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झारखंड में होगा राज्य जनजातीय आयोग का गठन: सीएम

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Ranchi/Dumka: आज का दिन संथाल परगना के लिए ऐतिहासिक दिन है. आज के ही दिन श्रद्धेय अटल बिहारी वाजपेयी ने संथाल भाषा को आठवीं अनुसूची में जोड़ने का कार्य किया था. अब राज्य सरकार उनके काम को आगे बढाते हुए अगले बजट में राज्य जनजातीय आयोग का गठन करेगी. इस आयोग में अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और हर प्रमंडल से एक प्रतिनिधि रहेंगे. उक्त बातें मुख्यमंत्री रघुवर दास ने आउटडोर स्टेडियम, दुमका में आयोजित प्रमंडलस्तरीय ग्राम प्रधान एवं परंपरागत प्रतिनिधियों के सम्मेलन में कहीं. मुख्यमंत्री ने कहा कि आजादी के 70 वर्ष के शासन में इस देश में अनेक शासक बने, लेकिन किसी ने आदिवासियों की समस्या के लिए कार्य नहीं किया. सभी ने यहां की भोली-भाली जनता को गुमराह करने का काम किया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री रहते हुए आदिवासी समाज को समृद्धि की ओर ले जाने का कार्य किया था. आज भी भारत के प्रधानमंत्री के रूप में देश की जनजातीय संस्कृति के विकास एवं सांस्कृतिक समृद्धि के लिए समर्पित होकर कार्य कर रहे हैं. उनके मार्गदर्शन के अनुरूप झारखंड में भी आदिवासी समाज के विकास के लिए प्रतिबद्ध प्रयास किये जा रहे हैं.

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झारखंड में जन्म लेने वाले हर व्यक्ति को स्वयं पर गर्व करना चाहिए 

मुख्यमंत्री ने कहा कि हम सभी को हम गर्व होना चाहिए. हमने वीरों की धरती संथाल परगना और झारखंड में जन्म लिया है. हमारी संस्कृति 1000 सालों की संस्कृति और मानव सभ्यता की विरासत है. इसी धरती के वीर शहीद सिदो-कान्हू, बिरसा मुंडा, तिलका मांझी, चांद-भैरव, फूलो-झानो ने अंग्रेजों को चुनौती देने का कार्य किया था और देश की आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी. लेकिन आजादी के बाद की सरकारों ने आदिवासी समाज के विकास को अपेक्षित महत्व नहीं दिया. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने झारखंड को 25 करोड़ रुपए राज्य हित में दिया है. जिससे राज्य सरकार द्वारा बिरसा मुंडा जेल के सौंदर्यीकरण का कार्य कराया जा रहा है. इसमें झारखंड के वीरों की मूर्ति स्थापित की जाएगी. उन्होंने उपस्थित सभी लोगों से अपील की कि 9 जनवरी से हर गांव से मिट्टी पहुंचाने का कार्य करें ताकि 23 जनवरी को सुभाष चंद्र बोस की जयंती के अवसर शहीदों की प्रतिमा में उक्त मिट्टी लगायी जा सके.

धर्मांतरण के माध्यम से हमारी संस्कृति पर हो रहा है हमला

इन दिनों धर्मांतरण के माध्यम से हमारी संस्कृति पर हमला किया जा रहा है. हमारी संस्कृति, हमारी भाषा हमारी परंपरा ही हमारी पहचान है. लेकिन कुछ लोग इसे नष्ट करने में लगे हैं. सरकार ने धर्मांतरण को रोकने के लिए कठोर कानून बनाया है. अब इस भोली-भाली जनता को लोभ लालच देकर धर्मांतरण करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा. उन्होंने कहा कि ग्राम प्रधान सदियों की परंपरा-संस्कृति को बचाने का कार्य करें. अपनी संस्कृति को बचाना सरकार के साथ साथ सभी जनता की भी जिम्मेवारी है. वहीं मौके पर मौजूद समाज कल्याण मंत्री डॉ लुईस मरांडी ने स्थानीय भाषा में कहा कि पिछले 67 साल से संथाल परगना के लोग खुद को ठगा महसूस कर रहे थे. लेकिन वर्तमान सरकार ने उन्हें सम्मान देने का कार्य किया है. माननीय मुख्यमंत्री ने संथाल परगना के विकास को प्राथमिकता पर रखकर कार्य किया है.

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