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स्टेट टॉपर अपूर्वा के पास नहीं किताब खरीदने के पैसे, कैसे पढ़ेगी बिटिया-कैसे बढ़ेगी बिटिया ?

सीए बनना चाहती है अपूर्वा, सरकार की ओर से नहीं मिली कोई मदद

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Ranchi: अपूर्वा सिंह जब 2017 में इंटर कॉमर्स में स्टेट टॉपर बनी तो उसे लगा कि उसके सपनों को अब पंख मिलेंगे. सीए बनने का उसका सपना जरुर पूरा होगा. क्योंकि उसके पास आगे बढ़ने का जुनून है, मेहनत है और सरकार का साथ है. दरअसल रघुवर सरकार ने घोषणा की थी कि वह स्टेट टॉपरों की आगे की पढ़ाई का सारा खर्च उठायेगी. वादा कर भूलने की आदी झारखंड सरकार अपना ये वादा भी भूल गयी. और हालत ये है कि अपूर्वा के पास किताबें खरीदने के लिए भी पैसे नहीं है.

जानें आखिर क्यों अपूर्वा ने की जान देने की बात

‘पढ़ाई रुकी तो आत्महत्या कर लूंगी’

सीए बनने का सपना देख रही अपूर्वा के लिए पढ़ाई ही सबकुछ है. गरीबी से जूझ रहे परिवार के पास अपनी बिटिया को पढ़ाने के लिए रुपए नहीं. सरकार की उपेक्षा ने भी अपूर्वा की तकलीफ और बढ़ा दी है. एक-एक रुपये जोड़ किसी तरह से परिवार का गुजारा चल पाता है. हकीकत तो ये है कि इनके पास तीन समय खाने के लिए खाना तक नहीं, ऐसे में अपूर्वा को पढ़ाए भी तो कैसे, तंगहाली के कारण अपूर्वा किताबें तक नहीं खरीद पा रही. अपूर्वा के सपनों के आगे गरीबी की चट्टान इतनी बड़ी होती जा रही है कि वो तंग आकर कहती है कि  “अगर मेरी पढ़ाई रुक गयी, तो मैं आत्महत्या कर लूंगी. मैं आगे पढ़ाई नहीं कर पायी, तो मेरे जीने का कोई मतलब ही नहीं रहेगा.

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11 हजार में सिमटा पढ़ाई का खर्च

बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ कहनेवाली राज्य की रघुवर सरकार इस बेटी को पढ़ाने का अपना वादा पूरा नहीं कर रही है. 2017 में इंटर कॉमर्स में स्टेट टॉपर बनने पर सरकार की ओर से अपूर्वा को सम्मानित तो किया गया. लेकिन आगे पढ़ाई का खर्चा उठाने की घोषणा, मात्र उस प्रशस्ति पत्र और 11 हजार रुपये की पुरस्कार राशि तक ही सिमट कर रह गई, जो स्टेट के टॉपर्स को दी जाती है. उसके बाद राज्य सरकार ने कभी भी अपूर्वा की पढ़ाई की कोई सुध नहीं ली.

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अखिल भारतीय महासभा ने की मदद

अपूर्वा की प्रतिभा और उसकी पढ़ाई की ललक को देखते हुए अखिल भारतीय महासभा ने उसकी मदद की. रांची के न्यू मधुकम, रातू रोड की रहनेवाली अपूर्वा सीए बनना चाहती है. इसकी तैयारी के लिए अखिल भारतीय महासभा ने पिछले साल 32 हजार रुपये फीस देकर अपूर्वा का नामांकन लालपुर के एक संस्थान में कराया. इसका परिणाम यह हुआ कि अपूर्वा ने सीए फाउंडेशन एग्जामिनेशन में सारे पेपर अच्छे मार्क्स से पास किये. लेकिन, इस साल की फीस के लिए अपूर्वा को 80 हजार रुपये देने हैं और अपूर्वा के घर की हालत उतनी अच्छी नहीं है कि 80 हजार रुपये दे सके.

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एकबार फिर से समाज के लोग और अखिल भारतीय महासभा अपूर्वा की मदद को प्रयासरत है. लेकिन फिलहाल उसकी आगे की पढ़ाई को लेकर सरकार की ओर से अभी तक किसी तरह की कोई पहल नहीं की जा रही.

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