकि किसी को कोई नुकसान ना हो और यह विस्फोट स्कूल चालू रहने के दौरान नहीं किया जाता.

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