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राज्य शिक्षा परियोजना ने बदले 1248 कर्मियों के पदनाम, सता रहा आउटसोर्सिंग का भय

विगत दिनों आयोजित राज्य कार्यरकारिणी की बैठक में इसका निर्णय लिया गया था.

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Ranchi : राज्य शिक्षा परियोजना के अंतर्गत कार्यरत कर्मियों के पदनामों में बदलाव किया गया है. विगत दिनों आयोजित राज्य कार्यरकारिणी की बैठक में इसका निर्णय लिया गया था. इस बदलाव से कर्मचारियों के बीच आउटसोर्सिंग का भय हो गया है.

परियोजना के तहत कार्यरत 1248 कर्मियों के पदनामों को बदला गया है. इनमें 263 अकाउंटेंट्स हैं जिन्हें अब अकाउंटेंट्स सह कंप्यूटर ऑपरेटर कहा जायेगा. वहीं 206 ब्लाॅक प्रोग्राम ऑफिसर कार्यरत हैं जिनका पदनाम अब ब्लाॅक प्रोग्राम मैनेजर कर दिया गया है. ये कर्मी लगभग 20 सालों से राज्य में कार्यरत हैं.

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सूत्रों से जानकारी मिली है कि प्रखंड स्तर पर डाटा इंट्री ऑपरेटर के 263 और एमआइएस काॅडिनेटरों के 264 पद स्वीकृत हैं. दोनों पदों को जोड़कर पदों की जानकारी कार्यकारिणी को दी गयी है. वहीं डीईपी पद पर कार्यरत कर्मियों के पदनामों को भी बदल दिया गया है.

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स्थायी नियुक्ति की गयी थी सरकार की ओर से

जिन पदों का नाम परियोजना की ओर से बदला जा रहा है उन पर कर्मचारियों की स्थायी नियुक्ति की गयी थी. नाम बदलने के निर्णय के बाद अकाउंटेंट्स ही कंप्यूटर ऑपरेटर का काम करेंगे.

यही नहीं, जिन ब्लाॅक स्तरीय डाटा ऑपरेटरों और एमआइएम काॅडिनेटरों के पद स्वीकृत हैं, उनके लिये अलग से बजट का प्रावधान है. लेकिन विभाग की ओर से इन दोनों पदों को एक ही बताया जा रहा है.

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छह माह पूर्व हो चुकी है आउटसोर्सिंग भर्ती

इस संबध में कुछ परियोजना कर्मियों से बात की गयी तो जानकारी हुई कि कर्मचारियों में पदनाम बदले जाने से काफी भय है. कर्मचारियों का कहना है कि सरकार इन कर्मचारियों को आउटसोर्सिंग करने की योजना बना रही है.

छह माह पूर्व बोस्टर कंसलटेंट ग्रुप और पिरामल फाउंडेशन के तहत शिक्षा परियोजना में आउटसोर्सिंग से कर्मचारियों को नियुक्त किया गया था.

राज्य परियोजना कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजीव शरण ने इस संबध में कहा कि दोनों कंपनियों की ओर से आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को सरकार परियोजना परिषद में समाहित करना चाह रही है. ऐसे में पूर्व से कार्यरत स्थानीय कर्मचारियों के समक्ष परेशानी उत्पन्न होगी.

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