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सीमा विवाद पर संसद में बयान : नेहरू बनाम राजनाथ सिंह

New Delhi :  एशिया के दो बड़े देशों भारत और चीन के बीच पिछले कुछ महीने से चल रहे तनाव पर इस समय पूरी दुनिया की निगाहें है. गलवान घाटी में हुए हिंसक झड़प के बाद से दोनों ही देशों की सेनाएं हिमालय की बर्फीली घाटियों में भारी हथियारों के साथ तैनात है. जो हालात है उससे युद्ध की आशंका बनी हुई है. लोकसभा में 15 सितंबर को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने चीन के साथ उपजे हालात पर पहली बार बयान दिय़ा. उनके बयान का सार था कि भारत बातचीत से हल निकालना चाहता है लेकिन चीन के साथ किसी भी तरह की परिस्थिति को लेकर तैयार है.

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दोनों ही नेताओं ने माना कि चीन की वजह से हालात खराब हुए

इस संदर्भ में  हम भारतीयों के मन में 1962 में हुए युद्ध की भी याद आती है. तब भी तकरीबन ऐसे ही हालात थे. उस दौरान लंबे वक्त तक सीमा पर तनाव के बाद अक्टूबर में युद्ध हुआ था. इसके बाद तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने संसद में बयान दिया था. उन्होंने चीन के धोखे की की जानकारी दी थी. यहां पंडित नेहरू के तब दिए गए बयान और रक्षामंक्षी राजनाथ सिंह के 15 सितंबर 2020 को बयानों को देखने से एक बात स्पष्ट होती है कि दोनों ही नेताओं ने यह कबूल किय़ा कि चीन ने समझौते को उल्लंघन किया और उसकी ही वजह से हालात खराब हुए.

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नेहरू ने कहा था चीन ने पंचशील समझौते का उल्लंघन किया

पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 8 नवंबर, 1962 को लोकसभा में दिए बयान में चीन के धोखे की बात कबूली थी. 8 नवंबर को लोकसभा में चीन की निंदा का प्रस्ताव रखा गया और चीन पर पंचशील समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया गया. इसके बाद नेहरू ने कहा, ‘..इस वक्त हम चीन के साथ सीमा पर युद्ध लड़ रहे हैं, पिछले 5 साल में चीन ने कई बार घुसपैठ करने की कोशिश की है. जो आज बड़ी संख्या में और हर रोज हो रहा है. नेहरू ने कहा था कि भारत की ओर से शांति की तमाम कोशिशों के बावजूद चीन ने धोखा दिया है. चीन ने भारत के साथ हुए पंचशील समझौते को नकार दिया है और सीमा पर घुसपैठ कर दी है. इस वक्त सीमा पर देश के जवान लड़ रहे हैं, जिनकी ये सदन और पूरा देश जमकर तारीफ करता है. इसके बाद जवाहर लाल नेहरू ने इस मामले पर पर 21 नवंबर 1962 और 22 नवंबर 1962 को भी बयान दिया.

राजनाथ सिंह ने कहा हालात चुनौती भरे हैं

मंगलवार को रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भी ऐसा ही बयान दिया. राजनाथ सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि लद्दाख में हालात चुनौती भरे हैं. रक्षा मंत्री ने कहा कि चीन ने 1993 में दोनों देशों के बीच हुए उस समझौते का उल्लंघन किया है जिसमें कहा गया था कि दोनों ही देश सीमा पर गोलीबारी नहीं करेंगे.इसके अलावा सैनिकों की संख्या कम रखने की बात भी कही गयी थी. इस समझौते का उल्लंघन हुआ है. रक्षामंत्री ने बयान में कहा कि चीन की ओर से अप्रैल से ही सीमा पर हलचल बढ़ रही थी. इसके बाद जून में घुसपैठ की कोशिश की गई. भारत के बीस जवान शहीद हो गए. इसके बाद फिर एक बार अगस्त में झड़प की कोशिश हुई और इस दौरान गोली चली. रक्षामंत्री ने कहा कि भारत सीमा पर शांति चाहता है और हमने हमेशा समझौते का पाहन किया लेकिन चीन की तरफ से लगातार समझौते का उल्लंघन हो रहा है.

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