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राज्य सूचना आयुक्त का पद खाली, छह हजार से ज्यादा अपील पेंडिंग

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Vineet Upadhyay

Ranchi : राज्य सूचना आयुक्तों की बहाली के लिए राज्य सरकार तीन साल के भीतर तीन बार विज्ञापन निकाल चुकी है. इसके लिए काफी संख्या में आवेदन मिलने के बावजूद बहाली नहीं हो सकी है. झारखंड हाईकोर्ट के निर्देश के बावजूद इस दिशा में कोई समुचित कदम भी नहीं उठाये गये. वो भी  तब जबकि लंबे अरसे से सूचना आयुक्तों की कमी के कारण छह हजार से अधिक अपीलवाद सुनवाई के लिए लंबित हैं. दस दिनों बाद स्थिति ऐसी आनेवाली है कि राज्य सूचना आयोग में न तो सुनवाई के लिए कोई अपीलवाद लिया जा सकेगा, न ही सुनवाई होगी.

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इसके कार्यकलापों पर लॉकडाउन की स्थिति आ जायेगी. कार्यकारी मुख्य सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी का कार्यकाल आठ मई को खत्म होने के बाद कार्यरत करीब 65 अधिकारियों-कर्मचारियों को बैठाकर वेतन देने की नौबत आ चुकी है.

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तत्कालीन रघुवर सरकार ने निकाला था विज्ञापन

उल्लेखनीय है कि फरवरी 2017 में तत्कालीन रघुवर सरकार ने सूचना आयुक्त की बहाली का विज्ञापन निकाला था. उस समय कुल 11 पदों के विरुद्ध जन मुख्य सूचना आयुक्त आदित्य स्वरूप के अलावा सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी कार्यरत थे. लंबे समय तक बहाली प्रक्रिया शुरू नहीं करने के बाद झारखंड हाईकोर्ट में एक जनहित याचिका दायर की गयी थी.

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अदालत के कड़े रूख के कारण तत्कालीन सरकार ने सूचना आयुक्तों की बहाली के लिए दोबारा विज्ञापन प्रकाशित किया. बाद में सूचना आयुक्तों की सेवा शर्तों में संशोधन कर दिया गया, जब अकेले सूचना आयुक्त हिमांशु शेखर चौधरी कार्यरत रह गये तो एक सूचनाधिकार कार्यकर्ता ने एक बार फिर से झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया.

जल्दी ही हो सकती है कोर्ट में मामले की सुनवाई

सेवा शर्तों में संशोधन के कारण हेमंत सरकार ने मुख्य सूचना आयुक्त और पांच सूचना आयुक्तों की बहाली का विज्ञापन निकालकर अदालत को आश्वस्त किया कि बहाली प्रक्रिया शीघ्र पूरी कर ली जायेगी. इस संबंध में सरकार प्राप्त आवेदनों की सूची बनाने के सिवाय कुछ और नहीं कर सकी है, बहाली पर निर्णय लेने की प्रक्रिया अपनायी जाय तो जल्दबाजी करने पर भी करीब एक माह समय लगने की उम्मीद है.

अब एक नया पेंच यह भी फंस गया है कि राज्य में नेता प्रतिपक्ष पद पर स्पीकर ने किसी को मान्यता नहीं दी है. जबकि सूचना आयुक्तों की नियुक्ति कमिटी में नेता प्रतिपक्ष एक महत्वपूर्ण सदस्य होते हैं. इस संबंध में एक अवमानना याचिका भी हाईकोर्ट में दायर की गयी है.

लेकिन कोविड-19 के कारण  हाईकोर्ट  अति आवश्यक मामलों की ही सुनवाई कर रहा है, इसलिए अब तक अवमानना याचिका पर सुनवाई नहीं हो सकी है. अब उम्मीद की जा रही है कि हाईकोर्ट में मामले की सुनवाई होगी और राज्य में सूचना आयुक्तों के रिक्त पदों पर भर्ती की जा सकेगी.

मई माह से राज्य सूचना आयोग में एक भी सदस्य नहीं हैं, ऐसे में वहां कार्यरत लगभग 65 कर्मियों की वेतन निकासी भी एक समस्या है, दूसरी जो महत्वपूर्ण बात है कि पिछले लगभग 3 महीनों से राज्य सरकार 65 कर्मियों को बगैर किसी काम के बिठाकर वेतन भुगतान कर रही है.

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