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प्रधानमंत्री के हाथों मंडल डैम का शिलान्यास भाजपा का महज चुनावी स्टंट : योगेंद्र प्रताप

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Ranchi : झाविमो के केंद्रीय प्रवक्ता योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि शब्दों की जादूगरी में निपुण भाजपा व देश के प्रधानमंत्री मंडल डैम के नाम पर झारखंड की जनता व किसानों को दिग्भ्रमित कर रहे हैं. तीन राज्यों में भाजपा की करारी शिकस्त के बाद ये एक बार फिर किसानों के हमदर्द होने का झूठा राग अलाप रहे हैं. मंडल डैम के निर्माण से झारखंड को नफा-नुकसान की बात अभी छोड़ भी दी जाये, तो अहम सवाल है कि प्रधानमंत्री व भाजपा को अगर वास्तव में किसानों व जनता की फिक्र थी, तो साढ़े चार वर्षों तक इन्होंने इसकी सुध क्यों नहीं ली. चुनावी वर्ष होने के कारण एक बार फिर वे झारखंड की जनता की आंखों में धूल झोंकने की नाकाम कोशिश प्रारंभ कर चुके हैं, इसलिए भाजपा के चुनावी स्टंट के अलावा यह और कुछ नहीं है.

2017 में हुआ था साहेबगंज में गंगा पुल निर्माण का शिलान्यास, उसमें अभी तक एक ईंट भी क्यों नहीं लगी

योगेंद्र प्रताप सिंह ने कहा कि दूसरों को लेटलतीफी का उपदेश देनेवाली भाजपा को पहले यह बताना चाहिए कि अप्रैल 2017 में शिलान्यास हुए साहेबगंज गंगा पुल निर्माण कार्य में पौने दो साल बाद भी एक ईंट तक क्यों नहीं जोड़ी जा सकी. इसके लिए भाजपा सरकार समाज की गुनहगार नहीं है क्या? कितनी हास्यास्पद बात है कि अखबारों में किसानों की आय चौगुनी करने का सब्जबाग दिखानेवाली भाजपा के ही झारखंड के वरिष्ठ मंत्री सरयू राय को पत्र लिखकर किसानों को धान बिक्री का बोनस देने की ओर अपने ही दल के मुख्यमंत्री का ध्यान आकृष्ट कराना पड़ रहा है. वहीं, पहले की योजनाओं में हेरा-फेरी की बात कहनेवाले प्रधानमंत्री को पता होना चाहिए कि उनके दल के ही झारखंड के एक विधायक खुलेआम मनरेगा में 59 प्रतिशत कमीशन प्रथा होने की बात सार्वजनिक तौर पर कह चुके हैं. पलामू की सभा में बच्चों को पढ़ाई, किसानों को सिंचाई, बुजुर्गों को दवाई सरीखी बात कहनेवाले प्रधानमंत्री जी को शायद यह पता नहीं कि झारखंड में बच्चों की पढ़ाई नहीं, बल्कि उनके स्कूलों को बंद किया जा रहा है, छात्रवृत्ति में कटौती की जा रही है, पारा शिक्षकों को पीट-पीटकर सरकार मार रही है. किसानों को सिंचाई के बजाय वे आत्महत्या को मजबूर हैं. बुजुर्ग को दवाई तो सिर्फ कागजों तक ही सीमित है. यहां रिम्स में 50 रुपये के अभाव में बच्चे की मौत हो जा रही है. इसलिए, प्रधानमंत्री को यहां यह बात बोलनी चाहिए थी कि झारखंड में स्कूलों की विदाई, पारा शिक्षकों की दनादन ठुकाई, किसानों की जान मराई और बुजुर्ग-बच्चों को भाजपा सरकार रास नहीं आयी. उन्होंने कहा कि झाविमो भाजपा की सारी गलत नीतियों का प्रारंभ से विरोध करता रहा है और आगे भी करता रहेगा.

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