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सरकार से मांगा धर्म परिवर्तन का आंकड़ा, दफ्तरों में घूमती रह गयी फाइल

आरटीआई के तहत तकरीबन एक महीने पहले मांगी गई जानकारी

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Chhaya

Ranchi: धर्म परिवर्तन के मसले को लेकर राज्य से लेकर केंद्र तक जमकर राजनीति हुई. हर नेता इस मुद्दे पर अपनी राजनीति चमकाता दिखा. पांच सितंबर 2017 को धर्म स्वतंत्रता विधेयक, झारखंड में पारित होने के पहले से ही राजनीति काफी गर्म थी. बीजेपी के वरिष्ठ नेता विधेयक के समर्थन में बयानबाजी करते दिख रहे थे. तो वहीं कुछ ऐसे भी थे, जो पीठ पीछे इसका विरोध भी करते नजर आये.

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विधेयक पारित हो जाने के बाद भी राजनीतिक दल चुप नहीं बैठे, किसी न किसी तरह से धर्म परिवर्तन के मुद्दे को विभिन्न मंचों में आग देते रहे. जिस धर्म परिवर्तन के मुद्दे को लेकर सरकार ने घमासान मचा रखा है. उसके आंकड़ें सरकार के पास भी नहीं है. राष्ट्रीय ईसाइ महासंघ की ओर से एक महीने पहले आरटीआई कर सरकार से धर्म परिवर्तन रिर्पोट की मांग की गयी. एक माह होने को है, लेकिन अभी तक सरकार के हवाले से महासंघ को सिर्फ पत्राचार तलब होने की सूचना ही मिल रही है.

आरटीआई के जरिये मांगी रिर्पोट

महासंघ की ओर से अधिवक्ता दीप्ति होरो ने अवर सचिव सह जन सूचना पदाधिकारी से राज्य के कितने आदिवासियों ने धर्म परिवर्तन किया. इसकी जानकारी आरटीआई के तहत मांगी. लेकिन एक महीने बाद भी अभी तक सरकार की ओर से सिर्फ अधिकारियों के आवेदन तलब के पत्र ही महासंघ को मिल रहे हैं. महासंघ की ओर से 11 सितंबर को पत्राचार किया गया. इसके बाद से लगातार राज्य में अलग-अलग अधिकारियों के बीच आरटीआई से संबधित आंकड़े की मांग अधिकारियों से की जा रही है.

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डिप्टी कलेक्टरों से मांगी गई रिर्पोट

अवर सचिव सह जन सूचना पदाधिकारी अमरेश कुमार को पत्र प्राप्त होते ही उन्होंने इसे जन सूचना पदाधिकारी विधि विभाग, राजस्व निबंधन को प्रेषित कर दिया. साथ ही कहा गया कि ससमय सूचना आवेदक को दी जायें. जिसके बाद हर जिला के डिप्टी कलेक्टरों से आंकड़े की मांग की गयी. डिप्टी कलेक्टरों ने पुलिस अधीक्षकों से आंकड़ें की मांग की, लेकिन किसी भी जिले से आंकड़ा नहीं मिला है.

विधि-विभाग को सूचना नहीं

24 सितंबर को सरकार के अवर सचिव सह जन सूचना पदाधिकारी ने गृह, आपदा प्रबंधन विभाग के पीआरओ को पत्राचार से सूचित किया कि विधि-विभाग के पास धर्म परिवर्तन से संबधित कोई आंकड़ा नहीं है. साथ ही पत्र में यह भी कहा गया कि धर्म स्वतंत्रता विधेयक 2017 के तहत प्रशासी विभाग गृह कारा है. इसलिये उक्त सूचना गृह कारा विभाग की ओर से दी जायेगी.

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सरकार के पास नहीं आंकड़े

राष्ट्रीय ईसाइ महासंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष प्रभाकर तिर्की ने बताया कि एक माह होने को है, नियमतः एक माह में आरटीआई के तहत रिर्पोट दे दी जानी चाहिए थी. लेकिन सरकार इधर-उधर से आंकड़ें जुटा रही है. जिससे साफ है कि जब सरकार ने धर्म परिवर्तन की बड़ी-बड़ी बातें कर लोगों को गुमराह कर रही थी, तब सरकार के पास भी इसके रिर्पोट नहीं थी.

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