Opinion

आप लगे रहो प्रदूषण सर्टिफिकेट बनवाने की लाइन में, #Adani का काम तो हो गया!

Girish Malviya

Jharkhand Rai

‘पर्यावरण मंत्रालय ने कोयले से चलने वाले थर्मल पावर प्लांट्स से होने वाले वायु प्रदूषण के तय मानकों को बढ़ाने को मंजूरी दे दी.….आश्चर्य की बात है कि मोदी जी यूएन में जाकर भारत में पर्यावरण सरंक्षण पर लंबा चौड़ा भाषण झाड़ते हैं, वहीं उनकी सरकार थर्मल पावर प्लांट्स से निकलने वाली जहरीली गैस नाइट्रोजन ऑक्साइड की सीमा 300 से बढ़ाकर 450 mg/Normal Cubic Meter कर देती है…

जबकि पर्यावरण मंत्रालय ने सात दिसंबर 2015 को ही नोटिफिकेशन जारी कर थर्मल पावर प्लांट के लिए वायु प्रदूषण मानक 300 mg तय किया था. कोई तो पूछ ले कि इन साढ़े तीन सालों में देश में वायु प्रदूषण की मात्रा में कितनी कमी आयी है, जो अडानी को इतनी छूट दी जा रही है?

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Samford

दरअसल, मई 2019 को मंत्रालय को चार थर्मल पावर प्लांट के सात इकाइयों पर की गई एक मॉनिटरिंग रिपोर्ट भेजी गयी थी, जिसमें ये पाया गया था कि सात में से सिर्फ दो इकाइयां ही 300 mg/Nm³ के मानक से ज्यादा उत्सर्जन कर रही हैं. ये दोनों इकाइयां अडानी पावर राजस्थान लिमिटेड की हैं…..

अब अडानी जी तो प्रधान सेवक के परममित्र उद्योगपति ठहरे इसलिए उन्हें क्यों कष्ट दिया जाए लिहाजा सरकार ने ही अपने मानक बदल लिए ताकि उन्हें कोई तकलीफ न होने पाए…

पर अडानी जी पर यह मोदीराज में की गयी पहली मेहरबानी नहीं है, सच तो यह है कि अडानी पावर राजस्थान लिमिटेड को पहले भी नियमों के विरुद्ध जाकर बहुत सी छूट दी जा चुकी.

2014 में इंडियन एक्सप्रेस और ब्रिटिश अखबार ‘द गॉर्डियन’ ने भी छापा था कि भारतीय कस्टम विभाग के डॉयरेक्टरेट ऑफ रेवन्यू इंटेलिजेंस (डीआरआई) ने मशहूर कारोबारी घराने अडानी समूह पर फर्जी बिल बनाकर करीब 1500 करोड़ रुपये टैक्स हैवेन (टैक्स चोरों के स्वर्ग) देश में भेजने का आरोप लगाया है.

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गॉर्डियन के पास मौजूद डीआरआई के दस्तावेज के अनुसार, अडानी समूह ने बिजली परियोजना के लिए शून्य या बहुत कम ड्यूटी वाले सामानों का निर्यात किया और उनका दाम वास्तविक मूल्य से कई गुना बढ़ाकर दिखाया, ताकि बैंकों से कर्ज में लिया गया पैसा विदेश भेजा जा सके.

लेकिन 2019 में राजस्व विभाग ने अडानी ग्रुप द्वारा की गई टैक्स चोरी और हेराफेरी की जांच पर रोक लगा दी, कर चोरी के मामले में अडानी ग्रुप के खिलाफ चल रही कार्रवाई पर यह रोक राजस्व खुफिया निदेशालय (डीआरआई) ने लगाई थी.

राजस्व खुफिया निदेशालय के मुंबई क्षेत्राधिकार के एडीजी केवीएस सिंह ने 280 पन्नों की अपनी रिपोर्ट में 22 अगस्त को लिखा है, मैं विभाग के उस मामले से सहमत नहीं हूं, जिसमें कहा गया है कि एपीएमएल (अडानी पावर महाराष्ट्र लिमिटेड) और एपीआरएल (अडानी पावर राजस्थान लिमिटेड) ने अपनी संबंधित इकाई यानी ईआईएफ (इलेक्ट्रॉजन इन्फ्रा होल्डिंग्स प्राइवेट लिमिटेड) को कथित विवादित सामान आयातित मूल्य से अधिक मूल्य पर दिया है.

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2017 में सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका भी प्रस्तुत की गई थी, जिसमें कहा गया था कि ज्वाइंट वेंचर के रास्ते अडानी इंटरप्राइजेस लिमिटेड को फायदा पहुंचाया जा रहा है. राजस्थान सरकार को हर साल 9 हजार करोड़ रुपए का नुकसान उठाना पड़ रहा है. और राजस्थान के लोगों को महंगे दरों पर बिजली खरीदनी पड़ रही है.

दरअसल सरगुजा के उदयपुर ब्लॉक स्थित परसा ईस्ट एंड केतेबसान क्षेत्र में 2007 में कोल ब्लॉक का आवंटन राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड को किया गया था. लेकिन बाद में वसुंधरा सरकार की मिलीभगत से इसे जॉइंट वेंचर बनाकर इसमें अडानी को शामिल करवा लिया गया.

इस कोल ब्लॉक में अडानी की 74 फीसदी और राजस्थान विद्युत कंपनी की 26 फीसदी हिस्सेदारी है. इसके चलते ऐसी स्थिति आ गई है कि राजस्थान विद्युत कंपनी अपने ही कोल ब्लॉक से कोयला अडानी से खरीद रही है.

मोदी राज में अडानी को इस तरह से फायदा पहुंचाए जाने के अनेकों किस्से हैं,….. क्या-क्या गिनाए आपको…..’हरि अनंत हरि कथा अनंता’.

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(लेखक आर्थिक मामलों के सलाहकार हैं, ये इनके निजी विचार हैं)

 

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